नेटवर्क महानगर/नागपुर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि दुनिया के पास ऐसा कोई मार्गदर्शक सिद्धांत नहीं है जो मानव जीवन के कई आयामों में एक साथ प्रगति सुनिश्चित कर सके। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यवस्थाएं व्यक्तिगत कल्याण, सामाजिक हितों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर भ्रमित हैं।
नागपुर में गुरुवार, (4 जून) को आयोजित संघ के ‘वार्षिक कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय’ प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में बोलते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत का समय आ चुका है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल समय आने से काम नहीं चलेगा, बल्कि देश और समाज को अपनी जिम्मेदारियों के लिए पूरी तरह तैयार होना होगा। भागवत ने कहा कि दुनिया मानव शरीर, मन और बुद्धि के विकास को अलग-अलग समझती है, लेकिन ऐसा ढांचा विकसित करने में विफल रही है जो इन तीनों को साथ आगे बढ़ा सके। दुनिया नहीं जानती कि इन तीनों मोर्चों पर प्रगति कैसे हासिल की जाए।
उन्होंने कहा कि अब भारत का समय आ गया है, क्योंकि दुनिया संघर्ष-आधारित और स्वार्थी विकास माडलों के विकल्प तलाश रही है। भारत ऐतिहासिक रूप से ज्ञान, विज्ञान और आर्थिक शक्ति में विश्व का नेतृत्व करता रहा है। समय के साथ भुला दिए गए मूल्यों और शक्तियों को फिर से खोजा जाना चाहिए। समकालीन वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि इनका असर उन देशों पर भी पड़ता है जो सीधे तौर पर इनमें शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर चुनौतियों और अनिश्चितताओं पर ध्यान देते हैं, लेकिन ऐसी कठिन परिस्थितियों में मौजूद अवसरों को भी पहचानना चाहिए। भागवत का मानना था कि दुनिया में ऐसा कोई सिद्धांत नहीं है जो एक साथ सुख, शांति और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित कर सके। भागवत ने कहा कि भारत दुनिया को ऐसे समग्र समाधान दे सकता है जो संघर्षों और संकटों से जूझ रही है, लेकिन जो चीज हमें ‘विश्वगुरु’ बनने से रोक रही है, वह है तैयारी की कमी। उन्होंने कहा कि हम लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि भारत एक ‘विश्वगुरु’ है या उसे होना चाहिए।
हमें हर स्तर पर मजबूत बनाना होगा
भागवत ने कहा कि आज दुनिया भारत की ओर नई दिशा की उम्मीद से देख रही है। ऐसे में भारत को अपनी सामूहिक शक्ति बढ़ानी होगी और हर स्तर पर खुद को मजबूत बनाना होगा। भारत दुनिया को नई दिशा देने के लिए बना है, लेकिन केवल समय के भरोसे बैठने से यह लक्ष्य हासिल नहीं होगा। समय आ गया है, अब समाज को आगे बढ़कर अपनी भूमिका निभानी होगी और पूरी तैयारी करनी होगी। भागवत ने कहा कि हिंदू समाज आज पहले की तुलना में अधिक जागरूक, सक्रिय और अपनी पहचान को लेकर सजग हुआ है। इस सामूहिक जागरूकता के सकारात्मक परिणाम अब पूरे देश में साफ दिखाई दे रहे हैं।
राष्ट्र के साथ हमेशा खड़ा रहा है आरएसएस
उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला ने संघ की सराहना करते हुए कहा कि आरएसएस हमेशा समाज और राष्ट्र के साथ खड़ा रहा है। भले ही ये चुनौतीपूर्ण समय हो, लेकिन ये भारत का समय है। आरएसएस स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि चुनौतियों के बावजूद राष्ट्र और समाज का मजबूती से साथ दिया है। बिरला ने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे दरवाजे पर दस्तक दे चुकी है।
