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मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) अध्यक्ष अजीत पवार ने रविवार (18 फरवरी) को एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें जाति जनगणना कराने के बाद शिक्षा और नौकरियों में अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण की मांग की गई है।
पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित ‘अल्पसंख्यक विश्वास मेलावा’ में पारित प्रस्ताव में कहा गया है- यह सभा अल्पसंख्यकों की विशेष सुरक्षा और जाति जनगणना की मांग करती है। जाति जनगणना के नतीजों के आधार पर अल्पसंख्यकों को उसी अनुपात में शैक्षणिक और नौकरी में आरक्षण दिया जाना चाहिए।
रविवार (१८ फरवरी) को सुबह नवी मुंबई के वाशी स्थित CIDCO Exhibition & Convention Centre में मेलावा को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि सम्मेलन में पारित सभी प्रस्तावों को लागू किया जाए।
यह पहली बार है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के किसी सहयोगी दल ने खुले तौर पर अल्पसंख्यकों के आरक्षण की वकालत की है। यह पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण के नेतृत्व वाली कांग्रेस-एनसीपी सरकार थी, जिसने 2014 में एक अध्यादेश के माध्यम से शिक्षा और नौकरियों में मुसलमानों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण के साथ-साथ मराठों के लिए 16 प्रतिशत आरक्षण बढ़ाया था।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुस्लिम आरक्षण को रद्द नहीं किया था, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली अगली भाजपा सरकार ने अध्यादेश को एक अधिनियम में नहीं बदला और तब से यह मामला लंबित है।
हालांकि, एक बड़ी गड़बड़ी में प्रस्ताव के शुरू में अल्पसंख्यकों के लिए राजनीतिक आरक्षण का उल्लेख किया गया था, जिसे बाद में पार्टी (एनसीपी) ने वापस ले लिया। अजीत पवार ने यह भी कहा कि जब तक वह सत्ता में हैं, तब तक अल्पसंख्यकों को डरना नहीं चाहिए।
अजीत पवार ने आगे कहा- जब सतारा में दो समुदायों के बीच कोई घटना हुई, तो सब कुछ नियंत्रित करने के लिए मैं व्यक्तिगत रूप से वहां गया था। जब तक मैं यहां हूं…तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है। हम सभी कानून का पालन करते हैं। मैं आप सभी को बताना चाहता हूं कि महाराष्ट्र में कानून का शासन कायम रहेगा और किसी को भी अन्याय का सामना नहीं करना पड़ेगा। मैं आप सभी से वादा करता हूं।
