लव टिप्स : रिश्ते को उलझन बनने से कैसे रोकें?

अक्सर रिश्ते में दूरियां बढ़ने पर लोग सोचते हैं, कि आखिर मैं ही क्यों पहल करुं? साथ ही कई बार ये ख्याल भी आने लगता है कि इस रिश्ते को खत्म कर देना ही बेहतर है। हालात चाहे कोई भी हों, लेकिन गुस्से या आवेश में आकर कोई फैसला न करें बल्कि ठंडे दिमाग से पूरे मामले पर विचार करें। फिर अगर आपको लगता है कि रिश्ते में देर नहीं हुई है लेकिन समझ नहीं आ रहा है कि दूरियां कैसे खत्म करें, तो परेशान न हों, बल्कि इसके लिए जरुरी प्रयास शुरु कर दें। दरअसल थोड़े-से प्रयासों से आप अपने बिखरे रिश्ते को दोबारा खुशहाल बना सकते हैं। इसके लिए आप चाहें, तो कुछ उपायों की मदद ले सकते हैं-

किसी शायर ने क्या खूब लिखा है-

यूं इस दिल-ए-नादां से रिश्तों का भरम टूटा, हो चाहे झूठी कसम टूटी या झूठा सनम टूटा…

इश्क की राह में अक्सर ऐसे मोड़ आते हैं जब कहीं किसी बात या घटना से रिश्ते की नाजुक डोर खिंचने लगती है। वैसे तो किसी भी टूटते रिश्ते को संभालना आसान नहीं होता, लेकिन प्रयास से पहले हिम्मत हारने में भी समझदारी नहीं है। साथ ही रिश्ते में पड़ रही दरार को अगर समय रहते न भरा जाए, तो खाई बनते और हमेशा के लिए रिश्ता खत्म होते देर नहीं लगती।

किसी भी रिश्ते को लम्बे समय तक कायम रखने के लिए यह आवश्यक है कि हम यह जानें कि हमारे अंदर ऐसे कौन से गुण हैं जो हमारे साथी को हमारे साथ जीवन बिताने पर विवश कर दें। अपना आत्म विश्लेषण कर मैंने पाया कि मेरे अदंर यह निम्न गुण हैं-


ईमानदारी
कर्तव्य, मर्यादा व सत्य का पूर्ण निष्ठा से पालन करना ईमानदारी है। ईमानदारी सर्वश्रेष्ठ नीति है। किसी रिश्ते को दीर्घकाल तक कायम रखने के लिए यह आवश्यक है कि आपसी संबंधों में ईमानदारी रहे। ईमानदार होना लोगों का हम पर विश्वास बनाए रखने में मदद करना है। झूठे लोगों पर कोई जल्दी भरोसा नहीं कर पाता है। ईमानदारी जीवन में हमें सब कुछ उम्मीद के अनुसार देती है। वहीं एक झूठ किसी भी रिश्ते को बर्बाद कर सकता है।

स्पष्टवादिता
किसी भी रिश्ते को निभाने के लिए यह आवश्यक है कि रिश्ता दिल से निभाया जाए न कि बोझ समझकर। साथी की अगर कोई बात पसंद नहीं है या उसे समझ नहीं पा रहे हैं तो इस डर से कि अगर मैंने कुछ कहा तो दूसरे को बुरा लगेगा ये सोचने के बजाय स्पष्ट रूप से अपनी बात कहकर उस समस्या का समाधान करें। स्पष्ट बात किसी को कुछ क्षण के लिए बुरी लग सकती है। लेकिन सुनने वाला भी यह जानता है कि मन में कुढ़ने की जगह स्पष्ट रूप से बात कह कर समस्या का समाधान कर लेना अधिक अच्छा होता है।

