पालघर हत्याकांड: तीन पुलिसकर्मियों को गवानी पड़ी नौकरी
मुंबई: महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की हत्या के मामले में तीन पुलिसवालों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है। इनमें से दो पुलिसवालों को जबरन सेवानिवृत्त किया गया है, जबकि एक पुलिसकर्मी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। कोंकण रेंज के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजीपी) ने इससे जुड़ा आदेश जारी किया। वारदात के दौरान कासा पुलिस के इंचार्ज रहे अनंतराव काले, असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर रवि सालुंखे और कांस्टेबल नरेश धोदी को नौकरी से निकाला गया है। इसी साल 16 अप्रैल को पालघर के गढचिंचले गांव में दो साधुओं समेत तीन लोगों की हत्या की हई थी। इन तीनों को दो और पुलिसवालों के साथ वारदात के बाद निलंबित कर दिया गया था। जबकि पुलिस स्टेशन में तैनात 35 अन्य पुलिसवालों का भी तबादला कर दिया गया था। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह को भी सरकार ने जबरन छुट्टी पर भेज दिया था और उन्हें अब तक कहीं और तैनात नहीं किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
पालघर जिले के गढचिंचले गांव में एक हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ ने कार से सूरत जा रहे महाराज कल्पवृक्षगिरी (70), सुशील गिरी महाराज (35) नाम के दो साधुओं और उनके कार चालक नीलेश तेलगडे (30) की पीट पीटकर हत्या कर दी थी। हमले का जो वीडियो वायरल हुआ था, उसमें साफ दिख रहा था कि भीड़ पुलिस की मौजूदगी में साधुओं और उनके ड्राइवर को पीट रही थी। विवाद बढ़ने के बाद मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी गई थी। इस मामले में 154 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि 11 नाबालिगों को भी हिरासत में लिया गया था। समय पर आरोपपत्र न दाखिल कर पाने के चलते 10 आरोपियों और 11 नाबालिगों को जमानत मिल गई। सीआईडी ने अपने आरोपपत्र में दावा किया है कि हत्या, धार्मिक विवाद के चलते वहीं बल्कि बच्चा चोरी की अफवाह के चलते हुई।

