सद्भावना वृद्धाश्रम
राजेश जायसवाल/मुंबई
वृद्धजन समुदाय और पर्यावरण केंद्रित अपनी निरंतर जनसेवा पहलों को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से राजकोट स्थित विश्व के सबसे बड़े वृद्धाश्रम ”सद्भावना वृद्धाश्रम” ने पूरे भारत में 151 करोड़ वृक्ष लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया है। जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को पूर्णतः ‘हरित’ बनाना है। इस वृक्षारोपण अभियान के तहत महाराष्ट्र में प्रारंभिक चरण में तीन करोड़ पेड़ लगाए जाएंगे। एक अन्य महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत संस्था ने राजकोट-जामनगर रोड स्थित रामपर में 400 करोड़ रुपये की लागत से विश्व का सबसे बड़ा निशुल्क वृद्धाश्रम परिसर बनाने की घोषणा की है, जिसमें सात, ग्यारह मंज़िला इमारतों का निर्माण किया जाएगा।
सद्भावना वृद्धाश्रम के संस्थापक अध्यक्ष विजयभाई डोबारिया, जिन्हें ‘द ग्रीन मैन’ या ‘वन पंडित’ के नाम से जाना जाता है, और सलाहकार मितल खेतानी ने गुरूवार, (20 नवंबर) को मुंबई मराठी पत्रकार संघ में आयोजित एक प्रेस वार्ता में इन दोनों प्रमुख पहलों की घोषणा की। इस मौके पर हसूभाई नागरेचा, श्रीमती उमीबेन रड़िया, धीरेंद्र कनाबार, गोविंद भानुशाली सहित अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे। इस दौरान सद्भावना वृद्धाश्रम ने हसूभाई नागरेचा और श्रीमती उमीबेन रड़िया का सम्मान किया, जिनके परिवार ने वृद्धाश्रम विस्तार के लिए उदारतापूर्वक 108 करोड़ रुपये का दान दिया है।
महाराष्ट्र में लगाए जाएंगे 3 करोड़ पेड़!
इन दोनों मेगा पहलों में से, पर्यावरण संरक्षण का अभियान अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचेगा, जिसके तहत पूरे देश में 151 करोड़ पेड़ लगाए जाएंगे। जिनमें से सिर्फ महाराष्ट्र में ही प्रारंभिक चरण में 3 करोड़ पेड़ लगाए जाएंगे। वहीं, नए वृद्धाश्रम परिसर के माध्यम से जरूरतमंद दिव्यांग, असहाय, अकेले व बेसहारा वृद्धजनों को निःशुल्क आधुनिक और सतत देखभाल, आवास के अलावा चिकित्सा सहयोग प्रदान किया जाएगा। घोषणा के दौरान सद्भावना वृद्धाश्रम के संस्थापक विजय डोबारिया ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में सद्भावना वृद्धाश्रम ने कुल 1.10 करोड़ पेड़ लगाए और उनकी देखभाल की है। जिनमें 40 लाख संरक्षित पेड़ और 70 लाख पेड़ मियावाकी पद्धति से उगाए गए हैं। आगे हम पूरे भारतवर्ष में कुल 151 करोड़ पेड़ लगाकर उन्हें संरक्षित करने का संकल्प लेते हैं। साथ ही, पूरे देश में वृद्धजनों के लिए बढ़ती जरूरतों को देखते हुए राजकोट में सात 11-मंज़िला इमारतों वाला नया वृद्धाश्रम परिसर बनाया जा रहा है। 15 एकड़ में फैला यह आधुनिक परिसर एक मंदिर, अन्नपूर्णा भोजनालय, पुस्तकालय, व्यायाम कक्ष, योग हॉल, चिकित्सा केंद्र, उद्यान, और सामुदायिक भवन जैसी सभी आवश्यक सुविधाओं से लैस होगा, ताकि वृद्धजन एक ही स्थान पर निःशुल्क जीवनयापन कर सकें। नए परिसर में 7 टावर होंगे, प्रत्येक टावर में 100 कमरे। हर मंज़िल पर खुली छत (टेरेस) होगी ताकि वृद्धजन टहल-घूम सकें। शय्याशायी वृद्धों की देखभाल हेतु बड़े स्तर पर स्टाफ तैनात रहेगा। पूरा परिसर व्हीलचेयर-अनुकूल होगा और हर कमरे में प्रकाश, वायु और हरियाली का विशेष ध्यान रखा गया है।
