Varanasi Chachi Kachori and Pahalwan Lassi shop Actions Demolished
अंकेश जायसवाल/वाराणसी
जब भी खान-पान की बात की जाती है, तो बनारस का नाम सबसे पहले आता है। इसलिए इसे नाश्ते का शहर भी कहा जाता है। यहां की गलियों से नाश्ते की खुश्बू बिखरती रहती है। यानी खाने से ज्यादा क्रेज यहां नाश्ते का है। हर घंटे शहर के अलग-अलग इलाकों में कुछ न कुछ गरमागरम नाश्ता न सिर्फ बनता रहता है, बल्कि परोसा भी जाता है। लंका क्षेत्र की ऐसी दो दुकानों में से एक है 110 साल पुरानी ‘चाची की दुकान’ जो कचौड़ी के लिए आज देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। दूसरी ‘पहलवान लस्सी’। अब प्रसिद्ध ‘चाची की कचौड़ी’ और ‘पहलवान लस्सी’ की दुकान को बिना किसी विरोध के पीडब्लयूडी ने जमींदोज कर दिया।

दरअसल, लहरतारा से भिखारीपुर तिराहा, लंका चौराहा होते हुए भेलूपुर विजया माल तक बनने वाले फोरलेन सड़क की जद में लंका चौराहे के पास 35 से अधिक दुकानें आ रही है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने नापी करने के साथ मकान और दुकान पर लाल निशान लगाकर महीनेभर पहले ही नोटिस थमा दी थी। शहर के लहरतारा-मंडुआड़ीह-बीएलडब्ल्यू-लंका होते हुए 4 लेन तो लंका से रविंद्रपुरी-विजया भेलूपुर तक 6 लेन रास्ता बनने जा रहा है। 9.5 किमी की सड़क लगभग 325 करोड़ रुपयों की लागत से तैयार होने जा रही है। बताया जा रहा है कि सभी दुकानदारों को एक महीने पहले ही नोटिस दे दिया गया था और उन्हें सरकार की ओर से उचित मुआवजा भी दिया गया है। लेकिन मंगलवार को जब चाची की दुकान और पहलवान लस्सी गिराई जा रही थी तो न सिर्फ काशीवासियों बल्कि देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से यहां घूमने आने वाले लोगों का भी दर्द छलक पड़ा। ‘पहलवान लस्सी’ और ‘चाची की कचौड़ी’ जैसी प्रतिष्ठित दुकानों को तोड़े जाने से स्थानीय निवासी खासे भावुक हैं। इन दुकानों का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है, जो बनारस की पहचान बन चुकी है, जहां आम आदमी से लेकर नौकरशाह, राजनेता और बॉलीवुड के दिग्गज राजेश खन्ना, मनोज सिन्हा, अरुण जेटली और स्मृति ईरानी समेत कई मशहूर फ़िल्मी हस्तियां इन दुकानों पर नाश्ता करने आ चुकी हैं।
‘चाची की दुकान’ की कचौड़ी सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि बनारस की ज़ुबान, तेवर और स्वाद का अनोखा संगम है। इस दुकान की शुरुआत 1915 में छन्नी देवी ने की थी, जिन्हें आज सब ‘चाची’ के नाम से जानते हैं। भले ही चाची अब इस दुनिया में नहीं हैं (उनका निधन 2012 में हुआ), लेकिन उनके हाथों का स्वाद आज भी हर कचौड़ी में महसूस किया जा सकता है।
कचौड़ी से साथ बनारसी गाली खाने आते थे लोग!
