Devendra Fadnavis
राजेश जायसवाल/मुंबई
महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे का विधान परिषद में कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। उनके लिए परम्परा के अनुसार, मंगलवार, (24 मार्च 2026) को विदाई समारोह का आयोजन किया गया।
इस मौके पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे की तारीफ की साथ ही बीजेपी के साथ उनकी सियासी दोस्ती और दूरियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि जो सदस्य आते हैं और जो सदस्य विदा लेते हैं, उनका स्वागत और सम्मानपूर्वक विदाई समारोह किया जाता है। आज हम महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और बालासाहेब ठाकरे के सुपुत्र उद्धव ठाकरे का विदाई समारोह कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, राजनीति में मतभेद होते हैं, लेकिन एक अलग रिश्ता भी होता है और वह रिश्ता सहयात्रा का होता है। हम कई वर्षों तक उद्धवजी के साथ सहयात्री रहे हैं। उद्धवजी का स्वभाव ऐसा है कि उनमें राजनीति थोड़ी कम दिखाई देती है। उनका मूल स्वभाव पारंपरिक राजनेताओं जैसा नहीं है, इसलिए कई बार उनके निर्णयों से अलग-अलग परिस्थितियां पैदा होती हैं। उनका स्वभाव काफी हद तक बालासाहेब ठाकरे जैसा ही है।
उद्धवजी एक अच्छे फोटोग्राफर हैं: फडणवीस
मुख्यमंत्री ने तारीफ करते हुए कहा कि उद्धवजी एक अच्छे फोटोग्राफर हैं। उन्होंने महाराष्ट्र की विविध छवियों को अपने कैमरे में कैद किया है। इसके पीछे उनका संवेदनशील मन साफ दिखाई देता है। उन्होंने केवल फोटोग्राफी ही नहीं की, बल्कि उसे संजोकर रखने का भी काम किया है। वारी की फोटोग्राफी उन्होंने हेलिकॉप्टर से की। अपने इस शौक को उन्होंने पूरी तरह से जिया और आगे बढ़ाया।
बालासाहेब की परंपरा को आगे बढ़ाया: फडणवीस
सीएम फडणवीस ने आगे कहा कि जब वे राजनीति में आए, तो पार्टी प्रमुख बने। 2010 के बाद हमारे बीच मित्रता का भाव भी विकसित हुआ, हालांकि अब राजनीतिक भावनाएं अलग हो गई हैं। राजनीति में काम करते समय उन्होंने परिणामों की ज्यादा चिंता नहीं की। बालासाहेब ठाकरे ने राजनीति में एक परंपरा बनाई थी जिनका कोई चेहरा नहीं है, उन्हें पहचान और राजनीतिक ताकत देकर उद्धवजी ने भी उस परंपरा को आगे बढ़ाया।
उद्धव ठाकरे लगातार सहज तरीके से बोलते हैं: फडणवीस
फडणवीस ने ये भी कहा, पुल देशपांडे को ‘कोट्याधीश’ कहा जाता है, और उनके बाद यह उपाधि उद्धवजी को दी जा सकती है। उनकी बोलचाल में एक सहजता होती है। वे लगातार सहज तरीके से बोलते हैं, कई बार तीखे तरीके से भी अपनी बात रखते हैं और जोरदार प्रतिवाद करते हैं, लेकिन उनका मूल स्वभाव वैसा नहीं है। राजनीति में कभी-कभी जोश दिखाना पड़ता है, और वे वह करते हैं।
सीएम फडणवीस ने कहा- उद्धव ठाकरे इस सदन में छह साल रहे। हमें उनकी कम टिप्पणियां सुनने को मिलीं, लेकिन अगर वे फिर आएं तो ज्यादा सुनने को मिलें, यह अच्छा रहेगा। आपका रास्ता चाहे जो भी हो, हमारी तरफ से आपको शुभकामनाएं हैं। आपके नेतृत्व में आपकी पार्टी आगे बढ़ती रहे, यही कामना है।
आपसे फिर मिलने की चाह, विदाई देने से संबंध नहीं टूटते: एकनाथ शिंदे
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी पूर्व सीएम शिवसेना (यूबीटी) पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। साथ ही कहा कि विदाई से रिश्ते खत्म नहीं होते हैं।
अपने संबोधन में एकनाथ शिंदे ने कहा कि उद्धव ठाकरे आज सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्हें स्वस्थ और निरोगी जीवन मिले, यही कामना है। उनकी आगे की राजनीतिक यात्रा के लिए शुभकामनाएं।
इस मौके पर शिंदे ने अपने खास अंदाज में शेर भी कहा- ओ जाने वालो, हो सके तो फिर वापस आना, साथ छूट गया तो इसका मतलब यह नहीं कि रिश्ता खत्म हो गया। उन्होंने कहा कि सिर्फ विदाई देने से संबंध नहीं टूटते। यह विदाई का पल नहीं, बल्कि आपसे फिर मिलने की चाह रखने वाला दिल है। डिप्टी सीएम शिंदे ने ये भी कहा, विदाई के समय अच्छी बातें ही करनी चाहिए। कुछ लोग कहीं न कहीं फिर मिलेंगे। सदन में मिलेंगे, चुनाव में मिलेंगे।
