मुंबई: इस देश को एनआरसी, एनपीआर नहीं, रोज़गार चाहिए...इस देश को अमन और शांति चाहिए

मुंबई: संशोधित नागरिकता कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NCR) को लेकर शुरू हुआ विरोध थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। आर्थिक नगरी मुंबई से लेकर देश के तमाम हिस्सों में रोज़ विरोध प्रदर्शनों का दौर लगातार जारी है। इसमें अब राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) का विरोध भी शामिल हो गया है।
सोमवार को कुर्ला के गाँधी मैदान में नागरिकता संशोधन कानून (एनसीआर) एवं एनपीआर के विरोध में कुर्ला के नागरिकों ने धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया था। जिसमें मुख्य रूप से कुर्ला और मुंबई उपनगर के नागरिक और जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।

आरटीआय कार्यकर्ता शकील अहमद शेख ने कहा, देश और संविधान के लिए लोकतंत्र की आवाज उठाना आवश्यक है। केंद्र सरकार तानाशाह नहीं हो सकती और लोगों पर अपना एजेंडा नहीं थोप सकती है। इस देश को एनआरसी, एनपीआर नहीं चाहिए। इस देश को रोजगार चाहिए। इस देश को अमन और शांति चाहिए।
प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा झंडा और तख्तियां लिए हुए थे जिन पर लिखा था- दंगों और दंगायों से देश नहीं चलता। माँ और मुल्क बदले नहीं। देश बचाओ-संविधान बचाओ। संविधान बचाओ, देश मत बांटो।
इस विरोध प्रदर्शन में अमित शाह की तानाशाही नहीं चलेगी…नहीं चलेगी तथा एनसीआर से चाहिए आज़ादी, सीएए से चाहिये आज़ादी, और भाजपा मोदी सरकार के विरुद्ध नारे लगाए गए, एवं भारत माता की जय, इंकलाब जिंदाबाद, हम सब एक है के नारे लगाए गए।
इस प्रदर्शन में इरशाद खान (कुर्ला वॉइस) आज़ाद खान, इरफान शेख, जनार्दन जंगले, हसीब भाटकर, गुलाम रसूल, डॉ. इम्तियाज अंसारी, किशोर मदयान भूतपूर्व सेक्रेटरी यूनाइटेड, नेशन धूपा अश्विनी फिल्ममेकर, भट्टाराम अध्यक्ष-टिस छात्र यूनियन, आरटीआय कार्यकर्ता शकील अहमद शेख, मराठा खान, सुवर्णा रवि, मंसूर शेख, आदिल अंसारी सहित लगभग दो हजार नागरिकों ने भाग लिया।
