नेटवर्क महानगर/मुंबई
मराठा आरक्षण के लिए शुक्रवार (29 अगस्त) से मुंबई के आजाद मैदान पर आंदोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने आज शाम यानी मंगलवार (2 सितंबर) को अपना आमरण अनशन खत्म कर दिया है। महाराष्ट्र सरकार के चार मंत्री आजाद मैदान (धरनास्थल) में मनोज जरांगे से मुलाकात करने पहुंचे थे। मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त करवाया। मनोज जरांगे ने मंत्रियों की उपस्थिति में अपने समर्थकों से कहा कि ”हम जीत गए हैं।” हमारी मांगें भी मान ली गई है। जारंगे पाटिल ने सरकार द्वारा दिए गए जीआर को स्वीकार कर लिया है। सरकार के मंत्रियों में राधाकृष्ण विखे पाटिल, शिवेंद्र राजे भोंसले, जय कुमार गोरे और माणिकराव कोकाटे जरांगे से मिलने आजाद मैदान पहुंचे थे। चारों मंत्रियों ने जरांगे पाटिल को सारी जानकारी दी, जो आरक्षण को लेकर जो समिति से चर्चा हुई थी, इसके बाद जरांगे ने ऐलान किया कि वो जीत गए।
जरांगे को आजाद मैदान खाली करने के लिए कल यानी बुधवार सुबह तक का समय दिया गया है। उन्हें और उनके समर्थकों को कल सुबह तक आजाद मैदान खाली करना होगा। इससे पहले हाई कोर्ट ने मंगलवार दोपहर 3 बजे तक आजाद मैदान को खाली करने का आदेश दिया था। वहीं, इस बीच सरकार ने उनकी 8 में 6 मांगे स्वीकार कर ली है। दो मांगे अभी भी अधूरी हैं।
बता दें कि मंगलवार को मनोज जरांगे के भूख हड़ताल का 5वां दिन था। भारी संख्या में पुलिस बल जब आजाद मैदान खाली कराने पहुंची तो जरांगे के समर्थकों और पुलिस में बहस छिड़ गई। हाई कोर्ट में कल 1 बजे दोबारा इस मामले पर सुनवाई होगी।

जरांगे की 6 मांगें मंजूर
1. हैदराबाद संस्थान का गैजेट तुरंत लागू होगा, आज ही जीआर निकलेगा।
2. सतारा संस्थान का गैजेट एक महीने के अंदर लागू होगा।
3. मराठा आंदोलनकारियों पर आज तक जितने केस दर्ज हुए, सभी को वापस लिए जाएंगे, कोर्ट में जाकर राज्य सरकार केस को रद्द करेगी।
4. मराठा आरक्षण के लिए जिन जिन लोगों की मौत हुई है, उनके परिजनों को आर्थिक लाभ देकर घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिलेगी।
5. 58 लाख मराठा कुनबी होने का रिकॉर्ड मिला है, यह रिकॉर्ड ग्राम पंचायत में रखा जाएगा।
6. सरकार ने 1 घंटे में जीआर निकालने का वादा किया है। जीआर की कॉपी मिलने के बाद आंदोलन को पीछे लेने का आधिकारिक ऐलान किया जाएगा।
दो मांगें रही अधूरी?
1. कुणबी और मराठा एक है, यह सिद्ध करने के लिए सरकार अभ्यास करेगी, 2 महीने के अंदर इसका फैसला करेगी।
2. ”सगे सोयरे” को लागू करने के लिए 8 लाख आपत्तियां प्राप्त हुई थीं, इस पर अध्ययन करके निर्णय लिया जाएगा।
दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समुदाय को कुणबी, कुणबी-मराठा या मराठा-कुणबी जाति प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सरल करने के लिए ये महत्वपूर्ण फैसला लिया है। यह फैसला जस्टिस संदीप शिंदे (रिटायर्ड) समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है, जिसे हैदराबाद, सतारा और बॉम्बे गजट के अध्ययन के लिए नियुक्त किया गया था। सरकार ने गांव स्तर पर एक स्थानीय जांच समिति गठित करने का फैसला लिया है, जो योग्य व्यक्तियों की पहचान कर उनकी रिपोर्ट सक्षम प्राधिकरण को सौंपेगी।
मराठा समुदाय के लोगों को कुणबी जाति प्रमाण पत्र देने की मांग की गई थी ताकि वे ओबीसी आरक्षण का लाभ उठा सकें। कुणबी एक कृषि समुदाय है, जो ओबीसी श्रेणी में आता है।
