नेटवर्क महानगर/मुंबई
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव के लिए 15 जनवरी को मतदान होगा और 16 जनवरी को इसके परिणाम भी सामने आ जायेंगे। ऐसे में एक दिन पहले बुधवार को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष के सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने भाजपा-शिवसेना और एनसीपी सहित महायुती पार्टियों को घर-घर जाकर चुनाव प्रचार के दौरान पैसे बांटने का “खुला लाइसेंस” दे दिया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता राउत ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने मंगलवार को आदर्श आचार संहिता लागू होने और चुनाव प्रचार के आधिकारिक निलंबन के बावजूद घर-घर जाकर प्रचार करने की अनुमति दी।
उन्होंने कहा कि कल चुनाव प्रचार समाप्त हो गया। नियमों, कानूनों और आदर्श आचार संहिता के अनुसार, चुनाव प्रचार कल आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया था। लेकिन अचानक महाराष्ट्र चुनाव आयोग ने कहा कि चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद भी आप घर-घर जाकर प्रचार कर सकते हैं। यह कैसा नियम है? यह सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी, एकनाथ शिंदे और अजीत पवार को घर-घर जाकर प्रचार करने के दौरान खुलेआम पैसे बांटने की अनुमति और लाइसेंस देता है।
राउत ने मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाए जाने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि बिहार में लगभग 60 लाख, उत्तर प्रदेश में लगभग 1.25 करोड़ और पश्चिम बंगाल में लगभग 54 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के नाम हटाए जाने से चुनाव परिणामों पर असर पड़ सकता है। देखिए, बिहार में मतदाता सूची से लगभग 60 लाख नाम हटा दिए गए हैं। महाराष्ट्र में भी ऐसा ही हुआ है। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से लगभग सवा करोड़ नाम हटाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। और पश्चिम बंगाल के लिए आपने क्या आंकड़ा दिया है – 54 लाख? एक ही राज्य में 54 लाख मतदाताओं के नाम हटाने से चुनाव परिणाम बदल सकते हैं।
