नेटवर्क महानगर/मुंबई
महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं एनसीपी के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल को गुरुवार, (24 सितंबर) को कलिना लाइब्रेरी से जुड़े एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के आखिरी मामले से भी बरी कर दिया गया। छगन भुजबल पर आरोप था कि उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी की कलिना में मौजूद एक अहम जमीन का टुकड़ा लाइब्रेरी बनाने के लिए सरकार को दिया था। यह मामला साल 2015 में एंटी-करप्शन ब्यूरो द्वारा दर्ज किया गया था। उस समय भुजबल महाराष्ट्र के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री थे। उन पर आरोप था कि यूनिवर्सिटी ने अपनी 4 एकड़ जमीन सरकार को लाइब्रेरी बनाने के लिए दी थी। लेकिन पीडब्ल्यूडी ने 2009 में टेंडर जारी कर जमीन के एक हिस्से पर लाइब्रेरी बनवाई और बाकी बची बेशकीमती जमीन एक जाने-माने प्राइवेट डेवलपर को 99 साल के लिए मात्र 1 रुपये प्रति वर्ग मीटर की बेहद कम दर पर लीज पर दे दी।
इस मामले में वकील सुदर्शन खवासे ने छगन भुजबल का पक्ष रखा। विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने सुनवाई के बाद छगन भुजबल और इस मामले के अन्य सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। स्पेशल कोर्ट ने पाया कि इसमें कोई अवैध कमाई नहीं हुई और न ही कोई ‘क्विड प्रो क्वो’ (लेन-देन या बदले में कुछ पाने की बात) हुई। इस फैसले के बाद छगन भुजबल और उनके समर्थकों को बड़ी कानूनी राहत मिली है।
