नेटवर्क महानगर/मुंबई
महाराष्ट्र में फडणवीस सरकार द्वारा गैर-मराठी ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए एक साल की अतिरिक्त मोहलत दे दी गई है। इस फैसले के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS), विपक्ष और सरकार के बीच सियासी घमासान तेज हो गया। वहीं, सरकार के फैसले से गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालक खुश हैं और मुंबई में जश्न मना रहे हैं। इस बीच, मराठी भाषा की अनिवार्यता को चुनौती देने वाले बॉम्बे हाईकोर्ट के याचिकाकर्ता मो. कासिम अहमद ने भी मुख्यमंत्री के हालिया बयान और फैसले पर नाराजगी जाहिर की है।
कासिम अहमद का कहना है कि सरकार को भाषा सीखने के लिए समय देने के बजाय इस पूरे मामले में स्पष्ट और समान नीति अपनानी चाहिए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए एक साल की अतिरिक्त मोहलत दिए जाने के बाद बीजेपी रिक्शा यूनियन की ओर से जश्न मनाया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय ऑटो चालक शामिल हुए। भोजपुरी और मराठी गानों पर ऑटो चालक जमकर नाचे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी का आभार जताया। ऑटो-टैक्सी चालकों का कहना है कि मराठी को लेकर कार्रवाई के डर से उनके मन में चिंता थी, लेकिन मुख्यमंत्री के फैसले से उन्हें राहत मिल गई है। अब अगले एक साल में वे मराठी सीखने की पूरी कोशिश करेंगे।
जश्न के दौरान बीजेपी कामगार आघाड़ी के अध्यक्ष और बीजेपी ऑटो यूनियन नेता अभिजीत राणे ने मनसे पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर मनसे कार्यकर्ताओं की ओर से किसी उत्तर भारतीय ऑटो चालक के खिलाफ मारपीट या कार्रवाई की जाती है, तो उसका उसी अंदाज में जवाब दिया जाएगा। एक वीडियो जारी कर बीजेपी नेता अभिजीत राणे ने ऑटो-टैक्सी चालकों से कहा है कि उन्हें डरने की बिलकुल जरूरत नहीं है। शिवसेना के नाराज मंत्री को लेकर सवाल पूछे जाने पर अभिजीत राणे ने कहा कि जब ऑटो चालकों पर कार्रवाई हो रही थी, तब वे नाराज थे और अब जब उनके पक्ष में फैसला हुआ है तो कुछ लोग नाराज हैं।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने क्या कुछ कहा?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ऑटो रिक्शा-टैक्सी चालकों ने इस बात का समर्थन किया है कि मुंबई में काम चलाऊ मराठी उनको सीखनी चाहिए, वो इसे सीखना भी चाहते हैं, इसके लिए उनका पूरा समर्थन है। लेकिन उन्होंने इसके साथ ये भी कहा कि अलग-अलग उम्र के लोग इस व्यवसाय में हैं। कई लोगों ने बहुत पहले पढ़ाई छोड़ दी थी। इसलिए इतने कम समय में मराठी सीखना उनके लिए कठिन है। उन्होंने कामचलाऊ मराठी सीखाने के लिए बहुत वृहद प्लान तैयार किया है। उन्होंने ये मांग की है कि इसके लिए उन्हें एक साल का समय दिया जाए। राज्य सरकार ने उनकी बात को माना है और उन्हें एक साल का समय दिया जा रहा है। मराठी बोलने को लेकर एक साल तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस दौरान उनकी मदद की जाएगी, अलग-अलग तरह से कक्षाएं तैयार कर, साहित्य तैयार कर उन्हें मराठी सीखाने का काम किया जाएगा।
अमित ठाकरे का सरकार पर हमला
मुख्यमंत्री के इस फैसले पर मनसे के युवा नेता अमित ठाकरे ने भी सवाल उठाए हैं। अमित ठाकरे ने कहा कि मराठी सीखने के लिए एक साल की मोहलत दी जा रही है, जबकि सरकार चाहे तो 10 या 15 साल की मोहलत दे सकती है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर इस समय ऐसी जरूरत क्यों पड़ी?
