Keshav Upadhyay Maharashtra BJP Spokesperson
नेटवर्क महानगर/मुंबई
महाराष्ट्र भाजपा प्रदेश के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री एवं शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे से मांग की कि वह अपनी पार्टी की वार्षिक दशहरा रैली को रद्द कर दें और उसके लिए लगाया जाने वाला सारा पैसा बाढ़ से प्रभावित मराठवाड़ा को दे दें। भाजपा नेता उपाध्ये ने आरोप लगाया कि जब ठाकरे मुख्यमंत्री थे, तब वह कार्रवाई करने में विफल रहे और घर पर बैठे रहे, अब अपनी गलती सुधारने का समय आ गया है।
उपाध्ये ने X पर एक पोस्ट में कहा- मराठवाड़ा भयंकर बाढ़ से जूझ रहा है, लोग अपना सब कुछ खो चुके हैं। उद्धव ठाकरे पहले ही पांच जिलों में तीन घंटे का दौरा कर चुके हैं और प्रभावितों के दर्द और पीड़ा पर अपनी चिंता व्यक्त कर चुके हैं। अब कार्रवाई का समय है। उन्हें दशहरा रैली रद्द कर देनी चाहिए और वह राशि बाढ़ पीड़ितों पर खर्च करनी चाहिए। इससे उनकी सहानुभूति को अभिव्यक्ति मिलेगी।
उपाध्ये ने आगे कहा कि यह प्रायश्चित करने का समय है। रैली रद्द करना और धनराशि को भेज देना, लोगों के प्रति उनकी सच्ची चिंता को दर्शाएगा। उन्होंने कहा कि शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के समय यह रैली वैचारिक दशा-दिशा का केंद्र हुआ करती थी। अब यह केवल दूसरों को ”गद्दार” कहने और अपनी पार्टी के छिन जाने की कहानी दोहराने तक सीमित हो गई है। उन्होंने पूछा कि आम कार्यकर्ता के ऊपर लाखों रुपये का बोझ क्यों डाला जाना चाहिए? जबकि रोजाना ”सामना” में वही बातें चलती रहती हैं। हाल ही में ठाकरे ने मराठवाड़ा के पांच बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा किया, जहां उन्होंने प्रभावितों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।

दशहरा रैली रद्द करने का सही समय: केशव उपाध्ये
दशहरा रैली शिवसेना की दशकों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। 2 अक्टूबर को दशहरा के पर्व पर उद्धव ठाकरे मुंबई के शिवाजी पार्क में जनता को संबोधित भी करने वाले हैं। इस बीच बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि मराठवाड़ा बाढ़ की वजह से गंभीर रूप से प्रभावित है। उद्धव ठाकरे ने बाढ़ प्रभावित पांच जिलों में से तीन जिलों के दौरे किए हैं। अब समय है कि वे ‘दशहरा रैली’ कैंसिल कर दें और उसका पैसा बाढ़ पीड़ितों को दें। ऐसा करके कुछ हद तक उनकी सहानुभूति को अर्थ मिलेगा।
बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि जब उद्धव ठाकरे पावर में थे, तब वह किसी तरह की मदद करने में वह असफल रहे और अपने घर के अंदर बैठे रहे। अब वह पश्चाताप करें और दशहरा रैली के पैसे से बाढ़ पीड़ितों की मदद करें। इससे लोगों के प्रति वे अपनी वास्तविक चिंता जाहिर कर सकेंगे।
