Cyber Crime News Mumbai
राजेश जायसवाल/मुंबई
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में साइबर अपराधियों ने ठगी की एक ऐसी पटकथा लिखी, जिसे सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। मुंबई पुलिस ने देश के अब तक के सबसे बड़े ‘डिजिटल स्कैम’ का पर्दाफाश किया है। यहां साइबर ठगों ने एक 72 वर्षीय हाई प्रोफाइल दंपत्ति को सीबीआई इन्वेस्टिगेशन के नाम पर डिजिटल अरेस्ट कर उनके खाते से 58 करोड़ रुपये उड़ा लिए! सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़ित दंपत्ति कम पढ़े-लिखे नहीं, बल्कि बेहद पढ़े-लिखे, उच्च शिक्षा प्राप्त हैं, परन्तु पति-पत्नी ‘डिजिटल डर’ के जाल में ऐसे फंसे कि 40 दिनों तक अपने ही घर में कैदी बनकर जीते रहे। पीड़ित कई फार्मा कंपनियों में उच्च पद पर काम कर चुके हैं। अभी भी उनकी कई कंपनियां चल रही हैं। पत्नी भी बड़े बैंक में काम कर चुकी है, लेकिन जालसाजों का तरीका इतना शातिराना था कि पढ़े-लिखे दंपत्ति समझ ही नहीं पाए कि उनके साथ क्या हो रहा है? आरोपियों ने व्यवसायी से कहा कि अगर वो पैसे नहीं चुकाएंगे, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यही नहीं उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है।
ठगों का फेंक सेटअप, वर्दी, कोर्ट रूम और व्हाट्सएप ऑर्डर!
कहानी शुरू होती है 19 अगस्त 2025 से…जब पीड़ित व्यक्ति को एक वीडियो कॉल आता है और सामने खड़ा एक शख्स, जिसने खुद को सीबीआई ऑफिसर बताया। उसने कहा कि आपका अकाउंट मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हुआ है, 45 लाख रूपये का ट्रांजेक्शन पकड़ा गया है, अब आपकी सारी प्रॉपर्टी सीज होगी।
कॉल पर मौजूद शातिर ठग सीबीआई की वर्दी में था। बैकग्राउंड में पीछे दिखाया गया सीबीआई (CBI) ऑफिस और ‘कोर्ट रूम’ भी ठगों का एक फेक सेटअप था। जो देखने में बिलकुल रियलिटी से अलग नहीं था। जिसे देखकर असलियत में ये कह पाना मुश्किल था कि ये सब फेंक होगा। ‘कोर्ट ऑर्डर भी व्हाट्सएप पर भेजे जाते रहे, ताकि पूरा ड्रामा बिलकुल असली लगे। आगे ठगों ने दंपत्ति को कहा कि अब वे “डिजिटल अरेस्ट” में हैं। मतलब न घर से बाहर जा सकते हैं और न ही किसी से बात कर सकते हैं। वीडियो कॉल हर वक्त ऑन रखना होगा और जब बैंक जाएं तो ऑडियो ऑन रखें। हर दो घंटे में रिपोर्ट देनी होगी। दंपत्ति ने डर के साए में अपने सारे बैंक अकाउंट, म्यूचुअल फंड, इन्वेस्टमेंट डिटेल्स ठगों को बता दीं। अब हर दिन दबाव बढ़ता गया और धीरे-धीरे 58 करोड़ रुपये ठगों के अकाउंट में ट्रांसफर हो गए।
19 अगस्त से 29 सितंबर तक चला पूरा खेल!
