राजेश जायसवाल/मुंबई
राजनीति एक ऐसा खेल है जहां हर कदम पर ‘शतरंज’ की बिसात बिछती है। जब मंझे हुए खिलाड़ी (चाहे वह खेल का मैदान हों या सत्ता का) इस अखाड़े में उतरते हैं, तो राजनीति के मायने ही बदल जाते हैं। राजनीति के भी अपने एक अलग नियम होते हैं। एक राजनीतिक खिलाड़ी दूरदर्शी होता है और रणनीतिक रूप से दूरगामी सोच रखता है। ऐसे ही सियासत के एक मजे राजनेता सचिन अहीर को महाराष्ट्र विधान परिषद के लिए निर्विरोध चुन लिया गया।
महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद पर शिवसेना के वरिष्ठ नेता सचिन अहीर का निर्विरोध निर्वाचन होने के बाद सदन में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि वरिष्ठ, अध्ययनशील, बहुमुखी प्रतिभा के धनी और अनुभवी नेता सचिन अहीर का इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर पहुंचना पूरे सदन के लिए गौरव की बात है। उन्होंने विपक्ष का भी आभार जताया कि उसने अपना नामांकन वापस लेकर सदन की परंपराओं का सम्मान किया।
अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सचिन अहीर की कार्यशैली की सराहना करते हुए उन्हें राजनीति का ‘मास्टर ब्लास्टर’ बताया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी अलग कार्यशैली होती है और हर किसी में कुछ खास गुण होते हैं। हमारी टीम में अब एक और ‘ऑलराउंडर’ शामिल हो गया है।शिंदे ने कहा कि गेंदबाज कोई भी हो और गेंद कितनी भी तेज हो, सचिन अहीर छक्का लगाए बिना नहीं रुकते। उन्होंने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर महान हैं, वैसे ही राजनीति और समाजसेवा में सचिन अहीर भी अपने क्षेत्र के दिग्गज हैं। एक सचिन क्रिकेट से संन्यास ले चुका है, तो दूसरे सचिन ने जिम्मेदारी का पैड पहनकर अपनी नई पारी की शुरुआत की है।
एकनाथ शिंदे ने आगे कहा कि वर्ष 2019 में उन्होंने शिवसेना के उम्मीदवार के रूप में सचिन अहीर को मतदान दिया था। आज भी वे शिवसैनिक हैं और आगे भी शिवसैनिक ही रहेंगे। नीलम गोरे के बाद एक बार फिर शिवसेना का एक कार्यकर्ता विधान परिषद के उपसभापति जैसे अहम संवैधानिक पद पर पहुंचा है, जो पूरे शिवसेना परिवार के लिए गर्व का विषय है।
नीलम गोरे के कार्यकाल की तारीफ
शिंदे ने अपने भाषण में पूर्व उपसभापति नीलम गोरे के कार्यकाल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के मुद्दों पर उन्होंने मजबूती से आवाज उठाई और अन्याय के खिलाफ लगातार काम किया। उनके कार्यकाल ने उपसभापति पद को नई पहचान दिलाई। उन्होंने विधान परिषद की समृद्ध परंपरा का भी उल्लेख किया और कहा कि वी. एस. पागे, जयंतराव तिलक, शिवाजीराव देशमुख, रा. सु. गवई, फरांदे, डावखरे और नीलम गोरे जैसे नेताओं ने इस पद की गरिमा बढ़ाई है। उन्हें विश्वास है कि सचिन अहीर भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाएंगे।
शायरी के जरिए सचिन अहीर की तारीफ!
सचिन अहीर के सम्मान में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक शायरी सुनाते हुए कहा कि ‘जो तूफानों में शांत रहे, उसे समंदर कहते हैं…जो हर दिल पर राज करे, उसे सिकंदर कहते हैं!’
