Bihar Election 2025
नेटवर्क महानगर/बिहार
बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। सभी २४३ सीटों के लिए ६ और ११ नवम्बर २०२५ को मतदान होने वाला है, जबकि वोटों की गिनती १४ नवंबर को होगी। ७.४५ करोड़ मतदाता प्रत्याशियों का भाग्य तय करेंगे। दो चरणों में होने वाले चुनाव से पहले एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर तमाम बैठकें चल रही थीं। इस बीच आज रविवार, (१२ अक्टूबर) को बिहार चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सभी दलों ने मिलकर सीट शेयरिंग पर फार्मूला तय कर लिया। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए एनडीए की सीट शेयरिंग का फार्मूला बताया। उन्होंने एनडीए में हुई सीट शेयरिंग का एक्स पर ऐलान किया है। इसमें बीजेपी को १०१ सीटें, जबकि जेडीयू को भी १०१ सीटें मिली हैं।
बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- “हम एनडीए के साथियों ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में सीटों का वितरण पूर्ण किया। BJP-101, JDU-101, LJP (R)-29, RLM-06 और HAM-06; एनडीए के सभी दलों के कार्यकर्ता और नेता इसका हर्षपूर्वक स्वागत करते हैं। बिहार है तैयार, फिर से एनडीए सरकार।”
बता दें कि बिहार में इस बार दो चरणों के तहत विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। एनडीए में बीजेपी और अन्य घटक दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर कई दिनों से लगातार बैठकों का दौर जारी था, जो आज खत्म हुआ। फिलहाल, बीजेपी और जेडीयू को 101-101 सीटें मिली हैं। इसके अलावा लोजपा (रामविलास) को 29, RLM को 06 और HAM को भी 06 सीटें मिली हैं। सीट शेयरिंग के बाद सभी दलों के प्रमुख नेताओं ने इस पर सहमति जताई है।
सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप देने के साथ ही एनडीए के सहयोगी अब 6 और 11 नवंबर, 2025 को होने वाले दो चरणों के चुनावों से पहले उम्मीदवारों के चयन और अपने अभियान शुरू करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। भाजपा और जद(यू) दोनों ही सबसे ज़्यादा विधानसभा सीटों के लिए प्रमुख दावेदार हैं, जबकि छोटे सहयोगी अपने-अपने आवंटित निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का लक्ष्य बना रहे हैं। बिहार में सत्ता हासिल करने की उनकी कोशिश में एनडीए का मजबूत संगठनात्मक आधार और एकजुट रणनीति एक बड़ी ताकत मानी जा रही है।
दोनों पार्टियों के बीच बराबरी का सौदा!
सीट बंटवारे में बराबरी के सौदे से नीतीश कुमार के राजनैतिक भविष्य के भी संकेत मिल रहे हैं। ये बिहार की राजनीति के भविष्य को दिखाने वाला फॉर्मूला है।
सीट बंटवारे से साफ है कि बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार या जेडीयू की भूमिका बड़े भाई तौर पर खत्म हो गई है। अगर दो यू टर्न को हटा दें तो पिछले 30 वर्षों के राजनैतिक इतिहास में पहली बार नीतीश कुमार की पार्टी इतनी कम सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
आपको याद होगा 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू सबसे कम 43 सीटों पर सिमट गई थी। ये बीजेपी के साथ साझीदारी के इतिहास में सबसे खराब परफॉर्मेंस था। इसमें नीतीश कुमार को एक और यू टर्न लेने के लिए मजबूर किया और वो लालू यादव के पाले में चले गए लेकिन इस बार बीजेपी ने पुराने रिकॉर्ड को सामने रखा और तार्किक तरीके से ये साबित किया कि बीजेपी को बराबरी का दर्जा मिलना ही चाहिए।
