मुंबई: केईएम के ICU में आग, मासूम प्रिंस का हाथ और कान जला

मुंबई: प्रिंस के दिल में छेद है जिसके लिए उसे मंगलवार को यहां भर्ती कराया गया था। 48 घंटे बाद उसके शरीर से लगी ईसीजी मशीन में शॉर्ट सर्किट हो गया और उससे निकली आग प्रिंस के बेड पर पहुंच गई। इस वक्त वह लाइफ सपॉर्ट पर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट में गुरुवार तड़के करीब 3 बजे आग लग गई। यूनिट में 40 बेड हैं और सिर्फ प्रिंस के बेड पर ही आग लगी थी। डॉक्टरों ने बताया कि प्रिंस के बायें हाथ और कान इस कदर जले हैं कि उन्हें स्किन ग्राफ्ट की जरूरत पड़ सकती है। उसकी पीठ भी घायल हो गई है। डॉक्टरों ने बताया, केईएम के डीन डॉ. हेमंत देशमुख और पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट इन-चार्ज डॉ. मुकेश अग्रवाल ने प्लास्टिक सर्जन्स के साथ मिलकर प्रिंस को देखा।
केईए ने घटना के बाद जांच शुरू कर दी है और सभी ईसीजी मशीनों का इंस्पेक्शन किया जा रहा है। एक मेडिको-लीगल केस भी भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज कराया गया है। अस्पताल के सूत्रों ने बताया है कि पीडियाट्रीक इंटेसिंव यूनिट एक साल पुरानी भी नहीं है। डीन डॉ. देशमुख ने बताया कि पूरा अस्पताल घटना से स्तब्ध रह गया है। उन्होंने बताया कि केईएम में ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई है।
अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि प्रिंस के बेड पर आग देखकर कुछ नर्सों ने शोर मचाया और तुरंत कुछ गार्ड्स आग बुझाने पहुंचे। उनके बाद डॉक्टर और डीन पहुंचे। सूत्रों ने बताया कि यह गार्ड्स ने फौरन अंदर जाकर आग को काबू में किया जिससे दूसरे बच्चे आग की चपेट में नहं आए और 10 मिनट में आग बुझा ली गई।
हालांकि, अभी तक प्रिंस समेत सभी 40 बच्चों को उसी यूनिट में रखा गया है। एक डॉक्टर ने बताया कि इस यूनिट की तरह दूसरी फसिलटी नहीं है, इसलिए बच्चों को वहीं रखा गया है लेकिन 24 घंटे उन्हें मॉनिटर किया जा रहा है। केईएम के डीन ने बताया है कि प्रिंस पर ट्रीटमेंट का असर हो रहा है और दूसरे बच्चे सेफ हैं। उन्होंने बताया, डॉक्टर प्रिंस और दूसरे बच्चों को मॉनिटर कर रहे हैं। अस्पताल की सभी ईसीजी मशीनों का इंस्पेक्शन किया जा रहा है।
प्रिंस के पैरंट्स को रिश्तेदार ढाढ़स बंधा रहे हैं। पन्नेलाल वाराणसी में एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं और किसी तरह घर का खर्च चला पाते हैं। उन्होंने बताया है कि एक हफ्ते पहले वह प्रिंस को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के सर सुंदरलाल अस्पताल में ले गए था जहां उसे निमोनिया और वेंट्रिकुलर सेप्टम डिफेक्ट बताया गया। वहां उन्हें पता चला कि मुंबई के केईएम में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सबसे अच्छा इलाज मिलता है। वाराणसी के पन्नेलाल राजभर और संध्या उस घड़ी को कोस रहे हैं जब वे अपने चार महीने के बेटे को बीएमसी के केईएम अस्पताल लेकर आए थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *