नेटवर्क महानगर/मुंबई
साइबर ठगों ने अब लोगों को लूटने का एक नया और अनोखा ‘हाईटेक’ तरीका निकाल लिया है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे ही इंटरस्टेट साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने देश की एक बड़ी कंपनी को 10 करोड़ 40 लाख रुपये से अधिक का चूना लगाया है। मुंबई पुलिस ने इस नए साइबर फ्रॉड को ‘बॉस स्कैम’ नाम दिया है। इस मामले में दक्षिण साइबर पुलिस स्टेशन (क्राइम ब्रांच) ने कार्रवाई करते हुए 3 राज्यों से 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश अभी जारी है।
साइबर सेल के डीसीपी बजरंग बनसोड़े ने बताया कि इस ठगी की सबसे खास बात यह थी कि इसमें शिकार को न तो कोई फिशिंग लिंक भेजा गया, न ही OTP या बैंकिंग डिटेल मांगी गई। ठगों ने सिर्फ ‘भरोसे’ को अपना हथियार बनाया। ठगों ने कंपनी के डायरेक्टर की फोटो लगाकर एक फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाया। इस नंबर से कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी को मैसेज भेजा गया, जिसमें लिखा था कि ‘डायरेक्टर’ एक अहम मीटिंग में व्यस्त हैं और कुछ बेहद जरूरी भुगतान तत्काल प्रभाव से करने हैं। अधिकारी ने डायरेक्टर का मैसेज समझकर बिना कोई शक किए, अलग-अलग बैंक खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब तक अधिकारी का संपर्क असली डायरेक्टर से हुआ, तब तक कंपनी के खाते से 10.40 करोड़ रुपये उड़ चुके थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी और बैंकिंग ट्रेल की बारीकी से जांच करते हुए पुलिस ने महाराष्ट्र के जालना, बिहार के सीवान और दिल्ली में एक साथ छापेमारी कर 7 आरोपियों को धरदबोचा। पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए 5 करोड़ 63 लाख 98 हजार रुपये से अधिक की रकम विभिन्न बैंक खातों में फ्रीज करवा दी है।
सोना खरीदकर मिटाते थे मनी ट्रेल
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि गिरोह के सदस्य ठगी की रकम को ट्रेस होने से बचाने के लिए उसे कई बैंक खातों में घुमाते थे। इसके बाद, उस रकम से उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और महाराष्ट्र के कई नामी ज्वेलर्स से सोना खरीदा जाता था, ताकि मनी ट्रेल को पूरी तरह खत्म किया जा सके। पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और एटीएम कार्ड समेत कई डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
पुलिस की कंपनियों से अपील
पुलिस का मानना है कि इस गिरोह का नेटवर्क बहुत बड़ा है और इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इसी ‘बॉस स्कैम’ के जरिए अन्य कंपनियों को भी निशाना बनाया गया है। मुंबई पुलिस ने अपील की है कि किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से आने वाले वित्तीय लेन-देन या भुगतान संबंधी निर्देशों की कॉल करके पुष्टि जरूर करें, बिना पुष्टि के फंड ट्रांसफर न करें। साइबर ठगी या ऑनलाइन फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाईन) पर कॉल करें। यह राष्ट्रीय हेल्पलाइन चौबीसों घंटे चालू रहती है। इसके अलावा आधिकारिक वेबसाइट National Cyber Crime Reporting Portal पर जाकर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
