
गोरखपुर, सीएम सिटी में फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस बनाने और अवैध असलहा बेचने का सनसनीखेज मामले में मास्टरमाइंड गोपी पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। पुलिस उससे गोपनीय स्थान पर पूछताछ कर रही है। गोपी ने पुलिस के सामने कई राज उगले तो ये साफ हो गया कि कई ऐसे सफेदपोश चेहरे भी सामने आएंगे, जिन्होंने जाने-अनजाने में उससे लाइसेंस बनवाकर अवैध असलहा खरीदकर बरसों से रखने का अपराध कर बैठे हैं। क्योंकि प्रशासनिक और पुलिस के आलाधिकारियों ने 40 लोगों के नाम सामने आने का दावा किया है। उम्मीद है कि जल्द ही मामले का खुलासा कर दिया जाएगा। उसके बाद जाने-अनजाने में फर्जी लाइसेंस पर अवैध असलहा रखने वाले सफेदपोश भी पुलिस की गिरफ्त में होंगे। गोपी ने अपने घर ही फर्जी लाइसेंस बनाने का सारा सामान रखा हुआ था। लाइसेंस की किताब, मजिस्ट्रेट की मुहर, कई रंग के पेन, और ढेर सारी फाइलें बरामद हुई हैं। गोपी ने अपने घर पर ही फर्जी लाइसेंस बनाने का सारा सामान रखा हुआ था। लाइसेंस की किताब, मजिस्ट्रेट की मुहर, कई रंग के पेन, और खूब सारी फाइलें बरामद हुई हैं।
30 जुलाई को वाट्सएप ग्रुप पर किसी ने शस्त्र लाइसेंस का फोटो शेयर किया था। अधिकारियों के संज्ञान में जब मामला सामने आया, तो 14 अगस्त को प्रशासनिक और पुलिस के आलाधिकारियों ने शक पुख्ता होने के बाद शहर के टाउनहाल और गोलघर में स्थित दस दुकानों पर छापेमारी की। यहां पर रवि आर्म्स कारपोरेशन के संचालक और वहां काम करने वाला कर्मचारी गोपी संदेह के घेरे में आ गए। पुलिस ने साल 2010 में बने फर्जी लाइसेंस पर अवैध पिस्टल रखने के आरोप में गोरखनाथ इलाके के हुमायूंपुर के रहने वाले तनवीर खान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
पुलिस पीजीआई में भर्ती दुकान के प्रोपराइटर को हिरासत में लेने के प्रयास में है। गोरखपुर के जिलाधिकारी के। विजयेन्द्र पाण्डियन की मानें तो शिकायत और स्कैनिंग के दौरान ये मामला प्रकाश में आया। प्रशासनिक और पुलिस के आलाधिकारियों ने शहर की सभी दुकानों के रजिस्टर को चेक किया। इसमें कोतवाली इलाके के टाउनहाल पर स्थित रवि आर्म्स कारपोरेशन संदेह के घेरे में आ गया। डीएम की मानें तो पुलिस को उसके पास से फर्जी लाइसेंस पर खरीदा गया नकली यानी अवैध पिस्टल भी मिला है, जिसे जप्त कर लिया गया है। पूछताछ के बाद पुलिस ने जालसाजी और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। एक साथ शहर के पॉश इलाके टाउनहाल और गोलघर में पड़े छापे के बाद शहर में हड़कंप मच गया। दुकानदारों के पूरे रिकार्ड पुलिस ने जांच के लिए जप्त कर लिए हैं। वहीं शासन के भी सारे रिकार्ड मांगे जाने के बाद से ही शस्त्र लाइसेंस बेचने वाले दुकानदार डर के मारे दुकान बंद कर अंडरग्राउंड हो गए हैं। पुलिस को फर्जी लाइसेंस पर अवैध असलहा रखने वाले राप्तीनगर के रहने वाले विकास तिवारी, शिवम मिश्र और रवि आर्म्स कारपोरेशन के प्रोपराइटर की तलाश है।
