नेटवर्क महानगर/मुंबई
महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (एमवीए) को तगड़ा झटका लगा है. शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीएसपी) अब एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ अलायंस का फैसला ले चुकी है. यानी महायुति गठबंधन के अंदर ही एक और गठबंधन होने जा रहा है. शरद पवार सीधे तौर पर एनडीए में पार्टी का विलय नहीं करेंगे बल्कि शिंदे की शिवसेना को समर्थन देते हुए गठबंधन में शामिल होने वाले हैं.
सूत्रों के हवाले से एक बड़ी खबर यह भी मिली है कि जयंत पाटील को सरकार में वित्त मंत्री का पद दिया जा सकता है. यह पद पहले देवेंद्र फडणवीस के करीबी एनसीपी चीफ अजित पवार के पास हुआ करता था. अब जब शरद पवार गुट एकनाथ शिंदे के साथ जाएगा तो सियासी समीकरण क्या होंगे?
अब क्या होगा महायुति का फॉर्मूला?
जयंत पाटील ने दो दिन पहले ही सीएम देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी. इसके बाद गुरुवार (16 जुलाई) को जयंत पाटील और जितेंद्र आह्वाड डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे से मिले. एकनाथ शिंदे और जितेंद्र आह्वाड दोनों ही ठाणे से आते हैं और वहां एक दूसरे के धुरविरोधी माने जाते हैं. ऐसे में यह मुलाकात अहम मानी जा रही थी. जब पहली बार शरद पवार के एनडीए में शामिल होने की बात हुई तो प्रमुख दल बीजेपी की तरफ से प्रस्ताव रखा गया कि शरद पवार और अजित पवार की एनसीपी वापस से एकसाथ मिल जाएं. हालांकि, यह बात दोनों ही पार्टियों को मंजूर नहीं थी. सुनेत्रा पवार यह नहीं चाहती थीं कि पार्टी में पावर का बंटवारा हो. दूसरी ओर, शरद गुट भी यह कह रहा था कि शरद पवार जैसे दिग्गज नेता और सुप्रिया सुले जैसी सीनियर सांसद सुनेत्रा पवार के मातहत काम कैसे कर सकते हैं? इन सभी वजहों से दोनों गुटों का मर्जर हो नहीं सका. बीजेपी भी यह नहीं चाहती कि इतने बड़े दलों के शामिल होने के बाद महायुति में खिचड़ी की स्थिति बने. सीट शेयरिंग को लेकर को विवाद न हो, इसके लिए पार्टी ने एक फॉर्मूला तय किया. शरद पवार और एकनाथ शिंदे पहले से ही इस पर बातचीत कर रहे थे. दोनों ने तय किया था कि शिवसेना और एनसीपी-एसपी मिलकर अलायंस करेंगे. शरद गुट महायुति में मर्ज नहीं होगा. भविष्य में जो भी चुनाव होंगे, उसमें सीट शेयरिंग शिंदे गुट और शरद गुट के बीच में होगी. दोनों ही अपने-अपने गढ़ों में अपने कैंडिडेट्स उतारकर एनडीए का हिस्सा बनेंगे.
