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नेटवर्क महानगर/पालघर
पालघर जिले के वसई-विरार में अवैध निर्माण और मनी लॉन्ड्रिंग के सनसनीखेज मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बुधवार को वसई-विरार महानगरपालिका (VVMC) के पूर्व आयुक्त अनिल पवार, बहुजन विकास आघाड़ी (BVA) के पूर्व नगरसेवक सीताराम गुप्ता, उनके बेटे अरुण गुप्ता और वीवीएमसी के डिप्टी टाउन प्लानर वाय.एस. रेड्डी को गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी ने गुरुवार को इन चारों को स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया, जहां से कोर्ट ने इन्हें 20 अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेज दिया। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने मंगलवार सुबह वसई स्थित वसई-विरार महानगरपालिका के पूर्व आयुक्त अनिल कुमार पवार के सरकारी बंगले पर छापा मारा था। पवार के नेतृत्व वाला वसई-विरार महानगरपालिका बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में लिप्त है। पवार के तबादले के ठीक एक दिन बाद यह छापेमारी की गई।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2009 से 2024 के बीच वसई-विरार में 41 अवैध रिहायशी और कमर्शियल इमारतों के निर्माण का मामला सामने आया है। इन इमारतों का निर्माण सरकारी और निजी जमीन पर हुआ था। आरोप है कि उस समय के वर्तमान आयुक्त अनिल पवार ने बिल्डरों से प्रति स्क्वायर फीट 20-25 रुपये की रिश्वत लेकर फाइलें पास कीं। ईडी का दावा है कि इस घोटाले में अनिल पवार ने स्थानीय राजनेताओं, बिल्डरों, आर्किटेक्ट्स और वीवीएमसी इंजीनियरों से बिचौलियों के साथ मिलकर सांठगांठ की। जांच में डिजिटल डिवाइसों से भी कई सबूत भी मिले हैं।
ईडी ने मई 2025 में नालासोपारा, वसई, विरार और हैदराबाद में छापेमारी की थी, जिसमें 8.6 करोड़ रुपये नकद और 23.2 करोड़ रुपये की ज्वेलरी बरामद हुई थी। जुलाई में अनिल पवार के रिश्तेदार के घर से 1.3 करोड़ रुपये जब्त किए गए। जांच के दौरान अनिल पवार के परिवार के नाम पर बेनामी संपत्ति भी सामने आई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इन 41 अवैध इमारतों को ढहाने का आदेश दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन हाल ही में वह अपील खारिज हो गई।
गुरुवार को स्पेशल PMLA कोर्ट में ईडी और बचाव पक्ष के बीच तीखी बहस हुई। ईडी की वकील कविता पाटील ने कहा कि यह एक गंभीर आर्थिक अपराध है, जो सुनियोजित तरीके से किया गया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि अनिल पवार और अन्य आरोपियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर आर्थिक लाभ कमाया। ईडी ने जांच के लिए दस दिन की हिरासत मांगी, क्योंकि आरोपियों ने जांच में सहयोग नहीं किया और कई लोगों के आर्थिक हित इस मामले से जुड़े हैं।
वहीं, अनिल पवार के वकील उज्ज्वल चव्हाण ने गिरफ्तारी को गैरकानूनी करार दिया। उन्होंने कहा अनिल पवार ने जांच में पूरा सहयोग किया, फिर भी झूठे आरोप लगाकर उन्हें फंसाया गया। यह ईडी का तयशुदा तौर-तरीका है। उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। वकील चव्हाण ने सनसनीखेज दावा किया कि अनिल पवार ‘शिवसेना’ के कैबिनेट मंत्री दादा भुसे के रिश्तेदार (भांजी के पति) हैं, इसलिए उन्हें जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा, बीजेपी और शिवसेना के बीच आंतरिक विवाद के चलते यह साजिश रची गई। चूंकि चुनाव नजदीक हैं, कुछ विधायकों के हितों को साधने के लिए पवार को निशाना बनाया गया। अनिल पवार के वकील ने यह भी कहा कि अवैध निर्माणों के खिलाफ पवार ने कार्रवाई की थी और कोई भी फाइल अकेले उनके हस्ताक्षर से पास नहीं होती। सभी जरूरी दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट और निवेश की जानकारी ईडी को पहले ही दी जा चुकी है।
वहीं, पूर्व नगरसेवक सीताराम गुप्ता, अरुण गुप्ता और वाय.एस. रेड्डी के वकीलों ने भी दस दिन की हिरासत का विरोध किया। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल जांच में सहयोग कर रहे हैं और कोई भी निर्णय अकेले नहीं लिया जाता। कई विभागों की मंजूरी के बाद ही फाइलें पास होती हैं। वकीलों ने दावा किया कि ईडी को सारी जानकारी पहले ही दी जा चुकी है।

ईडी ने पूर्व नगरसेवक सीताराम गुप्ता और उनके बेटे अरुण गुप्ता को इस अवैध निर्माण रैकेट का मुख्य आरोपी बताया है। जांच में सामने आया कि इनका वीवीएमसी अधिकारियों के साथ गहरा तालमेल था। इस पूरे घोटाले में बिल्डरों, अधिकारियों और बिचौलियों का एक बड़ा नेटवर्क शामिल है। अब ईडी की हिरासत में चारों आरोपियों से गहन पूछताछ की जाएगी। ईडी के मुताबिक, जांच में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
