नेटवर्क महानगर/मुंबई
महाराष्ट्र सरकार ने NEET पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्रों और आंदोलनकारियों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने इन प्रदर्शनों के दौरान दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने का फैसला किया है।
गृह विभाग की ओर से जारी शासन निर्णय (GR) के अनुसार, जंतर-मंतर आंदोलन के समर्थन में महाराष्ट्र में हुए प्रदर्शनों के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाएगा। हालांकि, पुलिस इन मामलों की जांच जारी रखेगी और चार्जशीट दाखिल करेगी।
सरकार के इस फैसले से उन छात्रों और आंदोलनकारियों को राहत मिलेगी, जिनके खिलाफ NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने के दौरान पुलिस ने मामले दर्ज किए थे। इसके साथ ही सरकार ने इस फैसले के तहत आने वाले मामलों की समय सीमा भी बढ़ा दी है।
महाराष्ट्र सरकार के फैसले के अनुसार, पेपर लीक और दूसरी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों और युवाओं के खिलाफ दर्ज केस वापस लेने की समयसीमा 31 मार्च, 2027 तक बढ़ा दी गई है।
किनके खिलाफ मामले होंगे वापस?
सुप्रीम कोर्ट ने भी उन छात्र आंदोलनकारियों के खिलाफ कार्रवाई न करने और केस वापस लेने का निर्देश दिया था जिन पर गंभीर जुर्म नहीं हैं। राज्य सरकार ने भी इन छात्रों पर दर्ज मामले वापस लेने का फैसला लिया है। इससे पहले सीएम देवेंद्र फडणवीस ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) मनीषा म्हैसकर से सीजेपी (CJP) के नेतृत्व वाले आंदोलनों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा था।
बता दें कि NEET पेपर लीक के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर महाराष्ट्र भर में हजारों छात्रों ने विरोध-प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। इसके बाद पुलिस ने कई छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। हालांकि, राज्य सरकार दर्ज मामले तभी वापस ले सकती है जब चार्जशीट दाखिल हो जाए या पुलिस कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट जमा कर दे।
मौजूदा प्रक्रिया के तहत पुलिस को मामलों की पहले जांच करती है और फिर चार्जशीट दाखिल की जाती है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद सरकार को अगर एफआईआर (FIR) वापस लेना चाहती है तो उसका वकील कोर्ट जाने से पहले मामले सरकारी कमेटियों के पास जाता है।