आखिरी ट्रांजेक्शन 29 सितंबर को और तब तक सब खत्म! पूरा खेल 19 अगस्त से 29 सितंबर तक चला। जब बैंक अकाउंट खाली हो गए, तब घबराए बिजनेसमैन ने अपने एक दोस्त को सारी कहानी बताई, तभी हकीकत समझ आई कि वे ठगे जा चुके हैं। 11 दिन बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। 10 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज हुई और महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने इस केस की कमान संभाली। साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में पहले तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनकी पहचान अब्दुल नासिर खुल्ली, अर्जुन कड़वासरा और जेठाराम कड़वासरा के रूप में हुई है।
अधिकारी ने बताया कि आरोपी अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग नेटवर्क से जुड़े हुए हैं और उन्होंने ठगी की रकम को वैध दिखाने के लिए 6,500 से अधिक फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल किया, जो फर्जी कंपनियों के नाम पर खोले गए थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने बिजनेसमैन के 18 खातों से पैसे निकाले। बताया जा रहा है कि व्यापारी ने 9 अगस्त से 8 अक्टूबर के बीच आरटीजीएस के जरिए उन्हें कुल 58.13 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। पुलिस अब व्यवसायी के खाते से निकाली गई रकम का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
फ्रॉड लोगों का पसंदीदा तरीका है ‘डिजिटल अरेस्ट’
इन दिनों ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड लोगों का पसंदीदा तरीका बनता जा रहा है। इस मामले में शातिर ठग, फर्जी गिरफ्तारी वारंट, फर्जी दस्तावेज और कभी-कभी फर्जी पुलिस स्टेशन बनाकर, अनजान लोगों को फोन या मैसेज करके ठगी करते हैं। इसमें आरोपी खुद को सरकारी एजेंसियों या कानून प्रवर्तन अधिकारियों के रूप में पेश करते हैं। वे ऑडियो या वीडियो कॉल के जरिए पीड़ितों को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देते हैं और उनके बैंक खातों में पैसे भेजने का दबाव बनाते हैं। फिर पीड़ितों को यह विश्वास दिलाने के लिए मजबूर किया जाता है कि उनसे वस्तुतः पूछताछ की जा रही है और उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया जा रहा है। अक्सर ये फ्रॉड लोग, पीड़ित व्यक्ति को वीडियो कॉल करके अपने झूठ पर विश्वास करने के लिए उकसाते हैं। फिर पीड़ितों से कहा जाता है कि उन पर कार्रवाई तब नहीं होगी, अगर वो इसके लिए इतना रकम अदा कर देंगे। अक्सर ऐसे धोखाधड़ी वाले लेन-देन में पीड़ित अपने करोड़ों रुपये गंवा देते हैं।
ADG यशस्वी यादव ने कही ये बड़ी बात?
वहीं, इस मामले में महाराष्ट्र साइबर डिपार्टमेंट में ADG यशस्वी यादव का कहना है कि जब तक बैंकिंग सिस्टम सख्त नहीं होगा, ऐसे स्कैम रुकने वाले नहीं हैं। इस केस ने दिखा दिया कि ठग अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, डर की साइकोलॉजी से भी खेल रहे हैं। बैंकिंग सिस्टम को फर्जी अकाउंट से बचाना और लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम का कोई कानून है ही नहीं। फिर भी पढ़े-लिखे लोग इन फ्रॉड लोगों के झांसे में आ जाते हैं।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी कॉल या मैसेज पर व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी साझा न करें, और किसी भी शंकास्पद गतिविधि की तुरंत पुलिस या बैंक से पुष्टि करें।
जानें- आखिर क्या है डिजिटल अरेस्ट? जिसमें फोन कॉल काट नहीं पाते लोग? इससे कैसे रहें सुरक्षित?
