Varanasi BHU news
नेटवर्क महानगर/वाराणसी
‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण को बढ़ावा देने के लिए बीएचयू (BHU) के कृषि विज्ञान संस्थान में पौधारोपण और जागरूकता को लेकर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों, छात्रों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस अवसर पर परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे गए और उन्हें संरक्षित रखने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वाराणसी के जॉइंट पुलिस कमिश्नर आलोक प्रियदर्शी रहे। जबकि कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. यू.पी. सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस दौरान डॉ. अरुण सिंह, रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमित नंदन धर द्विवेदी, प्रोफेसर अमित त्यागी, वरिष्ठ छात्रनेता डॉ. एस.के. अग्रवाल तथा प्रवीण योगी समेत कई अन्य गणमान्य मौजूद थे।
पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार या संस्थानों की नहीं
इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित जॉइंट पुलिस कमिश्नर आलोक प्रियदर्शी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार या संस्थानों की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल आदतों को अपनाएं और समाज में भी जागरूकता फैलाएं। उन्होंने यह भी कहा कि पौधे लगाना महत्वपूर्ण है, लेकिन उनका संरक्षण और नियमित देखभाल करना उससे भी अधिक जरूरी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण वैश्विक आवश्यकता बन चुका है। बढ़ते प्रदूषण, अनियंत्रित शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और हरित क्षेत्रों में लगातार हो रही कमी के कारण पृथ्वी का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में वृक्षारोपण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक कदम है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने परिसर में पौधेरोपित कर उनकी देखभाल का संकल्प लिया और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार भी साझा किए। पौधारोपण कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर में हरित आवरण बढ़ाना, पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करना तथा स्वच्छ और संतुलित वातावरण के निर्माण में सामूहिक सहभागिता सुनिश्चित करना रहा। कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक शपथ और धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।
