नेटवर्क महानगर/मुंबई
नाबालिग लड़की से पहले रेप, फिर शादी करने के बाद भी बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि नाबालिग से शादी करना रेप केस से बचने की ढाल नहीं बन सकता। नागपुर बेंच ने एक 29 साल के आरोपी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि केवल शादी और बच्चा होने से उसे पॉक्सो एक्ट के तहत लगे आरोपों से मुक्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने दो टूक कहा कि 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ संबंध में ‘सहमति’ मायने नहीं रखती। यह फैसला उन मामलों पर सीधा असर डाल सकता है जहां नाबालिग लड़कियों की शादी कर उन्हें एक्सप्लॉइट किया जाता है।
शादी और बच्चा होने से केस खत्म किया जाए
आरोपी ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उसका और लड़की का रिश्ता सहमति से बना था। जब लड़की 18 साल की हुई तो उसकी शादी लीगल तरीके से रजिस्टर्ड कराई गई। इस बीच लड़की ने बच्चे को जन्म भी दिया। आरोपी का कहना था कि अगर उसे सजा दी गई तो पत्नी और बच्चा समाज में स्वीकार नहीं किए जाएंगे और उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। खुद लड़की ने भी कोर्ट में कहा कि उसे एफआईआर पर कोई आपत्ति नहीं है और केस खत्म किया जाए।
पॉक्सो एक्ट में सहमति की कोई अहमियत नहीं: अदालत
जस्टिस उर्मिला जोशी फाल्के और नंदेश देशपांडे की बेंच ने आरोपी और लड़की, दोनों की दलीलें खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि पॉक्सो एक्ट का मूल उद्देश्य 18 साल से कम उम्र के बच्चों को सेक्सुअल असॉल्ट, हैरेसमेंट और चाइल्ड पोर्नोग्राफी से बचाना है। इस एक्ट में सहमति का सवाल ही नहीं उठता। कोई भी यौन संबंध 18 साल से कम उम्र वालों के बीच अपराध है। कोर्ट ने साफ कहा कि भले ही शादी मुस्लिम रीतियों से हुई हो, लेकिन जब शादी और बच्चा हुआ तब लड़की की उम्र 18 साल से कम थी। बेंच ने कहा कि कानून के हिसाब से न्याय किया जाना चाहिए।
फैमिली और आरोपी पर भी चलेगा केस
आरोपी के साथ-साथ उसके परिवारवालों ने भी एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी की उम्र शादी के समय 27 साल थी। उसे समझना चाहिए था कि नाबालिग लड़की से शादी करना गैरकानूनी है और इसके नतीजे गंभीर होंगे। बच्चा हो जाने या लड़की की सहमति दिखाने से अपराध की गंभीरता कम नहीं हो सकती। बेंच ने जोर देकर कहा कि बच्चे के जन्म से क्रिमिनल एक्ट को कम नहीं किया जा सकता। यह एक गंभीर अपराध है। बेंच ने एम ए बेग और उसके परिवार के दो सदस्यों द्वारा दायर आपराधिक याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में पॉक्सो एक्ट और बीएनएस के तहत दर्ज मामले को रद्द करने की मांग की गई थी। आरोपी ने 2 जून, 2024 को लड़की से शादी की थी। उस समय लड़की की उम्र 17 साल थी। इसी साल मई में उसने एक बच्चे को जन्म दिया था। कांस्टेबल राहुल तायडे की शिकायत पर पुलिस को बच्चे के जन्म और नाबालिग लड़की की उम्र के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
