Supriya Sule
नेटवर्क महानगर/मुंबई
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में हुई भारी बारिश और बाढ़ से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं और बलिराजा गहरे संकट में है। इस बीच, एनसीपी-एसपी की सांसद सुप्रिया सुले ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तुरंत राहत, पूर्ण कर्ज़माफी और सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से किसानों और आम नागरिकों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। खेतों में खड़ी फसलें बह गई हैं और किसान गहरे संकट में है। नागरिकों को भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस कठिन परिस्थिति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की ओर से किसानों और बाढ़ग्रस्त नागरिकों के लिए प्रारंभिक सहायता के रूप में सात से दस ट्रक कृषि और आवश्यक वस्तुओं से भरे हुए मुंबई से रवाना किए गए।
मुंबई में सांसद सुप्रिया सुले ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ”पवार साहेब” ने पहले ही राज्य सरकार को बाढ़ और सूखा दोनों परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दो विस्तृत पत्र भेजे हैं। इनमें किसानों और नागरिकों की मदद के लिए आवश्यक उपायों का उल्लेख किया गया है। सुप्रिया सुले ने बताया कि 2 महीने पहले उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर महाराष्ट्र को सूखाग्रस्त घोषित करने और किसानों की पूर्ण कर्ज़माफी की मांग रखी थी। लेकिन अब भारी बारिश और बाढ़ ने स्थिति और गंभीर कर दी है। अब हमें दो स्तरों पर काम करना होगा। पहला, सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों का पूरा कर्ज़ माफ़ किया जाए। दूसरा, पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि वह प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से पीड़ित किसानों और नागरिकों को सीधी आर्थिक सहायता दे सकती है।उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने किसानों को ₹50,000 प्रति एकड़ की मदद दी है। महाराष्ट्र सरकार चाहे तो इस मॉडल का अनुसरण कर सकती है। सुले ने बताया कि उन्होंने इस विषय पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी मुलाक़ात की है और मुख्यमंत्री ने भी प्रधानमंत्री से चर्चा की थी। लेकिन उसके बाद क्या प्रगति हुई, यह स्पष्ट नहीं है?
संकट में संवेदनशीलता ज़रूरी
सांसद सुप्रिया सुले ने आगे कहा कि बाढ़ ने किसानों को बर्बाद कर दिया है और यह समय नियम-कायदे थोपने का नहीं बल्कि मानवता दिखाने का है। उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुझे समझ में नहीं आ रहा कि सरकार इतनी लापरवाही क्यों बरत रही है? बाढ़ पीड़ितों को तुरंत मदद मिलनी चाहिए। पूर्ण कर्ज़माफी और तत्काल सूखा राहत की घोषणा की जाए। लोगों को खड़ा करने के लिए पुनर्वास की आवश्यकता है। स्कूल-कॉलेज बनने चाहिए, लड़कियों को नोटबुक मिलनी चाहिए और डीबीटी की सुविधा का उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वे पिछले एक साल से लगातार इस मुद्दे को उठा रही हैं। अगर उद्योगपतियों के हज़ारों करोड़ रुपए माफ़ किए जा सकते हैं, तो मेहनती किसानों को न्याय क्यों नहीं? सरकार किसानों के साथ इतना अन्याय क्यों कर रही है?
उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह समय राजनीतिक आलोचना का नहीं बल्कि आपसी सहयोग और पीड़ितों की मदद का है। गांव के सभी लोगों की मदद करना हमारी प्राथमिकता है। यह समय हाथ मिलाने का है, न कि कानून-कायदे थोपने का। राज्य में लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सुप्रिया सुले ने सरकार से तुरंत ठोस कदम उठाने और किसानों के साथ-साथ आम जनता को भी राहत देने की अपील की है।
