नेटवर्क महानगर/मुंबई
मुंबई के प्रतिष्ठित मेयर बंगले को अब शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के राष्ट्रीय स्मारक में बदलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसमें मेयर बंगले को स्मारक में तब्दील करने का निर्णय लिया गया था। अदालत ने इस संबंध में दाखिल की गईं सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिससे अब इस ऐतिहासिक परियोजना के लिए किसी भी तरह की कानूनी बाधा समाप्त हो गई है। कोर्ट के इस फैसले के बाद स्मारक निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने का कोई ठोस या वैध आधार नहीं है। अदालत ने कहा कि बालसाहेब ठाकरे न सिर्फ महाराष्ट्र, बल्कि देश की राजनीति में एक बड़ा नाम रहे हैं और उनके नाम पर स्मारक बनाना जनहित में है।
गौरतलब है कि दादर इलाके में स्थित यह मेयर बंगला लंबे समय से विवाद का केंद्र रहा है। कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने अदालत में याचिका दायर कर स्मारक के लिए बंगले को देने के सरकारी फैसले को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह संपत्ति जनता के लिए आरक्षित है और उसका उपयोग स्मारक के रूप में करना सही नहीं होगा। हालांकि, अदालत ने सभी दलीलों को नामंजूर करते हुए कहा कि स्मारक के लिए दी जा रही जमीन सार्वजनिक हित के खिलाफ नहीं है। कोर्ट के मुताबिक, मेयर बंगले की जगह स्मारक बनाना पूरी तरह सरकार का विशेषाधिकार है और इसमें कोई अवैधता या मनमानी नहीं दिखती।
