दक्षिण से 129 की जगह 195 सांसद होंगे: अमित शाह
नेटवर्क महानगर/मुंबई
संसद का विशेष सत्र गुरुवार से शुरू हो गया है। महिला आरक्षण और चुनाव क्षेत्रों के पुनर्गठन से जुड़े तीन ज़रूरी बिल संसद में पेश किए गए। बिल पेश करने के पक्ष में 251 सदस्यों ने वोट दिया। जबकि 185 सदस्यों ने इसका विरोध किया। इसके बाद सरकार और विपक्ष के बीच जनगणना और महिला आरक्षण पर बहस हुई। इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली। इसमें शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महिला आरक्षण और चुनाव क्षेत्र के पुनर्गठन बिल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अपनी पार्टी की स्थिति स्पष्ट की है।
शिवसेना (यूबीटी) पार्टी के सांसद संजय राउत ने उद्धव ठाकरे को लेकर X पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने बताया कि इस पर ठाकरे की क्या राय है। उन्होंने लिखा- महिला आरक्षण बिल पर इस समय राजनीतिक हंगामा मचा हुआ है..शिवसेना की राय साफ है। महिला आरक्षण बिल 2023 में संसद में पास हो चुका है, इसलिए 33% महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाना चाहिए। साथ ही चर्चा और रिसर्च की ज़रूरत है। चुनाव क्षेत्र के पुनर्गठन यानी डिलिमिटेशन के मुद्दे को तुरंत रोक देना चाहिए। यह राष्ट्रीय एकता के लिए एक बड़ा और ज़रूरी मुद्दा है। हमारे लिए, यह किसी एक पार्टी के राजनीतिक भविष्य का मामला नहीं है, बल्कि देश के भविष्य का मामला है। इसलिए इस पर चर्चा और रिसर्च ज़रूरी है।
इस बीच, लोकसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026 और चुनाव क्षेत्र के पुनर्गठन (डिलिमिटेशन) बिल-2026 का कड़ा विरोध किया। उन्होंने यह भी मांग की कि महिला रिज़र्वेशन में पिछड़ी महिलाओं के लिए अलग कोटा होना चाहिए। उन्होंने महिला रिज़र्वेशन को जनगणना और चुनाव क्षेत्र के पुनर्गठन बिल से अलग करने की सरकार की कोशिशों पर भी आपत्ति जताई। इस बीच, पूर्व सीएम और सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सरकार से पूछा- हम महिला रिज़र्वेशन के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार अभी तक जनगणना क्यों नहीं करा रही है? उन्होंने सवाल उठाया कि बिना नई जनगणना के यह बिल धोखा है और मांग की कि इसमें ओबीसी व मुस्लिम महिलाओं को भी शामिल किया जाए। सपा ने मांग की है कि जनगणना में जातिगत आंकड़े शामिल हों ताकि पिछड़े और वंचित वर्ग को सही प्रतिनिधित्व मिल सके।
महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी
बता दें कि, संसद के बजट सत्र के समापन के बीच केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया था। सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के बजाय 16, 17 और 18 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाने की योजना बनाई गई थी। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़ी बाधाओं को दूर करना और आवश्यक संशोधन विधेयकों को पारित करना है।
सरकार लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इसके लिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव लाया जा सकता है। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर नई संरचना तैयार की जा सकती है, जिसमें लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
”नारी शक्ति वंदन अधिनियम” में संशोधन संभव
बताया जा रहा है कि आज से शुरु हो रहे संसद के विशेष सत्र के दौरान संविधान संशोधन विधेयक पेश किया जा सकता है, जिसके जरिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन किया जाएगा। इस कानून को 2023 में पारित किया गया था, लेकिन इसके लागू होने को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने के लिए अमित शाह ने हाल के दिनों में एनडीए और विपक्ष के कई दलों के नेताओं से अलग-अलग बैठकें की हैं।
सरकार चाहती है कि महिला आरक्षण को जल्द लागू किया जाए और इसके लिए सभी दलों का समर्थन हासिल किया जाए। सरकार के संकेतों के अनुसार, संसद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं किया जाएगा, बल्कि एक निश्चित तारीख के साथ स्थगित कर पुनः बैठक बुलाई जाएगी, जिससे इस अहम विधेयक को पारित किया जा सके।