इस दुकान की सबसे ख़ास बात यह थी कि चाची जब कचौड़ी परोसती थीं, तो साथ में एक बनारसी गाली भी देती थीं, जिसे लोग ‘आशीर्वाद’ मानते थे। इससे जुड़े कई किस्से मशहूर हैं- चाची के बेटे कैलाश यादव बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा बीएचयू में पढ़ाई के दौरान जब यहां नाश्ता करने आते थे तो अक्सर चाची से जान-बूझकर मजाक किया करते थे। क्योंकि उनको गाली सुननी होती थीं।
इसके अलावा फिल्म स्टार राजेश खन्ना ‘काका’ भी चाची से गाली सुन चुके है और चाची ने उनसे पैसे लेने के बजाए 10 रुपए उनको सिगरेट पीने को दिए थे। साथ ही बीएचयू के छात्र हो या फिर स्थानीय लोग, किसी भी बड़े काम या परीक्षा में जाने से पहले चाची के मुंह की गाली सुनना ‘शुभ’ मानते थे और सफल हो जाने पर उनके लिए तोहफे भी लेकर आते थे।
कैलाश यादव ने बताया कि कई बीएचयू के कुलपति भी चाची की कचौड़ी खाने और गाली सुनने आते थे। उन्होंने बताया कि दुकान पर हर रोज़ सुबह-शाम करीब 600 से अधिक कचौड़ियां छानी जातीं, और दो घंटे के भीतर 200 से ज्यादा लोग कचौड़ी, सीताफल की सब्ज़ी और मटका जलेबी का आनंद उठाकर लौट जाते हैं। यहां दोना-पत्तल में परोसे जाने वाला हींग-चना दाल की डबल लेयर कचौड़ी, सीताफल की चटपटी सब्ज़ी और मटका जलेबी का ये कॉम्बिनेशन बनारस के दिल में उतर चुका है। लोग इसे सिर्फ खाना नहीं, बल्कि बनारसी अनुभव मानते हैं। उनका कहना है कि सरकार उनके पुर्नवास की व्यवस्था जरूर करे। क्योंकि चाची की दुकान खत्म हो जाने से एक युग खत्म हो गया है। चाची के बेटे कैलाश यादव और पोते आकाश यादव ने अब दुर्गाकुंड इलाके में चाची 2.0 के नाम से एक रेस्टोरेंट भी खोला हुआ है।
फेमस हस्तियों का लगता था तांता!
देशभर में मशहूर ‘पहलवान लस्सी’ की दुकान पर सेलेब्रेटी का भी तांता लगा रहता था। चाहे स्वर्गीय राजनेता अरुण जेटली हो या स्मृति ईरानी। जो भी बनारस आता था लस्सी जरूर पीता था। बाहर से आने वाले पर्यटक ‘चाची की कचौड़ी’ का स्वाद और ‘पहलवान लस्सी’ का स्वाद लेना नहीं भूलते थे।
काशीवासियों का छलका दर्द!
मंगलवार 17 जून की देर रात जब ये दोनों दुकानें तोड़ी जा रही थीं, उस वक्त लंका रविदास गेट के पास से गुजरने वाले बाइक सवारों और राहगीरों का दर्द छलका। उनके मन में कई सवाल उठे। उन्होंने कहा कि अरे, ई का हो गईल…चाची की कचौड़ी की दुकान टूट गईल। उधर, पहलवान के लस्सी क दुकान भी टूटत हव.., अब कहां सबेरे चाची की कचौड़ी खाइब, अउर पहलवान के लस्सी कहां भेंटाई..। चौराहे से जो भी गुजर रहा था, वह ‘चाची की कचौड़ी’ की दुकान पर पीडब्ल्यूडी का बुलडोजर चलते देख मर्माहत रहा। रात 10.30 बजे जैसे ही बुलडोजर चला, लोगों की भीड़ सी लग गई। देर रात कार्रवाई चलती रही। मौके पर लंका पुलिस, पीएसी समेत भारी फोर्स तैनात रही। फ़िलहाल, ये दुकानें सड़क के किनारे पर थी, सड़क चौड़ीकरण के तहत विभाग के पास इन्हें तोड़ने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था।

सड़क विस्तार का उद्देश्य लोगों की सुविधाओं को बेहतर बनाना है: महापौर
वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि सड़क के विस्तार का उद्देश्य लोगों की सुविधाओं को बेहतर बनाना है। अतिक्रमण को हटाने के लिए उचित प्रक्रिया का पालन किया गया है। उन्होंने कहा कि काशी के लोगों के फायदे के लिए सड़क को चार लेन तक चौड़ा करने के लिए ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। सभी प्रभावित दुकानदारों को 2 महीने पहले ही नोटिस दिया गया था, जिनकी जमीन अधिग्रहित की गई है। उन दुकानदारों को उचित मुआवजा मिलेगा।
फिर खुली ‘चाची की कचौड़ी’ की दुकान
हालांकि, स्वाद के शौकीन काशीवासियों के लिए खुशखबरी यह है कि ‘चाची की कचौड़ी’ की दुकान एक बार फिर से शुरू हो गई है। मंगलवार को चाची की कचौड़ी’ की दुकान के टूट जाने से उनके चाहने वाले काफी मायूस हो गए थे, लेकिन अब एक बार फिर ठीक पुरानी दुकान यानि मलबे के सामने दुकान खुल जाने से लोगों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है।
दरअसल, यहां पहले चाची कचौड़ी की दुकान का कारखाना हुआ करता था, जिसमें कचौड़ी की तैयारी हुआ करती थीं, लेकिन अब इसका इस्तेमाल दुकान के तौर पर होना शुरू हो गया है। दुकान का स्थान बदल जाने से उनके चाहने वालों में कोई कमी नहीं आई है। आज गुरुवार को काफी संख्या में लोग चाची की कचौड़ी का लुत्फ लेने यहां पहुंचे थे।
