Maharashtra State Assembly ( Budget Session 2026 )
नेटवर्क महानगर/मुंबई
महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने घोषणा की है कि राज्य के सभी स्कूलों में मराठी भाषा पढ़ाना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि जो स्कूल इस नियम का पालन नहीं करेंगे, उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी। यह फैसला मुंबई के अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में मराठी की अनदेखी के मुद्दे पर लिया गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष के विधायक हारून खान ने कहा कि मुंबई के इंटरनेशनल स्कूलों में मराठी नहीं पढ़ाई जा रही है! उन्होंने यह भी कहा कि कई इंटरनेशनल स्कूल मराठी को सिर्फ़ तीसरी भाषा के तौर पर रखकर उसे स्थान दे रहे हैं।
शुक्रवार को विधानसभा में मंत्री दादा भुसे ने कक्षा एक से 10 वीं तक मराठी को अनिवार्य बनाने वाले कानून का पालन करने में विफल रहने वाले राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बोर्ड से संबद्ध समेत अन्य स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
भुसे ने राज्य विधानसभा को सूचित किया कि सरकार निरीक्षण शुरू करेगी और अगर स्कूल मराठी की पढ़ाई से संबंधित मानदंडों का पालन करने में विफल रहते हैं, तो उनकी मान्यता रद्द भी की सकती है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बोर्ड से संबद्ध समेत सभी स्कूलों में कक्षा एक से 10 तक के छात्रों के लिए मराठी अनिवार्य कर दी गई है। राज्य ने पहले ही इस संबंध में कानून बना लिया है तथा 9 मार्च 2020 को अधिसूचना जारी की गई थी।
प्रश्नकाल के दौरान मंत्री भुसे ने कहा कि हालांकि, अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम का पालन करने वाले कुछ स्कूल मराठी को दूसरी या तीसरी भाषा के रूप में पढ़ा सकते हैं, लेकिन इस भाषा का शिक्षण अनिवार्य है।
विधायकों ने कुछ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में मराठी नहीं पढ़ाए जाने का आरोप लगाते हुए चिंता जताई थी, जिस पर मंत्री ने कहा कि सरकार प्राप्त शिकायतों के आधार पर निरीक्षण करेगी। अगर जांच में यह पाया जाता है कि मराठी नहीं पढ़ाई जा रही है, तो ऐसे संस्थानों को पहले नियमों का पालन करने के लिए कहा जाएगा और स्थिति को सुधारने का अवसर दिया जाएगा। उसके बाद भी यदि वे अनिवार्य प्रावधान का पालन करने में विफल रहते हैं, तो सरकार उनकी मान्यता रद्द करने सहित कार्रवाई शुरू कर सकती है।
भुसे ने विधायकों से यह भी आग्रह किया कि अगर उन्हें कोई ऐसा स्कूल मिले, जो इस नियम का उल्लंघन कर रहा हो, तो वे सरकार को सूचित करें, ताकि तत्काल जांच और उचित कार्रवाई की जा सके।
अब हर 20 छात्रों पर एक शिक्षक होना अनिवार्य
विधायक मनीषा चौधरी, योगेश सागर और विक्रम पचपुते ने विधानसभा में निजी प्री-प्राइमरी स्कूलों के नियमन का मुद्दा उठाया। यह देखा गया है कि कई निजी प्री-प्राइमरी स्कूलों की फीस पर कोई नियंत्रण नहीं है। इन विधायकों ने यह भी बताया कि इन स्कूलों में दाखिले के समय अभिभावकों और बच्चों के इंटरव्यू लिए जा रहे हैं।
अब सभी निजी प्री-प्राइमरी स्कूलों के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा। अब तक 12,633 स्कूलों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है और बाकी स्कूलों को तत्काल आदेश दिए गए हैं। आने वाले शैक्षणिक वर्ष से पहले प्री-प्राइमरी स्कूलों के लिए एक नया अधिनियम (कानून) लागू किया जाएगा। इसमें कक्षा का आकार, शौचालय, यातायात सुरक्षा और फीस के नियमन जैसे मामले शामिल होंगे. साथ ही छात्र-शिक्षक अनुपात भी तय कर दिया गया है। इसके अनुसार, अब हर 20 छात्रों पर एक शिक्षक होना अनिवार्य होगा, शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने यह जानकारी दी।
