नेटवर्क महानगर/मुंबई
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में सोमवार, (20 जुलाई) को सह्याद्रि गेस्ट हाउस में ‘राज्य मराठी विकास संस्थान’ के गवर्निंग बोर्ड की एक बैठक हुई। जिसमें मुख्यमंत्री फडणवीस ने राज्य में मराठी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक उपयोग को लेकर संबंधित विभागों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं। सीएम फडणवीस ने अधिकारियों से कहा है कि ‘मराठी भाषा’ को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक और समयबद्ध कार्य योजना तैयार की जाए, ताकि शासन-प्रशासन, शिक्षा, तकनीक और सार्वजनिक जीवन में मराठी का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि मराठी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए इसके प्रचार-प्रसार के लिए सभी विभागों को समन्वित रूप से काम करना होगा।
मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार संबंधित विभाग मराठी भाषा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेंगे। इसमें विभिन्न सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक सेवाओं में मराठी के अधिकतम उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
योजना में यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी योजनाओं, सूचनाओं और सेवाओं तक आम नागरिक अपनी मातृभाषा में आसानी से पहुंच सकें। सरकारी कामकाज में बढ़ेगा मराठी का उपयोग सरकार का उद्देश्य है कि सरकारी पत्राचार, अधिसूचनाएं, वेबसाइट, डिजिटल सेवाएं और नागरिक सुविधाएं अधिक से अधिक मराठी भाषा में उपलब्ध हों। इससे आम लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ लेने में आसानी होगी और भाषा के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा विभिन्न विभागों को मराठी में दस्तावेज तैयार करने और अधिकारियों-कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया जा सकता है।
शिक्षा और तकनीक पर रहेगा फोकस
कार्य योजना में स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में मराठी भाषा के अध्ययन और उपयोग को प्रोत्साहित करने के उपाय भी शामिल किए जा सकते हैं। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप्लिकेशन और ई-गवर्नेंस सेवाओं में मराठी सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों में किसी भाषा की मजबूत उपस्थिति उसके दीर्घकालिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि मराठी साहित्य, लोककला, नाटक, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और प्रचार के लिए भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। इसके लिए साहित्यकारों, शिक्षाविदों और सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ मिलकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। बैठक के दौरान संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी कार्ययोजना तैयार कर सरकार को प्रस्तुत करें। साथ ही विभिन्न योजनाओं की नियमित समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाए कि तय किए गए लक्ष्य समय पर पूरे हों।
क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने से सांस्कृतिक विरासत होगी मजबूत
मराठी भाषा के अधिक उपयोग से नागरिकों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं की जानकारी अपनी मातृभाषा में आसानी से मिल सकेगी। इससे प्रशासन और आम जनता के बीच संवाद भी अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने से सांस्कृतिक विरासत मजबूत होती है और शिक्षा तथा प्रशासन में नागरिकों की भागीदारी भी बढ़ती है।
