नेटवर्क महानगर/मुंबई
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने मॉनसून से पहले अभी तक मीठी नदी, साथ ही चेंबूर, मानखुर्द और भांडुप के मुख्य इलाकों से गाद निकालने के लिए ठेकेदारों को अंतिम रूप नहीं दिया है, लेकिन उसने पूरे शहर में डीवॉटरिंग पंपों की संख्या बढ़ाकर 547 कर दी है। जो पिछले साल 514 और 2024 में 481 थी। लेकिन कुल मिलाकर शहर में मॉनसून की तैयारियों में हो रही देरी मुंबईकरों की चिंताएं बढ़ा दी।
बता दें कि शहर और उपनगरों के निचले इलाकों में भारी बारिश के दौरान जमा हुए बारिश के पानी को निकालने के लिए डीवॉटरिंग पंप (Dewatering Pump) लगाए जाते हैं। ये पंप अतिरिक्त पानी को पास के ड्रेनेज सिस्टम और प्राकृतिक नालों में भेजने का काम करते हैं, जिससे एरिया में लंबे समय तक जलभराव कम करने और बाढ़ से होने वाली रुकावटों को कम करने में मदद मिलती है।
हालांकि, पिछले वर्ष मॉनसून के जल्दी आने से बीएमसी की तैयारियों में बड़ी खामियां देखने को मिली थी। जिससे कई निचले और बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में बड़े पैमाने पर पानी भर गया था। इससे आइलैंड सिटी में जलभराव के नए स्थान भी सामने आए, जिससे मौजूदा बाढ़ प्रबंधन उपायों की प्रभावशीलता को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।
बीएमसी की योजना आइलैंड सिटी के निचले इलाकों में लगाए गए डीवॉटरिंग पंपों पर इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स सेंसर लगाने की है। यह फैसला 26 मई, 2025 को हुई भारी बारिश के दौरान बाढ़ के 80 नए स्थानों की पहचान के बाद लिया गया है। ये मोशन-आधारित इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स सेंसर हर पंप की चालू स्थिति पर रियल टाइम में नज़र रखने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जिससे खराबी होने पर तेज़ी से प्रतिक्रिया देना और कुल मिलाकर बाढ़ प्रबंधन की दक्षता में सुधार करना संभव हो पाता है। इस बीच, बीएमसी के आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई में जलभराव के स्थानों की संख्या पिछले साल की तुलना में इस साल 10% बढ़ गई है, जो 453 से बढ़कर 498 हो गई है।
वहीं, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, कुल 498 स्थानों में से 391 स्थानों पर बाढ़ कम करने के उपाय पूरे कर लिए गए हैं। बाकी स्थानों पर काम मॉनसून से पहले पूरा करने की योजना है, और संबंधित विभागों को इस प्रक्रिया में तेज़ी लाने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें से लगभग 55 स्थानों पर रेलवे, मेट्रो, ट्रैफिक विभाग और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी सहित कई एजेंसियों के बीच तालमेल की ज़रूरत है। इनमें से 26 स्थानों पर काम मिलकर किया जाएगा।
