Aaditya Thackeray News
नेटवर्क महानगर/मुंबई
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सूत्रों की मानें तो शिवसेना युवासेना प्रमुख और विधायक आदित्य ठाकरे को जल्द ही पार्टी में बड़ी कमान सौंपी जा सकती है। इसका ऐलान 19 जून 2026 को किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, आदित्य ठाकरे को पार्टी के कार्याध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि 19 जून को शिवसेना (यूबीटी) के स्थापना दिवस पर आदित्य ठाकरे को यह पद दिया जा सकता है। इससे पार्टी में उनका महत्व और अधिकार काफी बढ़ जाएंगे।
साल 2003 में जिस तरह उद्धव ठाकरे को शिवसेना में कार्याध्यक्ष बनाया गया था, उसी तरह अब आदित्य ठाकरे को भी यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके लिए पार्टी की कार्यकारिणी बैठक बुलाकर प्रस्ताव पारित किया जा सकता है।
बता दें कि पिछले कुछ वर्षों से आदित्य ठाकरे संगठनात्मक फैसलों से लेकर चुनाव तक कई अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। इसलिए कई बड़े पार्टी नेताओं का मानना है कि अब आदित्य ठाकरे को भी बड़ी जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। उनके नेतृत्व में पार्टी में नई ऊर्जा और नई टीम तैयार होने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि आदित्य ठाकरे पार्टी के कार्याध्यक्ष बनते हैं तो यह उनके राजनीतिक करियर का अगला बड़ा कदम होगा। इससे पार्टी में उनका प्रभाव और अधिकार बढ़ेगा। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि यह फैसला धीरे-धीरे पार्टी की कमान उद्धव ठाकरे से आदित्य ठाकरे की ओर स्थानांतरित होने की प्रक्रिया की भी शुरुआत हो सकती है।
संजय राउत ने क्या कहा?
इस मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा कि जैसे उद्धव ठाकरे समय के साथ कार्याध्यक्ष बने थे, वैसे ही अगर आदित्य ठाकरे का नाम सामने आता है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब नेतृत्व युवा पीढ़ी को देना जरूरी है और भविष्य की राजनीति युवाओं के हाथ में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुंबई महानगरपालिका चुनाव में आदित्य ठाकरे और उनकी टीम ने अच्छा काम किया है। फिलहाल, राउत के इस बयान के बाद से ही पार्टी में हलचल तेज हो गई है कि पार्टी में नई पीढ़ी के आगे आने का समय आ गया है। वैसे बीएमसी चुनाव के बाद ही उद्धव ठाकरे पार्टी में बड़े बदलाव करना चाहते थे, लेकिन अब वही काम आदित्य ठाकरे करेंगे। आदित्य ठाकरे पार्टी में अपने करीबी युवाओं को शामिल कर संगठन को मजबूत करना चाहते हैं।
राजनीतिक गलियारों में इस संभावित फैसले की तुलना साल 2003 के उस ऐतिहासिक घटनाक्रम से की जा रही है। जब बालासाहेब ठाकरे ने महाबलेश्वर में आयोजित कार्यकारिणी की बैठक में उद्धव ठाकरे को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया था। अब ठीक 23 साल बाद उद्धव ठाकरे अपने बेटे आदित्य को वही जिम्मेदारी सौंपकर पार्टी की कमान उनके हाथों में देने की तैयारी में हैं।
हालांकि, आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट किया कि उनके बारे में चल रही खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ टीवी चैनलों पर उनके पार्टी में पद मिलने की खबरें प्रसारित हो रही हैं, लेकिन ऐसी कोई चर्चा पार्टी में नहीं चल रही है।
