नेटवर्क महानगर/मुंबई
मुंबई के भायखला पुलिस स्टेशन अंतर्गत बीते 11 अगस्त को एक सीनियर सिटीजन के साथ साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया था। पीड़ित को फोन कर बताया गया कि बैंक की ओर से उनका Senior Citizen Card बनाया जाएगा। इसके लिए उन्हें एक APK फाइल इंस्टॉल करने और उसमें डेबिट कार्ड समेत अन्य निजी जानकारी भरने को कहा गया। बैंक की बात मानकर सीनियर सिटीजन ने APK इंस्टॉल किया और अपनी डेबिट कार्ड व पर्सनल डिटेल्स डाल दीं। इसके बाद उनके खाते से ₹5 लाख 62 हजार ट्रांसफर हो गए।
साइबर फ्रॉड की इस घटना में मामला दर्ज होने के बाद जांच प्रॉपर्टी सेल को ट्रांसफर की गई। तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को इस साइबर फ्रॉड का लिंक इंदौर से मिला। इसके बाद पुलिस ने 36 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक आरोपी B.Tech ड्रॉपआउट है। उसने पढ़ाई छोड़ने के बाद खुद APK फाइलें डेवलप करना शुरू किया। अब तक की जांच में सामने आया है कि उसने कुल 2,805 APK फाइलें डेवलप कीं। इनमें Senior Citizen Card Verification APK, Pension Card Verification APK, Life Certificate APK, RTO Challan और Credit Card से संबंधित APK समेत कई तरह की फाइलें शामिल हैं।
मुंबई पुलिस के क्राइम ब्रांच डीसीपी राजतिलक रौशन ने मीडिया को बताया कि आरोपी खुद हर मामले में फ्रॉड नहीं करता था, बल्कि इन APK फाइलों को साइबर फ्रॉड करने वालों को बेचता था। फ्रॉडस्टर्स इन फाइलों का इस्तेमाल पीड़ितों से उनकी निजी और बैंकिंग जानकारी हासिल करने के लिए करते थे। आरोपी के पास बैकग्राउंड में टेक्निकल सपोर्ट देने वाले लोग भी रेंट पर थे, जो APK से जुड़े तकनीकी काम में मदद करते थे। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी इस पूरे नेटवर्क की ऊपरी कड़ी में से एक है। पुलिस के मुताबिक, 2,805 APK फाइलें अलग-अलग कीमतों पर बेची गईं। किस APK को कितने में बेचा गया और किन-किन लोगों को बेचा गया, इसकी जांच अभी जारी है।
9,673 संभावित पीड़ित, 1,074 शिकायतें और 88 FIR
अब तक मिले रिकॉर्ड के मुताबिक 9,673 संभावित पीड़ितों का पता चला है। इनमें से 1,074 शिकायतें पुलिस के पास आई हैं। इन शिकायतों में महाराष्ट्र से 143 और मुंबई से 36 शिकायतें शामिल हैं। अब तक 88 FIR सामने आई हैं। रिपोर्ट किए गए मामलों में करीब ₹15.75 करोड़ का फ्रॉड सामने आया है। हालांकि, जांच के आधार पर पुलिस को अनुमान है कि इस पूरे नेटवर्क से जुड़ा फ्रॉड करीब ₹150 करोड़ तक हो सकता है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर यह रकम और बढ़ सकती है।
क्राइम ब्रांच के मुताबिक, यह सिर्फ महाराष्ट्र या मुंबई तक सीमित मामला नहीं है। जांच ऑल इंडिया लेवल पर की जा रही है। आरोपी ने APK फाइलें देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद फ्रॉडस्टर्स को बेची होने की आशंका है। पुलिस अब उन सभी फ्रॉडस्टर्स तक पहुंचने की कोशिश कर रही है जिन्होंने आरोपी से APK खरीदी और उसका इस्तेमाल कर साइबर फ्रॉड किया। आगे इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
बता दें कि इससे पहले मुंबई साइबर पुलिस ने मेडिकल प्रैक्टिस के लिए जरूरी- FMGE के फर्जी सर्टिफिकेट बनाने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी ने APK बेचने के लिए कोई वेबसाइट या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म नहीं बनाया था। फ्रॉडस्टर्स से उसका संपर्क फोन के जरिए होता था। पुलिस के मुताबिक शुरुआत में एक फ्रॉडस्टर ने आरोपी से संपर्क किया था। आरोपी ने खुद को APK डेवलपर बताया और इसके बाद उसके जरिए दूसरे फ्रॉडस्टर्स तक भी पहुंच बनी। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि आरोपी ने अब तक कितने लोगों को APK बेची और उसके संपर्क में कितने फ्रॉडस्टर्स थे।
डर, लालच और विश्वास में लेकर करते थे टारगेट
मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के मुताबिक, साइबर फ्रॉड में आमतौर पर पीड़ितों को डर, लालच या किसी सुविधा का भरोसा देकर टारगेट किया जाता है। सीनियर सिटीजन वाले मामले में आरोपी ने बैंक से Senior Citizen Card बनवाने का भरोसा दिया और APK इंस्टॉल करने को कहा। पुलिस के मुताबिक फ्रॉडस्टर्स पहले पीड़ित को मनोवैज्ञानिक तरीके से विश्वास में लेते हैं और उसके बाद APK इंस्टॉल करवाकर बैंकिंग या निजी जानकारी हासिल करते हैं। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी ने APK डेवलप और बेचने का काम किया, जबकि फाइनल फ्रॉड करने वाले लोग अलग थे। इन फ्रॉडस्टर्स और आरोपी के बीच के पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक आरोपी को इंदौर से गिरफ्तार कर मुंबई लाया गया है और आगे की जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कहां-कहां APK बेची गईं, कितने फ्रॉडस्टर्स इस नेटवर्क से जुड़े हैं और कुल कितने लोगों को निशाना बनाया गया।
