Rohit Arya Encounter
नेटवर्क महानगर/मुंबई
मायानगरी मुंबई में गुरूवार को एक ऐसी सनसनीखेज घटना घटी, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। जब ऑडिशन के लिए आए 17 मासूम बच्चों को रोहित आर्या नाम के शख्स ने बंधक बना लिया था। जानिए- वह कौन था? उसकी मांगें क्या थीं? और कैसे मुंबई पुलिस ने कुछ ही घंटों में इस खतरनाक ऑपरेशन को अंजाम दिया?
पवई स्थित ‘RA स्टूडियो’ (आरए) में गुरूवार, (30 अक्टूबर) को हुए किडनैपिंग कांड में कई खुलासे हो रहे हैं। आरोपी रोहित आर्या ने दो दिन पहले यानी 28 अक्टूबर को ही इस घटना का फुल फ्रूफ प्लान तैयार कर लिया था। किडनैपिंग शो की शूटिंग के नाम पर बाकायदा बच्चों को रिहर्सल कराया गया था। उस समय मौके पर प्रोडक्शन टीम, कुछ बच्चों के पैरेट्स भी वहां मौजूद थे, लेकिन कोई भी रोहित आर्या के इरादों को भांप नहीं पाया। फिर 30 अक्टूबर को रोहित ने बनाये हुए प्लान के मुताबिक, इस घटना को अंजाम देना चाहा, परन्तु मुंबई पुलिस ने उसके इरादों को नाकाम कर दिया।
दरअसल, रोहित आर्या ने RA स्टूडियो की पहली मंजिल पर 17 बच्चों सहित कुल 19 लोगों को एयरगन के दम पर बंधक बना लिया था। हालांकि, बंधक बनाने से पहले उसने वेब सीरीज की शूटिंग का ऐसा माहौल क्रिएट किया कि वहां मौजूद लोगों को शक तक नहीं हुआ। रोहित आर्या ने बच्चों को बताया था कि वह एक किडनैपिंग सीन शूट करने जा रहा है। उसने बच्चों को बंदूकें और ज्वलनशील पदार्थ दिखाए और कहा कि उन्हें इसी से एक्टिंग करनी है। इस दौरान कुछ बच्चों की आंखों पर पट्टी भी बांध दी गई, ताकि सीन असली लगे। हालांकि, इसके बाद रोहित आर्या ने असली किडनैपिंग की शूटिंग शुरू कर दी, लेकिन बच्चे तब भी नहीं जान पाए। 28 अक्टूबर को आए बच्चों की संख्या लगभग 36 थी, जिनमें से अगले दिन चुने गए 23 बच्चे ही मौजूद थे। वहीं, 30 अक्टूबर को ऑडिशन के लिए 17 बच्चे बचे थे।
स्टूडियो में लगवाए थे पांच नए कैमरे
रोहित ने RA स्टूडियो के अंदर कुल पांच नए कैमरे खुद लगवाए थे। रोहित ने सोसाइटी के कुछ कैमरों तक भी पहुंच बना ली थी, जिनसे वह पुलिस और दूसरे लोगों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहा था। रोहित ने स्टूडियो के सभी कमरों में ज्वलनशील पदार्थ फैला दिए थे। स्टूडियो के खिड़कियों और दरवाजों पर ह्यूमन सेंसर सिस्टम एक्टिवेट कर रखा था, जिससे उसे पुलिस और दूसरे लोगों की गतविधियों की सूचना मिलती रहे।
पुलिस के मुताबिक, रोहित ने यह सब किसी फिल्मी स्क्रिप्ट की तरह प्लान किया था। जैसे ही पुलिस को इसकी जानकारी मिली, वे मौके पर पहुंची और बेहद चालाकी से बाथरूम की खिड़की से स्टूडियो में घुस गई। पुलिस को यहां भी सेंसर दिखे और उन्होंने फौरन उसे निष्क्रिय कर दिया। पुलिस ने सभी बच्चों को सही सलामत बाहर निकाल लिया। इस दौरान पुलिस की गोली लगने से रोहित आर्या की मौत हो गई। मौके से एयर गन, पेट्रोल, ज्वलनशील रबर सॉल्यूशन और लाइटर बरामद किए गए हैं।
