Maharashtra MLC election 2026
नेटवर्क महानगर/मुंबई
महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) की 9 सीटों के लिए 12 मई 2026 को मतदान होना है। चुनाव को लेकर नामांकन के आखिरी दिन जोरदार सियासी हलचल देखने को मिली। 12 मई को होने वाले इस चुनाव के लिए गुरुवार, (30 अप्रैल) को नामांकन की अंतिम तारीख थी, और अंतिम समय तक सियासी गतिविधियां तेज रहीं। सत्तारूढ़ महायुति की ओर से बीजेपी ने अपने 5 उम्मीदवार मैदान में उतारे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले और मंत्री आशीष शेलार समेत कई बड़े नेता आज नामांकन दाखिल करने पहुंचे थे। इसके अलावा बीजेपी ने उपचुनाव वाली सीट पर प्रज्ञा सातव को उम्मीदवार बनाया है, जिनके निर्विरोध चुने जाने की संभावना प्रबल मानी जा रही है।
कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में हुआ समझौता!
वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) की ओर से नीलम गोरहे और बच्चू कडू ने अपना नामांकन दाखिल किया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) ने जीशान सिद्दीकी को उम्मीदवार बनाया है। सबसे ज्यादा घमासान महाविकास आघाड़ी (MVA) में देखने को मिला। उद्धव ठाकरे की ओर से उम्मीदवार की घोषणा को लेकर कांग्रेस ने सख्त रुख अपनाया। कांग्रेस ने साफ कहा कि अगर उद्धव खुद उम्मीदवार नहीं होंगे, तो सीट कांग्रेस को दी जाए। दोपहर तक चली लंबी बातचीत में मिलिंद नार्वेकर, अनिल परब और सुप्रिया सुले जैसे नेता सक्रिय रहे। आखिरकार गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने के लिए कांग्रेस ने अंबादास दानवे को अपना समर्थन देने का फैसला किया। नामांकन की समय सीमा खत्म होने से ठीक पहले अंबादास दानवे ने अपना पर्चा दाखिल कर दिया।
बता दें कि महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) की कुल 9 सीटों के लिए 9 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। ऐसे में चुनाव का निर्विरोध होना लगभग तय माना जा रहा है, और 12 मई की वोटिंग महज औपचारिकता बन कर रह गई है। उम्मीदवारों की बात करें तो बीजेपी ने सुनील कर्जतकर, माधवी नाइक, विक्रम कोल्हे, प्रमोद जठार और संजय भेंडे को मैदान में उतारा है। वहीं, एनसीपी (अजित पवार गुट) ने जीशान सिद्दीकी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने बच्चू कडू और नीलम गोरहे को टिकट दिया है। दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन एमवीए से शिवसेना (यूबीटी) के अंबादास दानवे उम्मीदवार हैं। इसके अलावा विधान परिषद उपचुनाव की एक सीट पर बीजेपी ने प्रज्ञा सातव को उम्मीदवार बनाया है।
आखिर कांग्रेस ने क्यों पीछे खींचा कदम?
कांग्रेस द्वारा शिवसेना (यूबीटी) को समर्थन देने के फैसले के पीछे सीधा ‘नंबर गेम’ था। इस समय शिवसेना (यूबीटी) के 20 विधायक हैं, जबकि शरद पवार गुट के 10 विधायक हैं और दोनों का आंकड़ा मिलाकर 30 हो जाता है। एमएलसी चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 29 सीट चाहिए, ऐसे में ये दोनों पार्टियां मिलकर एक सीट जीत सकती थीं। अगर कांग्रेस मैदान में उतरती, तो समीकरण बिगड़ सकता था क्योंकि कांग्रेस के 16 और शरद पवार गुट के 10 विधायक मिलाकर आंकड़ा 26 तक ही पहुंच पाता और ऐसे में उद्धव गुट अलग हो जाता। इससे दोनों खेमे कमजोर पड़ते और क्रॉस-वोटिंग का खतरा बढ़ जाता और एक ‘पक्की जीत’ भी जोखिम में पड़ सकती थी।
कांग्रेस के पीछे हटने की ये तीन बड़ी वजह?
हार का खतरा टालना: कांग्रेस समझ रही थी कि उसके पास सुरक्षित जीत का आंकड़ा नहीं है।
गठबंधन बचाना: सीधी टक्कर से महाविकास आघाड़ी में दरार पड़ सकती थी, जिसका असर आगे I.N.D.I.A. गठबंधन तक जाता।
राजनीतिक संदेश देना: आखिरी वक्त तक सख्त रुख अपनाकर कांग्रेस ने यह साफ कर दिया कि उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह आने वाले राज्यसभा और विधानसभा चुनावों में सीट बंटवारे के लिए एक मजबूत संकेत भी है।
कुल मिलाकर, यह कहा जा सकता है कि महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में MVA का फोकस जीत से ज्यादा गठबंधन बचाने पर रहा। वहीं, कांग्रेस ने ऐन मौके पर कैंडिडेट न उतारने की चाल चलकर भविष्य के लिए अपने केस को मजबूत कर लिया है।

शिवसेना में ‘प्रहार पार्टी’ का विलय?
चर्चा है कि बच्चू कडू की ‘प्रहार पार्टी’ का शिवसेना में विलय भी हो सकता है और वे जल्द ही आधिकारिक रूप से शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। इस फैसले को शिंदे गुट के लिए राजनीतिक मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है। शिवसेना (शिंदे गुट) ने बच्चू कडू को अपना उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है, इससे महाराष्ट्र की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
BJP के खिलाफ एकजुट होकर लड़ेंगे!
वहीं, महाराष्ट्र कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि कांग्रेस की राय थी कि शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे को खुद विधान परिषद चुनाव लड़ना चाहिए, लेकिन जब ठाकरे की पार्टी ने अंबादास दानवे को उम्मीदवार बनाया, तो कांग्रेस ने भी चुनाव लड़ने का फैसला किया था। हालांकि, उद्धव गुट के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सपकाल से मुलाकात कर कांग्रेस को मनाने की कोशिश की।
सपकाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमारा मानना था कि दानवे की उम्मीदवारी पर चर्चा की जरूरत है. अब हम उद्धव जी के फैसले का समर्थन करेंगे और इसे एमवीए का साझा रुख मानेंगे। आने वाले दिनों में हम एमवीए के रूप में बीजेपी के खिलाफ लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसके बाद यह तय हुआ कि विपक्षी गठबंधन आगामी चुनाव एकजुट होकर लड़ेगा।
बता दें कि राज्य विधानमंडल के उच्च सदन के 9 सदस्य 13 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिनमें शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे भी शामिल हैं।
