Aaditya Thackeray Press conference
नेटवर्क महानगर/मुंबई
महाराष्ट्र में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखेने को मिला है। यहां मुंबई में नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई प्रस्तावों को लेकर मचे भारी हंगामे के बीच, हाल ही में राज्य के सत्ताधारी ‘महायुति’ गठबंधन का नेतृत्व करने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी दल शिवसेना (UBT) के बीच सहयोग का एक स्पष्ट उदाहरण देखने को मिला।
ये थे बेहद विवादित प्रस्ताव- सेवन हिल्स अस्पताल और पांच नगर निगम ब्लड बैंकों को निजी संचालकों को सौंपना, बांद्रा पश्चिम में एक फुटबॉल मैदान को प्रदर्शनी या कन्वेंशन सेंटर में बदलना, और बेहद पॉश इलाका मालाबार हिल के ‘ग्रीन ज़ोन’ में बदलाव करना। फिलहाल, ये सभी प्रस्ताव रोक दिए गए हैं।
बृहन्मुंबई महानगरपलिका (BMC) की ‘इम्प्रूवमेंट्स कमेटी’ ने इन प्रस्तावों को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया है। यह अचानक उठाया गया कदम तब सामने आया, जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक और युवा नेता आदित्य ठाकरे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में आदित्य ठाकरे ने बीजेपी की महायुति सरकार सहयोगी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली ‘शिवसेना’ पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एकनाथ शिंदे गुट इन प्रस्तावों के ज़रिए मुंबई की कीमती जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है। लेकिन, असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ‘मातोश्री’ से एक फ़ोन आया, जिस बातचीत के बाद घटनाक्रम तेजी से बदलने लगा।
बीजेपी ने पर्दे के पीछे से लगाई रोक!
आदित्य ठाकरे के निर्देश पर, शिवसेना (UBT) के विधान परिषद सदस्य (MLC) मिलिंद नार्वेकर ने मुख्यमंत्री फडणवीस को प्रस्तावों में मौजूद कमियों के बारे में जानकारी दी। नार्वेकर के अनुसार, इसके बाद देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत बीजेपी नगरसेवकों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी और निर्देश दिया कि बीएमसी में इन प्रस्तावों को रोक दिया जाए। दिलचस्प बात यह है कि शिंदे गुट की शिवसेना के एक नगरसेवक ने भी ब्लड बैंक प्रस्ताव पर फिर से विचार करने का समर्थन किया, जबकि बीजेपी ने पर्दे के पीछे से चुपचाप इस रोक को लागू करवाया।
क्या महाराष्ट्र में बदल रहे सियासी समीकरण?
पहले सरकार में एक साथ रहे शिवसेना (UBT) और बीजेपी अब एक दूसरे के विरोधी बन चुके हैं। हालांकि, शिवसेना (UBT) के कहने पर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने एकनाथ शिंदे की ‘शिवसेना’ को मानो किनारे कर दिया है। इससे महाराष्ट्र में बदलते राजनीतिक समीकरणों को लेकर ज़ोरदार चर्चा छिड़ गई है। इस साल की शुरुआत में बीजेपी-शिवसेना के गठबंधन ने बीएमसी चुनावों में ऐतिहासिक जनादेश हासिल करने के बाद, देश की सबसे धनी महानगरपालिका पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था।
कैसे हैं फडणवीस और नार्वेकर के संबंध?
सुधार समिति की अगुवाई एकनाथ शिंदे की शिवसेना की संध्या दोशी कर रही हैं। विपक्ष ने उनके ऊपर आरोप लगाया है। अब सीएम फडणवीस की नार्वेकर द्वारा की गई तारीफ़ और उनका यह बयान कि उन्होंने ही इन प्रस्तावों को टलवाया है, राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे के करीबी सहयोगी होने के बावजूद, मिलिंद नार्वेकर के बारे में कहा जाता है कि उनके फडणवीस के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं; उन्हें उन दो पूर्व गठबंधन सहयोगियों के बीच एक सेतु के तौर पर भी देखा जाता है, जो अब एक-दूसरे के विरोधी बन चुके हैं।