इस मामले में पवई पुलिस ने मृत आरोपी रोहित आर्या के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 109(1), 140 और 287 के तहत मामला दर्ज किया है। घटना की आगे की जांच अब क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है, जबकि बरामद सामान को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
चश्मदीद महिला ने बताई रोहित के आतंक की पूरी कहानी
आरए स्टूडियो में 17 बच्चों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्या के टेरर को करीब से देखने वाली एक बुजुर्ग महिला ने 30 अक्टूबर की पूरी कहानी बताई है। किडनैपिंग कांड में बुरी तरह जख्मी हुई 75 साल की बुजुर्ग महिला मंगल पाटणकर ने 30 अक्टूबर को दोपहर डेढ बजे से लेकर शाम 5 बजे तक घटित हर घटना के पल-पल की बात बताई।
सिर्फ मराठी जानने और समझने वाली मंगल पाटणकर ने बताया कि उस समय सब नॉर्मल लग रहा था, जब रोहित आर्या और एक काले से दिखने वाले व्यक्ति ने हमें कहा कि अंदर के कमरे में सब बच्चों को ले जाओ, वो करीब डेढ़ बजे का समय था। लंच का टाइम था लेकिन रोहित ने हर दिन की तरह गुरुवार को किसी को लंच के लिए बाहर जाने नहीं दिया। मेरी बेटी वंदना जाधव और पोती निराली जाधव को मैंने कॉल किया। वो रोहित के साथ जो काले रंग का व्यक्ति था। उसने मुझे डांट लगाई। उसने कहा कि किसी से बात मत करो। रोहित के साथ इस किडनैपिंग घटना में उसका महत्वपूर्ण किरदार था।
बाद में मैंने स्टूडियो का पर्दा उठाकर देखा तो बाहर पेरेंट्स परेशान और रोते बिलखते दिखे। मैंने फिर मोबाइल से कॉल लगाया और कहा कि आपके परिवार के लोग अंदर ठीक हैं। परेशान मत हो। रोहित के साथ स्टूडियो में एक देशमुख नाम का भी व्यक्ति था। शायद वो डायरेक्टर था, जो इस घटना के एक दिन पहले यानी 29 अक्टूबर को मुंबई से पुणे चला गया था। शायद उसे पता था कि यहां क्या साजिश रची जा रही है। उसे भी पुलिस को पकड़ना चाहिए।
रोहित ने हमें मारा नहीं, न ही चिल्लाया। वो बार बार ये कह रहा था कि उसके पास पैसे नहीं हैं। वो हर बच्चे से एक करोड़ लेगा। उसने अलग-अलग जिलों से ऐसे बच्चे ही स्कूलों से चुने थे, जो अमीर परिवार से थे। उसने बच्चों के पेरेंट्स से फीस भी नहीं ली थी उसे पहले से पता था। शायद कि अगर किडनैपिंग कांड हुआ तो उसे होस्टेज बनाने के बड़े पैसे मिल सकते हैं। जब पुलिस आई तो मैं सब बच्चों को लेकर बाहर की तरफ भागी। मैंने देखा पुलिस ने रोहित के पैर की तरफ गोली मारी और वो नीचे गिर गया। बाद में शायद सीने पर भी गोली मारी होगी। जब एक एक बच्चों को बाहर निकालने जा रही थी। तभी दरवाजा मुझ पर गिरा और मेरे सिर और कंधे से खून निकलने लगा। मैं बेहोश सी हो गई। मुझे कॉन्टेबल सावंत ने वैन में डाला और अस्पताल ले जाया गया।
