नेटवर्क महानगर/मुंबई
महाराष्ट्र के नवनियुक्त पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सदानंद दाते ने राज्य के मुखिया देवेंद्र फडणवीस से उनके आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ बंगले पर मुलाकात की। यह मुलाकात एक गुडविल विजिट के रूप में देखा जा रहा है। महाराष्ट्र मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने इस मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की है। सीएमओ की ओर से किए गए एक्स पोस्ट में लिखा गया- मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस से आज मुंबई स्थित वर्षा निवास में महाराष्ट्र के नवनिुक्त पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री फड़णवीस ने उन्हें नियुक्ति पर बधाई दी तथा आगामी कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री और नए डीजीपी के बीच यह पहली औपचारिक मुलाकात मानी जा रही है, जिसे प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन की प्राथमिकताओं और आने वाले समय की चुनौतियों को लेकर भी अनौपचारिक चर्चा होने की बात कही जा रही है। नए डीजीपी के रूप में सदानंद दाते से राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने, अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीदें जुड़ी हैं।
महाराष्ट्र के नवनियुक्त डीजीपी सदानंद दाते मार्च 2024 तक महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) के प्रमुख थे, जब वह भारत की आतंकवाद विरोधी एजेंसी एनआईए का नेतृत्व करने के लिए नई दिल्ली चले गए थे। दाते को 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के नायकों में से एक माना जाता है। 26 नवंबर, 2008 को मुंबई आतंकी हमलों के दौरान, सदानंद दाते 2008 में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (मध्य क्षेत्र) के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने एक पुलिस टीम का नेतृत्व किया था जिसने कामा अस्पताल की छत पर लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों अजमल कसाब और अबू इस्माइल को घेर लिया था और ग्रेनेड के टुकड़ों से गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, आतंकवादियों से मुकाबला जारी रखा। बाद में उन्हें वीरता के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया।
दाते ने महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) में सेवा दी थी और मीरा-भयंदर, वसई-विरार के पहले पुलिस आयुक्त थे। उन्होंने मुंबई पुलिस में संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) और अपराध, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में डीआईजी और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में आईडी (ऑपरेशंस) के रूप में भी कार्य किया। दाते का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था और उन्होंने अपना बचपन घर चलाने के लिए अखबार बेचकर बिताया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी मां घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थीं। उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास की और आईपीएस में शामिल हो गए। उन्होंने आर्थिक और संगठित अपराधों में विशेषज्ञता प्राप्त की और पुणे यूनिवर्सिटी से आर्थिक अपराधों में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की।

महाराष्ट्र डीजीपी पद से रिटायर हुईं रश्मि शुक्ला
शनिवार, (3 जनवरी को) को रिटायर हुईं महाराष्ट्र की पुलिस महानिदेशक (DGP) रश्मि शुक्ला ने सीएम देवेंद्र फडणवीस से उनके आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ बंगले पर शिष्टाचार मुलाकात की। जहां उन्होंने रश्मि शुक्ला को उनके अब तक के सेवाकाल के लिए शुभकामनाएं दीं और आगे के जीवन एवं करियर के लिए सफलता की कामना की। इस मुलाकात की जानकारी महाराष्ट्र मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से साझा की। सीएमओ द्वारा किए गए पोस्ट में लिखा गया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रिटायर हो रही पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला से उनके आवास पर मुलाकात की और उन्हें सफल करियर के लिए शुभकामनाएं दीं। पोस्ट के साथ दोनों की मुलाकात की तस्वीर भी साझा की गई है।
बता दें कि महाराष्ट्र पुलिस की पहली महिला डीजीपी रश्मि शुक्ला शनिवार को सेवानिवृत्त हुईं। अपने विदाई अवसर पर उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि यह पल उनके लिए अतीत की यादों में खोया हुआ है। महाराष्ट्र पुलिस ने उन्हें जीवन में बहुत कुछ दिया और सिखाया। रश्मि शुक्ला ने कहा, मैं भारतीय पुलिस सेवा से रिटायर हो रही हूं और यह मेरे लिए बहुत भावुक क्षण है। महाराष्ट्र पुलिस ने मुझे बहुत कुछ दिया है और मैंने यहां बहुत कुछ सीखा है। एक टीम के रूप में हमने महाराष्ट्र पुलिस को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। मुझे गहरा संतोष है और मैं महाराष्ट्र पुलिस के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देती हूं।
रश्मि शुक्ला को उनके सम्मान में दादर स्थित नायगांव पुलिस ग्राउंड में आयोजित विदाई समारोह के दौरान गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। यह समारोह उनके लंबे और उल्लेखनीय सेवा काल को समर्पित रहा। 1988 बैच की आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला ने महाराष्ट्र पुलिस की कमान संभालकर इतिहास रचा था। वह राज्य की पुलिस प्रमुख बनने वाली पहली महिला अधिकारी थीं।
महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल के दौरान रश्मि शुक्ला के खिलाफ कथित फोन टैपिंग मामले को लेकर केस दर्ज किए गए थे। इन मामलों ने काफी राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल मचाई थी। हालांकि, बाद में ये सभी मामले वापस ले लिए गए। विधानसभा चुनाव के दौरान विपक्षी दलों ने उन पर पक्षपात के आरोप लगाए थे। इसके चलते चुनाव आयोग ने उनका तबादला करने का आदेश दिया था। हालांकि, बाद में उन्हें फिर से उनके पद पर बहाल कर दिया गया।
