मुंबई, समाजसेवी अन्ना हजारे ने सरकार से मांग की है कि जब जनता किसी वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को ज्ञापन सौंपने जाए, तो अधिकारी के लिए यह अनिवार्य बनाया जाए कि वह ज्ञापन लेने के लिए खुद दफ्तर के दरवाजे तक उठ कर आए। अन्ना का कहना है कि अफसर जनता के सेवक हैं, लेकिन उनका व्यवहार मालिकों जैसा है। वह अपने दफ्तर में कुर्सी पर बैठे-बैठे ज्ञापन स्वीकरते हैं। अफसरों का यह प्रोटोकॉल अंग्रेजों का बनाया हुआ है, इसे रद्द किये जाने की मांग अन्ना हजारे ने सरकार से की है।