अमित ठाकरे ने सरकार के फैसले को उत्तर प्रदेश चुनाव से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि क्या चुनावी मजबूरी की वजह से ‘मराठी भाषा’ और महाराष्ट्र की अस्मिता को पीछे किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को अपने राज्य और भाषा के लिए मजबूती से खड़ा होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई हिंदी बोल रहा है या कथित तौर पर बदतमीजी कर रहा है तो उसके खिलाफ प्रतिक्रिया होगी।
मंत्री आशीष शेलार का पलटवार
अमित ठाकरे के बयान पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री आशीष शेलार ने पलटवार करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी आनी चाहिए और मराठी भाषा का सम्मान होना चाहिए। बीजेपी की भी यही भूमिका है, लेकिन जो गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालक मराठी सीखना चाहते हैं, उन्हें इसके लिए समय मिलना चाहिए। इसी वजह से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक साल की अतिरिक्त मोहलत दी है। उन्होंने साफ कहा कि मुख्यमंत्री का फैसला अच्छा है, लेकिन किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है।
अमित ठाकरे पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि जब महाविकास आघाड़ी की सरकार थी, उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे और आदित्य ठाकरे मंत्री थे, तब मराठी भाषा से जुड़े नियम को लागू करने के लिए क्या प्रयास किए गए? उन्होंने कहा कि अमित ठाकरे को पहले अपने चाचा उद्धव ठाकरे और भाई आदित्य ठाकरे से यह सवाल पूछना चाहिए।
शिवसेना (यूबीटी) ने सरकार के फैसले पर बोला हमला
वहीं, महायुति सरकार के भीतर भी यह साफ किया जा रहा है कि एक साल की मोहलत का मतलब मराठी से छूट नहीं है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने साफ तौर पर मीडिया से सामने आकर कहा है कि मुख्यमंत्री का फैसला सभी के लिए बाध्यकारी है, लेकिन मराठी सीखने की अनिवार्यता खत्म नहीं हुई है। मंत्री सरनाईक के मुताबिक, फैसला रद्द नहीं हुआ है, सिर्फ मराठी सीखने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। शिंदे गुट के मंत्री योगेश कदम ने भी कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले व्यक्ति को मराठी आनी चाहिए।
मराठी अस्मिता पर भिड़े राजनीतिक दल
दरअसल, गैर-मराठी ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर लगातार सरकार पर लगातार दबाव बन रहा था। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इस मामले में राहत देने की मांग की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने बीजेपी ट्रांसपोर्ट यूनियन और ऑटो-टैक्सी चालकों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और मराठी सीखने के लिए एक साल की अतिरिक्त मोहलत देने का ऐलान कर दिया। सरकार की ओर से कहा गया है कि इस अवधि में मराठी सीखने को लेकर गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अब सवाल सिर्फ एक साल की मोहलत का नहीं है। सवाल यह भी है कि एक साल बाद मराठी भाषा से जुड़े नियम को सरकार किस तरह लागू करेगी और क्या तब गैर-मराठी ऑटो-टैक्सी चालकों के खिलाफ फिर कार्रवाई शुरू होगी? मराठी भाषा पर सियासत जारी है और एक साल की मोहलत के फैसले ने इस विवाद को फिलहाल ठंडा नहीं बल्कि और गर्म कर दिया है। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा अधिसूचना जारी कर मंत्रिमंडल के सभी अधिकार अपने पास केंद्रित किए जाने को लेकर भी महायुति के मंत्री नाराज बताए जा रहे हैं। नाराज मंत्रियों का सवाल है कि अगर मुख्यमंत्री को एकतरफा फैसले ही लेने हैं, तो फिर कैबिनेट बैठकें किसलिए की जाती हैं?
