नेटवर्क महानगर/वाराणसी
काशी की पहचान सिर्फ आध्यात्मिक नगरी की नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन केंद्र की भी है। लेकिन नववर्ष और छुट्टियों के बीच अस्सी घाट पर जो हुआ, उसने पर्यटन सुरक्षा और पुलिसिंग के दावों की पोल खोल कर रख दी। यहां मोबाइल चोरों के एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किसी स्पेशल पुलिस ऑपरेशन से नहीं हुआ, बल्कि एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर पर्यटक अंकिता गुप्ता नामक युवती के साहस और जिद से हुआ।
मुंबई से काशी घूमने गई थी अंकिता
मुंबई के घाटकोपर में रहने वाले उमेश गुप्ता की बेटी अंकिता गुप्ता, जो पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, बनारस घूमने आई थीं। सोमवार, (29 दिसंबर) की शाम वो अस्सी घाट पर घूम रहीं थी तभी भीड़ में एक उचक्का करीब दो लाख रूपये का उनका आईफ़ोन मोबाइल छीनकर फरार हो गया। घटना के तुरंत बाद अंकिता ने भेलूपुर थाने को इसकी सूचना दी। पीड़िता ने मोबाइल का बिल, दस्तावेज, ईएमआई नंबर और अन्य जरूरी जानकारी पुलिस को सौंप दी, जिसके बाद पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट तो दर्ज कर ली, परन्तु न तो लोकेशन ट्रेस की और न ही संदिग्ध इलाके में तलाशी ली। पुलिस ने सिर्फ अपनी फॉर्मेलिटी पूरी कर ली और जांच की रफ्तार वहीं थम गई।
यूपी पुलिस की निष्क्रियता से निराश होकर आखिरकार अंकिता ने स्वयं मोबाइल के ईएमआई नंबर को एक मोबाइल ऐप के जरिए ट्रेस किया। मोबाइल की लोकेशन लगातार एक ही स्थान पर दिखाई देती रही। रात करीब दो बजे अंकिता खुद उस लोकेशन पर पहुंच गई। पत्रकार सुरेश गांधी के हस्तक्षेप के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन खाली हाथ वापस लौट आई। मंगलवार की सुबह करीब 5 बजे अंकिता वापस उसी स्थान पर अकेले पहुंचीं तभी लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि संदिग्ध युवक जीटी रोड के चांदपुर चौराहे पर स्थित मकान मालिक राजेंद्र पटेल के यहां किराये पर रहता है। जिसके बाद मकान मालिक ने स्थानिक रहिवासियों की मदद से कमरे का ताला खुलवाया तो लोगों की आंखे फटी रह गई। आरोपी को इसकी भनक लग चुकी थी और वो फरार हो गया था। लेकिन कमरे के अंदर से 15 से 20 महंगे मोबाइल फोन मिले, तभी अंकिता ने अपने मोबाइल फोन की पहचान कर ली।
सूचना देने पर पुलिस एक बार फिर मौके पर पहुंची और सभी मोबाइल फोन को अपने कब्जे में लिया। अब सवाल यह उठता है कि यदि रात में ही पुलिस ने गंभीरता दिखाई होती तो आरोपी की गिरफ्तारी के साथ इस मोबाइल चोरी के पूरे नेटवर्क का खुलासा उसी समय हो सकता था।
पुलिस की हो रही थूं..थू!
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्सी घाट और आसपास इलाके में रोजाना मोबाइल चोरी की घटनाएं होती हैं, लेकिन कार्रवाई न होने से गिरोह लंबे समय से सक्रिय था। वहीं, इस पूरे मामले पर पुलिस का कहना है कि बरामद मोबाइल फोन को कब्जे में ले लिया गया है। फरार आरोपी की तलाश की जा रही है और मामले में विधिक कार्रवाई कर बरामद मोबाइलों के आधार पर अन्य पीड़ितों की पहचान भी की जाएगी।
दरअसल, यह घटना सिर्फ एक मोबाइल चोरी की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि जब सिस्टम सुस्त हो जाता है, तब एक जागरूक, शिक्षित और साहसी नागरिक किस तरह पूरे गिरोह की पोल खोल सकता है। खासकर अस्सी घाट जैसे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल पर यदि पर्यटकों को खुद सुरक्षा की लड़ाई लड़नी पड़े, तो यह प्रशासन के लिए चेतावनी नहीं, बल्कि एक चुनौती है?
