मां अन्नपूर्णा
पुलिस आयुक्त अग्रवाल ने किया मंदिर स्थल का निरक्षण…
अंकेश जायसवाल/वाराणसी
हिन्दुओं के सबसे बड़े धार्मिक पर्व ‘दीपावली’ का आगाज हो चुका है। आज ‘धनतेरस’ से इस महापर्व की शुरुआत मानी जाती है। धार्मिक नगरी काशी में आज मां अन्नपूर्णा ने भी अपना खजाना खोल दिया है। धनतेरस पर देवी का खजाना पाने के लिए हजारों की संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है। हर साल धनतेरस के दिन से ही माता अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन के लिए कपाट खोले जाते हैं। अन्नपूर्णा मंदिर में 5 दिन यानी अन्नकूट तक भक्त इस स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन कर पाएंगे। उसके बाद फिर माता के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इसी के मद्देनज़र वाराणसी पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने शुक्रवार, (17 अक्टूबर) को मां अन्नपूर्णा मंदिर स्थल का निरीक्षण भी किया था। इस दौरान उन्होंने अन्नपूर्णा मठ मन्दिर के पीठाधीश्वर महंत श्री शंकरपूरी जी महराज से संवाद कर मंदिर परिसर की सुरक्षा-व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा एवं भीड़ नियंत्रण पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। पुलिस आयुक्त ने मंदिर परिसर, बैरिकेडिंग, पार्किंग और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए वहां तैनात पुलिस बल को सतर्क रहने तथा एकल मार्ग पर सुचारू आवाजाही बनाए रखने के निर्देश दिए।

पुलिस आयुक्त ने महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संवेदनशील स्थानों पर महिला पुलिस बल की विशेष तैनाती एवं इंटेलिजेंस यूनिट को सक्रिय रखकर संदिग्ध गतिविधियों पर सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। इस दौरान उन्होंने स्थानीय व्यापारियों से भी संवाद कर दुकानों एवं सर्राफा प्रतिष्ठानों पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने की अपील की, ताकि मंदिर क्षेत्र की सुरक्षा-व्यवस्था और सुदृढ़ हो सके।
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के साथ अपर पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था एवं मुख्यालय शिव हरि मीणा, पुलिस उपायुक्त काशी जोन गौरव बंसवाल, अपर पुलिस उपायुक्त काशी जोन सरवणन टी., सहायक पुलिस आयुक्त व थाना प्रभारी सहित अन्य पुलिसकर्मी मौजूद थे।
भक्तों को वितरित किया जाता है विशेष ‘खजाना’
धनतेरस के दिन से अगले पांच दिनों तक मंदिर में माता के भक्तों को खास खजाना बांटा जाता है। इसमें पुरानी अठन्नी और धान का लावा शामिल होता है, जो चांदी जैसा चमकदार दिखाई देता है। यह परंपरा सदियों से चल रही है। लेकिन यह अभी भी एक रहस्य बना हुआ है कि हर साल कितनी मात्रा में यह खजाना वितरित किया जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पुरानी अठन्नी और धान के लावे को घर या व्यापारिक प्रतिष्ठान में रखने से दरिद्रता नहीं आती और सुख-समृद्धि बनी रहती है।यही कारण है कि देशभर से भक्त इस खजाने को पाने करने के लिए मंदिर आते हैं और कई घंटों लंबी कतारों में लगकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। अन्नकूट के दिन मां अन्नपूर्णा को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगेगा। इन 56 व्यजंनों में कच्चा और पका दोनों प्रकार के भोजन शामिल होंगे। अन्नकूट के बाद देवी के प्रसाद को भक्तों में वितरित किया जाएगा। इस दौरान भक्तों की भारी भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ पड़ती है और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। इस दिन माँ का आशीर्वाद पाना सौभाग्य माना जाता है।