बता दें कि ”सद्भावना वृद्धाश्रम” वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा वृद्धाश्रम है, जिसमें 1,400 कमरे हैं और यहां 5,000 से अधिक शारीरिक रूप से अक्षम व असहाय वृद्ध आजीवन निःशुल्क रह सकते हैं। नए वृद्धाश्रम परिसर के निर्माण हेतु, लंदन स्थित विनुभाई बचुभाई नागरेचा परिवार (हसूभाई नागरेचा एवं उमीबेन रड़िया) ने 108 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
पेड़ लगाना आसान, पर देखभाल करना सबसे कठिन काम
वृक्षारोपण अभियान पर उन्होंने आगे कहा कि सद्भावना वृद्धाश्रम का उद्देश्य गुजरात में 15 करोड़ पेड़ एवं पूरे भारत में 151 करोड़ पेड़ लगाना और उन्हें संरक्षित करना है। आने वाले दिनों में गुजरात में सरकार, संस्थानों, दानदाताओं, स्वयंसेवकों और विभिन्न संगठनों के सहयोग से 150 ऐसे वन विकसित किए जाएंगे।
इन पहलों के पीछे की सोच बताते हुए, सद्भावना वृद्धाश्रम के सलाहकार मितल खेतानी ने कहा कि पेड़ लगाना आसान है, पर उनकी देखभाल करना सबसे कठिन काम होता है। हमारी संस्था न सिर्फ पेड़ लगाती है बल्कि उनकी पूर्ण जिम्मेदारी लेती है, जिसमें सार्वजनिक स्थानों के पेड़ों की नियमित सिंचाई भी शामिल है। इसके साथ ही, हमारा निःशुल्क एवं आधुनिक वृद्धाश्रम बेसहारा, दिव्यांग, शय्याशायी तथा परित्यक्त वृद्धजनों को गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करेगा।
जाने- सद्भावना वृद्धाश्रम के बारे में..
राजकोट स्थित सद्भावना वृद्धाश्रम, ‘वन पंडित’ विजयभाई डोबारिया द्वारा स्थापित विश्व का सबसे बड़ा वृद्धाश्रम है, जो निर्धन, अनाथ, दिव्यांग व रोगग्रस्त वरिष्ठ नागरिकों को आजीवन पूर्णतः निःशुल्क देखभाल प्रदान करता है। मानव सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट पिछले 10 वर्षों से संस्था का संचालन कर रहा है।
यहां 700 से अधिक परित्यक्त व बीमार वृद्ध रहते हैं, जिनमें से 300 शय्याशायी हैं और डायपर पर निर्भर हैं।
संस्था वृक्षारोपण, घायल एवं परित्यक्त बैलों के लिए बडाड आश्रम, डॉग शेल्टर, पशु अस्पताल और चिकित्सा सेवा जैसी गतविधियां भी संचालित करती है।
अब तक 40 लाख से अधिक स्थानीय प्रजातियों, जैसे- नीम, पीपल, वट, उंबर, आंवला आदि के पेड़ लगाए और संरक्षित किए जा चुके हैं।
इस आधुनिक सुविधा में भारतभर से आने वाले लगभग 5,000 निर्धन, असहाय, गंभीर रूप से बीमार एवं परित्यक्त वृद्ध, जिनमें- मधुमेह, किडनी रोग, पक्षाघात, हृदयरोग, मानसिक विकार, दृष्टि-हीनता, अंग कटने सहित शय्याशायी रोगी सभी को न केवल आश्रय मिलेगा, बल्कि उन्हें प्रेम, सम्मान, सेवा और देखभाल भी प्राप्त होगी, जो शायद उनके अपने घर में संभव नहीं हो पाई हो।
घाटकोपर में 22 नवंबर से रामकथा का आयोजन
‘सद्भावना वृद्धाश्रम’ के राष्ट्रव्यापी हरित मिशन के समर्थन में तथा देश में भक्ति और हरित चेतना फैलाने के उद्देश्य से घाटकोपर पूर्व स्थित आचार्य अत्रे मैदान में शनिवार 22 नवंबर से रविवार 30 नवंबर तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से पूज्य संत मोरारी बापू की ‘मानस वंदे मातरम्’ रामकथा आयोजित की गई है। इस पावन आयोजन के मनोरथी-प्रधान यजमान, स्थानीय विधायक परागभाई किशोरभाई शाह एवं उनके परिवार होंगे।