‘डिजिटल अरेस्ट’ एक नए तरह का फ्रॉड स्कैम है जो इन दिनों तेजी से बढ़ रहा है। इसमें पीड़ित शख्स से वीडियो कॉल के जरिए कॉन्टैक्ट किया जाता है और उसे डरा-धमकाकर कई घंटों या फिर कई दिनों तक कॉल बिना डिस्कनेक्ट किये कैमरे के सामने बैठे रहने को कहा जाता है। कई बार सीधा-साधा व्यक्ति क्रिमिनल की बातों में आ जाता है और ‘डिजिटल अरेस्ट’ हो जाता है। इस दौरान स्कैमर उस व्यक्ति से कई तरह की पर्सनल जानकारियां हासिल कर लेते हैं और इसके जरिए उनके बैंक अकाउंट में जमा मेहनत की गाढ़ी कमाई उड़ा देते हैं। इस दौरान स्कैमर्स आपसे जमानत की बात करते हैं और आपको स्कैम में फंसाना शुरू कर देते हैं। इतना ही नहीं बातचीत के दौरान फ्रॉडस्टर पीड़ित को वीडियो कॉल से हटने नहीं देता है ना किसी से कॉन्टेक्ट करने देते हैं। स्कैमर्स विक्टिम को यह कहकर डराते हैं कि उसके आधार कार्ड, सिम कार्ड, बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किसी गैरकानूनी काम के लिए हो रहा है। ये सब होने के बाद आपको डराने-धमकाने का का खेल शुरू होता है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब ठग पीड़ित व्यक्ति से फ्रॉड कर रहे होते हैं तो वह उनका फोन क्यों नहीं काट देता? दरअसल, ठगों का जाल ऐसा होता है कि पीड़ित व्यक्ति डर जाता है। लोगों को फंसाने के लिए स्कैमर्स पहले उसे फोन करके बताते हैं वे फलां पुलिस स्टेशन से से या फिर क्राइम ब्रांच से बोल रहे हैं और आपके नाम पर एक बड़ा फ्रॉड हुआ है। इस बीच वह पीड़ित व्यक्ति को धमकाते भी रहते हैं कि अगर आपने फोन काटा तो ये कानून का उल्लंघन माना जाएगा और आप इसके लिए गिरफ्तार भी किये जा सकते हैं।
हाल के दिनों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के कई बड़े मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में काफी लोग असमंजस में हैं कि डिजिटल अरेस्ट क्या है और इसमें पुलिस शख्स को हथकड़ी लगाकर थाने लेकर क्यों नहीं जाती है? अगर आप भी इस मामले ‘डिजिटल अरेस्ट’ को लेकर कंफ्यूज हैं तो आज सावधान हो जाइए।
कैसे करें अपना बचाव?
यहां बता दें कि पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी आपको कभी भी कॉल पर इस तरह की धमकी नहीं देते हैं। इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी या पुलिस लीगल प्रोसेस के साथ कार्रवाई करती है। ऐसे में अगर आपको भी इस तरह की डराने-धमकाने वाले की कॉल आती है तो आप बिना डरे तुरंत अपने करीबी पुलिस स्टेशन जाएं और अपनी शिकायत दर्ज करवाएं। इसके अलावा आप 1930 नेशनल साइबरक्राइम हेल्पलाइन नंबर पर भी कॉल कर सकते हैं। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर @cyberdost के जरिए भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान?
अंजान लोगों से फोन पर कोई बात न करें।
अनजान सोर्स से मिलने वाले किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।
किसी भी अनजान फोन कॉल पर अपनी पर्सनल या बैंक डिटेल्स न दें।
अगर आपके क्रेडिट या डेबिट कार्ड से कोई अनावश्यक ट्रांजेक्शन हुआ है तो तुरंत पुलिस के साथ ही बैंक में भी रिपोर्ट करें।
अगर आप आनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं तो एसएमएस सेवा जरूर लें।
पर्सनल डेटा और ट्रांजेक्शन प्लेटफॉर्म पर मजबूत पासवर्ड लगाकर रखें।
कोई भी थर्ड पार्टी ऐप डाउनलोड ना करें।
किसी भी अन-ऑफिशियल प्लेटफॉर्म से कुछ भी इंस्टाॉल करने से बचें।
अपने डिवाइस और सभी ऐप्स को अपडेट रखें।
अगर आपके साथ ठगी हुई है तो राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 और राष्ट्रीय क्राइम रिकार्ड पोर्टल पर तुरंत शिकायत करें।