मेरा स्वभाव राजनीति का नहीं: उद्धव ठाकरे
राज्य के पूर्व सीएम और शिवसेना (UBT) पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र विधान परिषद के विदाई समारोह में भावुक भाषण देते हुए खुद को कलाकार बताया, युवाओं की ताकत पर जोर देते हुए सरकार के सामने तीन अहम मांगें भी रखीं।
भावुक अंदाज में अपना मनोगत व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि उनका स्वभाव राजनीति का नहीं, बल्कि एक कलाकार का है। उन्होंने हल्के अंदाज़ में सवाल भी उठाया कि जब लोग उन्हें इतने अच्छे से जानते हैं, तो फिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति बनी कि उन्हें किसी का हाथ पकड़ना पड़ा। उनके इस बयान को राजनीतिक हालातों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि वे इस सदन में मुख्यमंत्री के रूप में आए थे और उस दौरान कई जिम्मेदारियां अचानक उनके सामने आईं। उन्होंने माना कि उन जिम्मेदारियों से भागना सही नहीं था। अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने मंत्रिमंडल के साथियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का विशेष रूप से धन्यवाद किया।
CM फडणवीस के भाषण का जिक्र
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का धन्यवाद करते हुए उद्धव ठाकरे ने एक पुराना प्रसंग याद दिलाते हुए संत ज्ञानेश्वर का उदाहरण देते हुए कहा कि आज के समय में स्वार्थ के लिए मूल्यों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनकी यह टिप्पणी वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर एक तरह की प्रतिक्रिया मानी जा रही है।
बुवा शक्ति नहीं, युवा शक्ति जरूरी: उद्धव
उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में युवाओं की ताकत पर जोर देते हुए कहा कि सभी नेताओं को मिलकर ढोंगी बाबाओं की बजाय युवा शक्ति को मजबूत करना चाहिए। उनके मुताबिक, असली चमत्कार कोई बाबा नहीं, बल्कि देश के युवा कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री कार्यकाल की यादें साझा..
उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री बनने के बाद मंत्रालय में प्रवेश के दिन को यादगार बताया। उन्होंने कहा कि जब वे ”वर्षा बंगला” छोड़ रहे थे, उस समय महाराष्ट्र के लोगों का जो प्यार मिला, वह बेहद भावुक करने वाला था। उन्होंने कहा कि ऐसा स्नेह हर किसी के हिस्से में नहीं आता। उन्होंने यह भी बताया कि पद छोड़ने के बाद भी वे ‘”मातोश्री” से ही काम करते रहे और वहीं पर मंत्रियों से मुलाकात होती थी।
उद्धव ठाकरे ने अपने कार्यकाल के दौरान लिए गए कई अहम फैसलों को भी गिनाया। इसमें रायगढ़ को फंड देने का निर्णय, औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर करना, कोविड के दौरान मुंबई मॉडल, टास्क फोर्स का गठन, किसान कर्ज माफी, शिवभोजन थाली योजना और समृद्धि महामार्ग व मेट्रो परियोजनाओं को जारी रखना शामिल है। उन्होंने मराठी भाषा को अनिवार्य करने के फैसले का भी जिक्र किया।
अजित पवार को किया याद
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में अजित पवार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अजित पवार ने हमेशा मजबूती से साथ दिया और अच्छे कामों में कभी रुकावट नहीं डाली। उन्होंने फडणवीस सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी रखीं। उन्होंने ”मराठी भाषा भवन” के निर्माण, चौपाटी पर मराठी रंगभूमि गैलरी और वर्ली डेयरी में विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि भले ही रास्ते अलग हो जाएं, लेकिन लोकतंत्र में मुलाकातें होती रहनी चाहिए, सदन में भी और चुनावों में भी। साथ ही उन्होंने विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति की भी मांग की।
बता दें कि महाराष्ट्र विधान परिषद के 9 सदस्य मई महीने में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। जिनमें उद्धव ठाकरे के साथ नीलम गोह्रे, अमोल मिटकरी, शशिकांत शिंदे, रणजीतसिंह मोहिते पाटील, राजेश राठौड़, संदीप जोशी, दादाराव केचे और संजय केनेकर इस सूची में शामिल हैं।
