राजेश जायसवाल/मुंबई
विमुक्त समाज को सहानुभूति की नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार, सम्मान और न्याय की जरूरत है। उन्हें स्थिर और चिंतामुक्त जीवन जीने वाले समाज के रूप में पहचान दिलानी है। साथ ही 52 भटक्या-विमुक्त समाज को एक साथ लाकर उनके अधिकारों के लिए देशव्यापी आंदोलन खड़ा करने के लिए सरकार कटिबद्ध है, उक्त बातें सोमवार को राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहीं।
माटुंगा में ‘विमुक्त दिवस’ के अवसर पर ‘शिवसेना भटके विमुक्त हक्क, न्याय व विकास परिषद’ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वे बोल रहे थे। क्रांतिसूर्य महात्मा ज्योतिबा फुले, छत्रपति शाहू महाराज, भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और वसंतराव नाईक को अभिवादन कर उपमुख्यमंत्री शिंदे ने अपने भाषण की शुरुआत की।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि कल परभणी में एक संजय ने भीड़ दिखाई, आज मुंबई में इस संजय ने शक्ति दिखाई, ऐसा कहते हुए शिंदे ने संजय राठौड़ के पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिवसेना (DNT) सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में राठौड़ पर 52 समाजों को एकजुट करने की जिम्मेदारी है और उन्होंने तांड्या के व्यक्ति को मंत्रालय से जोड़ा है। अंग्रेजों ने क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के जरिए इस मेहनतकश समाज पर जन्मजात अपराधी होने का कलंक लगाया था। 31 अगस्त 1952 को इस कलंक से मुक्ति मिली। इसलिए यह दिन स्वतंत्रता, स्वाभिमान और संघर्ष का ऐतिहासिक दिन है। हमें किसी की मेहरबानी नहीं चाहिए, इंसान के रूप में जीने का अधिकार और हक चाहिए। आज भी शिक्षा, रोजगार, आवास, स्वास्थ्य, जाति प्रमाण पत्र के साथ-साथ आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड के लिए समाज को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं को दूर करने का आश्वासन देते हुए शिंदे ने कहा कि विमुक्त समाज की पहचान केवल संघर्ष की नहीं, बल्कि शिक्षा, उद्योग, नेतृत्व और विकास की होनी चाहिए। समाज के बच्चे डॉक्टर, वकील, इंजीनियर और उद्यमी बनने चाहिए। युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य बीमा, रोजगार के लिए आर्थिक सहायता, कौशल विकास, स्टार्टअप और उद्योग के माध्यम से अवसर उपलब्ध कराने पर सरकार का जोर है।
शिंदे ने वसंतराव नाईक विकास महामंडल की योजनाओं को और अधिक मजबूती देने की भूमिका भी रखी। उन्होंने कहा कि भटक्या-विमुक्त समाज की लोककला, हस्तकला और पारंपरिक व्यवसायों के संरक्षण के लिए राज्यस्तरीय बड़ा सम्मेलन आयोजित कर कलाकारों को मंच और प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस समाज द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में दिए गए योगदान का भी उन्होंने गौरव किया।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ के संदेश को आचरण में लाने का आह्वान करते हुए शिंदे ने 52 समाजों से एकजुटता बनाए रखने को कहा। उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि ‘पांच उंगलियां अलग-अलग दिशा में होती हैं; मुट्ठी बंद करने पर ताकत बनती है’। सिर्फ शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि समाज की स्थिति में बदलाव लाना ही उद्देश्य है, इसलिए “चेंज मेकर बनो,” ऐसा आह्वान शिंदे ने युवाओं से किया। इस मौके पर संवैधानिक अधिकार और न्याय पाने की आशा लिए बड़ी संख्या में बंजारा, मदारी, भोई, वैदू, वासुदेव, बहुरूपी, पारधी, गोंधली, वडार, वंजारी, गोसावी, लमान, धनगर, मसनजोगी, नाथपंथी जैसे विभिन्न घटकों सहित 52 समाज इस परिषद में एकजुट हुए।
उपमुख्यमंत्री ने ‘लाडली बहन’ योजना बंद नहीं होगी, यह बताते हुए ही किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के विकास को सरकार की प्राथमिकता बताया। यह एकनाथ शिंदे दिया हुआ वादा निभाता है, ऐसा कहते हुए 52 भटक्या-विमुक्त समाजों के अधिकार, सम्मान और विकास की लड़ाई में वे मजबूती से साथ खड़े हैं, इसकी गवाही उन्होंने दी।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव, भटक्या-विमुक्त सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मंत्री संजय राठौड़, मंत्री गुलाबराव पाटील, मंत्री शंभूराज देसाई, मंत्री संजय शिरसाट, राज्यसभा सांसद प्रो. ज्योति वाघमारे, लेखक लक्ष्मण गायकवाड़, शिवसेना सचिव संजय मोरे, भाऊसाहेब चौधरी, प्रवक्ता राहुल लोंढे सहित अन्य विधायक और बड़ी संख्या में शिवसेना के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।