शिंदे ने कहा कि सचिन अहीर ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है और उनके नेतृत्व से सदन का मान-सम्मान और प्रतिष्ठा और बढ़ेगी। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि दही-हांडी का पर्व आने में अभी समय है, लेकिन सफलता की ‘हांडी’ आपने आज ही फोड़ दी है।
मजदूरों के लिए संघर्ष का किया जिक्र
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने सचिन अहीर के लंबे सार्वजनिक जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।उन्होंने संगठन खड़े किए और सत्ता तथा विपक्ष दोनों में रहकर काम करने का अनुभव हासिल किया। सचिन अहीर ने कभी सदन में अनावश्यक आक्रामकता नहीं दिखाई, लेकिन मजदूरों के हितों के लिए सड़कों पर उतरकर संघर्ष जरूर किया। विधानसभा में भी उन्होंने लगातार श्रमिकों की आवाज उठाई।
शिंदे ने कहा कि मजदूरों के प्रति उनके लगाव और संवेदनशीलता के कारण कई समस्याओं का समाधान संभव हो सका। उन्होंने राष्ट्रीय मिल मजदूर संघ, महाराष्ट्र राज्य कामगार संघ, मझगांव डॉक, महिंद्रा एंड महिंद्रा सहित कई औद्योगिक संस्थानों के कर्मचारियों के लिए किए गए संघर्ष का भी उल्लेख किया। साथ ही उनके मजबूत जनाधार की भी चर्चा की।
शिंदे ने कहा कि ‘संकल्प प्रतिष्ठान’ के माध्यम से सचिन अहीर ने दही-हांडी उत्सव को केवल एक पर्व नहीं रहने दिया, बल्कि उसे सामाजिक सेवा का माध्यम बनाया। रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य सेवाएं, जरूरतमंदों की मदद और कई सामाजिक कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने समाज से अपना जुड़ाव बनाए रखा। हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे का “80 प्रतिशत समाजकारण और 20 प्रतिशत राजनीति” का मूलमंत्र सचिन अहीर ने हमेशा अपने जीवन में अपनाया।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि तीन बार विधायक और राज्यमंत्री रहने के बावजूद सचिन अहीर ने आम लोगों से अपना संपर्क कभी नहीं तोड़ा। मजदूरों के लिए संघर्ष करने वाले एक कार्यकर्ता से लेकर विधान परिषद के उपसभापति बनने तक का उनका सफर प्रेरणादायक है।
उन्होंने कहा, लोगों के सुख-दुख में साथ देना, उनकी पीड़ा को समझना और अपनी इच्छाओं से ऊपर समाज को रखना ही किसी व्यक्ति को जनता का नेता बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई के लोगों को भी लगता है कि उनके अपने व्यक्ति का सम्मान हुआ है।

पार्टी से बड़ा नियम, भावना से बड़ी परंपरा
अपने भाषण में शिंदे ने उपसभापति पद की जिम्मेदारियों पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि इस कुर्सी पर बैठने के बाद पार्टी से बड़ा नियम होता है, भावना से बड़ी परंपरा होती है और आवाज से बड़ा संयम होता है। यही नियम सत्ता पक्ष के सदस्यों पर भी लागू होता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को भी पूरा न्याय मिलना चाहिए। इस पद पर बैठने वाले व्यक्ति में पार्टी नहीं दिखनी चाहिए, बल्कि भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान और न्याय की भावना दिखाई देनी चाहिए।
शिंदे ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि सचिन अहीर के पास वह विवेक, अध्ययन, संयम और निष्पक्षता है, जिसकी इस पद को आवश्यकता होती है। उन्होंने सचिन अहीर से कहा, आप ईमानदारी से कार्य करते रहें और सभी को न्याय दें। सदन को यह महसूस होना चाहिए कि उपसभापति सभी सदस्यों को समान न्याय देते हैं।
सरकार के कामकाज का भी किया जिक्र
एकनाथ शिंदे ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि ढाई वर्षों के सफल कार्यकाल के बाद सरकार एक टीम के रूप में महाराष्ट्र को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि आधारभूत संरचना, विकास परियोजनाओं, मूलभूत सुविधाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के जरिए महायुति सरकार महाराष्ट्र को देश का नंबर एक राज्य बनाने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने विपक्ष से भी सकारात्मक सहयोग की अपील करते हुए कहा कि जहां सरकार से गलती हो वहां सवाल जरूर पूछे जाएं, लेकिन अच्छे कार्यों की सराहना भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार महाराष्ट्र को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जा रही है। विपक्ष की संख्या कम हो सकती है, लेकिन उसके सम्मान में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। अब उपसभापति के रूप में सचिन अहीर सभी सदस्यों को समान न्याय देंगे, ऐसा उन्हें पूरा विश्वास है।
शायरी के साथ भाषण का किया समापन
अपने संबोधन के अंत में एकनाथ शिंदे ने एक और शायरी सुनाई- ‘उड़ान वाली चिड़िया को कहां मालूम होता है कि जमीन से जुड़े रहने का मज़ा क्या होता है…जो आसमान छूकर भी अपनी ज़मीन नहीं भूलते, जनता के दिलों पर राज बस वही करते हैं।’ इन्हीं शब्दों के साथ उन्होंने सचिन अहीर को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।
