ठाणे: ठाणे जिले में भिवंडी मजिस्ट्रेट कोर्ट (जिला न्यायालय) के नए भवन का बुधवार को उद्घाटन किया गया।
इस मौके पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश अभय एस ओक ने कहा कि जिला और तालुका स्तर की अदालतों को दूसरे स्तर (सेकेंडरी) का नहीं समझा जाना चाहिए।
न्यायाधीश अभय ओक ने कहा है कि जिला और तालुका स्तर की अदालतों को दूसरे स्तर (सेकेंडरी) का नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि ये आम जनता को न्याय दिलाते हैं। बुधवार को ठाणे जिले में भिवंडी मजिस्ट्रेट कोर्ट (जिला न्यायालय) के नए भवन के उद्घाटन समारोह के मौके पर उन्होंने अपनी ये बातें रखी।
न्यायाधीश अभय ओक ने कहा, आम जनता को न्याय दिलाने में जिला और तालुका स्तर की अदालतों का बहुत बड़ा हाथ है इसलिए न्यायिक प्रणाली में इनकी भूमिका अहम है और इन्हें सेकेंडरी कोर्ट (Secondary Court) के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि पिछले इस सालों में महाराष्ट्र में अदालतों के कुछ बेहतर परिसरों का निर्माण किया गया है। राज्य सरकार को फिर भी अधिक उत्तम सुविधाओं के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए ताकि लोगों को न्याय मिलने में आसानी हो, इस प्रक्रिया में तेजी आई। उन्होंने इस दौरान सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) के अधिक इस्तेमाल पर जोर दिया और कहा कि ठाणे जिला स्तरीय अदालत को भी इस दिशा में पहल करनी चाहिए।
लंबित मामलों का अब जल्दी हो निपटारा: न्यायमूर्ति गौरी गोडसे
इस दौरान, बाम्बे हाइकोर्ट (Bombay High Court) की न्यायमूर्ति गौरी गोडसे ने भिवंडी कोर्ट के जजों के साथ-साथ वकीलों से पांच-दस साल से लंबित मामलों को जल्द से जल्द निपटाने का आग्रह किया।
केंद्रीय पंचायती राज राज्यमंत्री कपिल पाटिल ने इस दौरान अपने सांसद निधि से भिवंडी कोर्ट में एक डिजिटल लाइब्रेरी बनाए जाने के लिए सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया।