गलती का एहसास है जरूरी
जब तक गलती का एहसास नहीं होता, दूरियां खत्म करना मुश्किल होता है। अगर गलती आपकी है तो उसके लिए अपने को दोष न दें, बल्कि दूसरे को उससे कितना कष्ट हुआ होगा, उसे महसूस करने का प्रयास करें। जब गलती का एहसास होगा, तभी उसे ठीक करने के लिए दिल से प्रयास कर पाएंगे। अगर गलती सामने वाले पक्ष की है, तो भी अपना मन खराब न करें। सही वक्त आने पर उसे सही तरीके से बताने का इंतजार करें और अगर बात वहीं खत्म होती है तो बगैर जिक्र किए हमेशा के लिए भूल जाएं। ध्यान रखें, किसी भी इंसान से गलती हो सकती है और जरुरी दोष ढूंढना नहीं, बल्कि रिश्ता संभालना है।

माफी मांगने में शर्म कैसी?
कई बार दो लोग आपस में अपनी-अपनी बात पर अड़े रहते हैं, यहां तक कि गलती साबित होने पर भी माफी मांगने से पीछे हटते हैं। ध्यान रखें, कि रिश्ते को सुधारने के लिए अगर गलती मान भी ली, तो आप छोटे नहीं हो जाएंगे। दरअसल अपने प्यार के सामने झुक जाने से फर्क नहीं पड़ता, बल्कि सामने वाले के दिल में आपके लिए इज्जत बढ़ जाती है।

माफी मंगवाने की जिद न ठानें
अगर गलती सामनेवाले की है तो उसे अपने सामने झुकाने पर आमादा न हों, बल्कि उसे मन से माफ कर बड़प्पन का परिचय दें। माफी मंगवाने की जिद पर अड़े रहने से बात संभलने के बजाय और बिगड़ सकती है। हो सकता है गलती का एहसास होने पर वह आपसे खुद माफी मांग ले।

हरदम गलती का जिक्र या दोषारोपण न करें
गलती हो गई, हालात बिगड़ गए, लेकिन अब बस इन्हें यहीं रोक दें। हरदम गलती पर चर्चा न करें, न ही एक-दूसरे पर दोषारोपण करें, वरना बातों ही बातों में फिर हालात बिगड़ते देर नहीं लगेगी। बेहतर होगा, कि सबकुछ भुलाकर एकदम सामान्य पेश आएं। संभव हो सके, तो दोनों ही इस तरह व्यवहार करें, जैसे कुछ हुआ ही न हो। एक वक्त के बाद आपको गलती और उससे जुड़ी बातों को बिल्कुल भूल जाएंगे।

फूंक – फूंक कर कदम आगे बढ़ाएं
टूटे रिश्ते को संभालते समय यह ध्यान रखें, कि आपके किसी प्रयास से बात बनने की बजाय बिगड़ न जाएं। अक्सर तनाव के समय अच्छी बात भी अगर सही तरीके से जाहिर न की जाए, तो उसका नतीजा बुरा भी हो सकता है। इसलिए जो भी करें, बेहद सावधानी और सोच-समझकर करें। ऐसे में सामनेवाले की पसंद-नापसंद का भी खास ध्यान रखें। एक साथ मुस्कुरा कर देखें। आप दोनों तनावमुक्त महसूस करेंगे इस प्रक्रिया के लिए अपने अहम साइड में रखने होंगे।

बेवजह शक न करें
अक्सर लोग झगड़े या तनाव के बाद बेवजह एक-दूसरे पर शक करने लगते हैं। याद रखें, कि शक वह बीमारी है जिसका इलाज किसी डॉक्टर के पास नहीं हैं। शक रिश्ते को केवल कुछ समय के लिए ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि धीरे-धीरे खोखला करता चला जाता है। इसलिए अगर आप रिश्ते सुधारना चाहते हैं, तो एक-दूसरे पर भरोसा करें, एक-दूसरे को समझने की कोशिश करें। इस तरह के प्रयासों से आपका रिश्ता न केवल खुशहाल बनेगा, बल्कि उसमें कई नए सुखद रंग बिखर जाएंगे!

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