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किश्तवाड़। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के चशोती में बादल फटने से आई तबाही के बाद मलबे के ढेर से लाशों की तलाश जारी है। अब तक मृतकों की संख्या 65 हो चुकी है। मौसम की चुनौती के बीच शुक्रवार को बड़े पैमाने पर राहत व बचाव कार्य जारी रहा। करीब 200 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इनमें 100 से अधिक जम्मू और किश्तवाड़ के अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। स्वजनों से मिल रही सूचना के मुताबिक, 100 के करीब लोग अभी भी लापता हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, एक ढाबे से ही मलबे में दबे 15 लोगों के शव बरामद हुए हैं। मचैल यात्रा मार्ग पर सेना व अन्य बल के जवानों ने टूटे पुल के स्थान पर लकड़ी का अस्थायी पुल बनाया और रस्सियों के सहारे एक-एक कर लोगों को निकाला। करीब 5 हजार लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया।
मैं सांस नहीं ले पा रही थी, मलबे में दब गई थी। मेरे चाचा, बाऊजी और अन्य लोगों ने घंटों बाद लकड़ी के तख्ते हटाए और हम सब बाहर निकले। मां चंडी ने हमें बचा लिया। यह कहते हुए जम्मू के चशोती में मौत के सैलाब से बच निकली 9 वर्ष की देवांशी अब भी उस क्षण को याद कर सिहर उठती है। देवांशी जैसे कुछ लोग सौभाग्यशाली रहे लेकिन कई अन्य को संभलने का भी मौका नहीं मिला। देवांशी उन सैकड़ों श्रद्धालुओं में शामिल थी, जो मचैल माता मंदिर की यात्रा के लिए किश्तवाड़ के चशोती में जमा हुए थे।

बचने की छोड़ दी थी उम्मीद: देवांशी ने बताया कि हम एक मैगी की दुकान पर रुके थे तभी अचानक हड़कंप मच गया। हम कुछ समझ पाते इससे पहले ही दुकान पर कीचड़ का एक बड़ा ढेर गिर पड़ा, हम सभी मलबे में दब गए थे। बाद में एक-एक करके सभी किसी तरह बाहर निकले। देवांशी को उसके परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार हुआ। जम्मू निवासी 32 वर्षीय स्नेहा ने कहा कि हमने एक जोरदार धमाका सुना और पहाड़ी से जलप्रवाह आते देखा।
