नेटवर्क महानगर/मुंबई
महाराष्ट्र में सियासी गर्मी और राजनीतिक तल्खी के बीच महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चेयरमैन नियुक्त किया है। इस नियुक्ति को राजनीतिक तौर पर काफी अहम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली राज्य सरकार ने महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों के बीच लिए इस फैसले से सबसे चौंका दिया है। राज्य सरकार ने शिवसेना के संस्थापक बाळासाहेब ठाकरे की याद में बनाए जा रहे राष्ट्रीय स्मारक का चेयरमैन उद्धव ठाकरे को नियुक्त किया है। इस फैसले को सीएम देवेंद्र फडणवीस के बड़े मास्टरस्ट्रोक के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार ने ऐसे वक्त पर ”बालासाहेब ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक सार्वजनिक न्यास” का पुनर्गठन किया जब राज्य में चुनावी सरगर्मियां बढ़ी हुई है। इतना ही नहीं जनवरी 2026 से पहले मुंबई में भी महानगरपालिका चुनाव होने हैं। सरकार के इस फैसले के बाद उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) पर एक बड़े मुद्दे पर हमला नहीं बोल पाएगी।
गौरतलब हो कि बाळासाहेब की विरासत पर उद्धव ठाकरे के साथ एकनाथ शिंदे भी दावा करते हैं। ऐसे में इस महत्वपूर्ण फैसले को कई तरीके से देखा जा रहा है।
बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने एक बार फिर ‘बालासाहेब ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक सार्वजनिक न्यास’ का पुनर्गठन किया है। मुंबई में हुई पुनर्गठन बैठक के दौरान, समिति ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया। ‘शिवसेना’ संस्थापक दिवंगत बालासाहेब का स्मारक वर्तमान में मुंबई में दादर इलाके के शिवाजी पार्क स्थित महापौर बंगले में बनाया जा रहा है। सरकार ने शनिवार को एक अधिसूचना जारी करते हुए बालासाहेब के बेटे उद्धव ठाकरे को चार अन्य सदस्यों के साथ इस न्यास में नियुक्त किया, जो स्मारक के निर्माण की देखरेख कर रहा है।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के मुताबिक, पूर्व मंत्री सुभाष देसाई को न्यास का सचिव नियुक्त किया गया है, जबकि वर्तमान में विधायक और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे को सदस्य बनाया गया है। बालासाहेब ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक सार्वजनिक न्यास में विधायक पराग अलवानी और पूर्व विधायक शिशिर शिंदे भी सदस्य रहेंगे। इसके अलावा 5 पदेन सदस्य भी ट्रस्ट का हिस्सा होंगे। इसमें महाराष्ट्र के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (शहरी विकास-II), प्रमुख सचिव (कानून और न्यायपालिका), बृहन्मुंबई महानगरपालिका आयुक्त और सामान्य निकाय द्वारा चुने जाने वाले सदस्यों के लिए दो सीटें आरक्षित है। आदेश के अनुसार, अध्यक्ष और सदस्यों सुभाष देसाई और आदित्य ठाकरे का कार्यकाल 5 साल का होगा, जबकि अलवानी और शिंदे 3 साल के लिए कार्य करेंगे।
सरकार ने सुभाष देसाई को बॉम्बे पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट,1950 और सहकारी समिति पंजीकरण अधिनियम,1960 के तहत चैरिटी कमिश्नर के पास ट्रस्ट की संरचना में बदलावों को पंजीकृत करने के लिए भी अधिकृत किया है। पब्लिक ट्रस्ट की स्थापना मूल रूप से 27 सितंबर, 2016 को एक सामान्य सहमति के माध्यम से की गई थी। जिसके अध्यक्ष उद्धव ठाकरे थे। ट्रस्ट के सदस्यों का प्रारंभिक तीन साल का कार्यकाल भी समाप्त होने के बाद उन्होंने 25 नवंबर, 2019 को पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद आदित्य ठाकरे को ट्रस्ट का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। पदेन सदस्यों को छोड़कर सभी का कार्यकाल 11 मार्च, 2025 को समाप्त हो गया था।
