नेटवर्क महानगर/वाराणसी
ज्ञानवापी परिसर और शृंगार गौरी मंदिर मामले में न्यायिक कार्यवाही में हो रही देरी के विरोध में शनिवार, (8 अगस्त) को ‘श्री आदि विश्वेश्वर मुक्ति विद्वत संघ’ के बैनर तले भव्य कलश यात्रा निकाली गई। मुकदमे के पक्षकारों और श्रद्धालुओं ने मैदागिन स्थित गोरखनाथ मठ से यात्रा शुरू की। यात्रा में शामिल लोगों ने श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर बाबा का जलाभिषेक किया और ज्ञानवापी मामले में जल्द फैसला आने की कामना की।
प्रमुख पक्षकार और संघ के अध्यक्ष डॉ. सोहनलाल आर्य के नेतृत्व में सुबह कलश यात्रा शुरू हुई। इससे पहले गोरखनाथ मठ में पं. सुधीर त्रिपाठी के आचार्यत्व में 21 बटुकों और महिला वादिनियों ने विधिविधान से कलश पूजन किया। इसके बाद हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ यात्रा निकाली गई। आगे बटुकों का जत्था चल रहा था, जबकि महिला वादिनियां सिर पर कलश लेकर पैदल यात्रा में शामिल हुईं।
मैदागिन से निकली यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर पहुंची। यहां श्रद्धालुओं और मुकदमे के पक्षकारों ने बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक कर पूजन-अर्चन किया। उन्होंने ज्ञानवापी मामले में जल्द न्याय मिलने की प्रार्थना की। इसके बाद यात्रा में शामिल लोगों ने माता अन्नपूर्णा के दर्शन-पूजन भी किए।
वहीं, ज्ञानवापी मामले के प्रमुख अधिवक्ता पं. सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि न्यायिक कार्यवाही में हो रहे विलंब को दूर करने और मुकदमे में जल्द फैसला आने की कामना से कलश यात्रा निकाली गई है। उन्होंने कहा कि मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी मुकदमे का ट्रायल शुरू नहीं हुआ है।
जानें- क्या है पूरा मामला?
मां शृंगार गौरी की विग्रह (प्रतिमा) ज्ञानवापी मस्जिद की पश्चिमी बाहरी दीवार के पास एक चबूतरे पर स्थित है। यहां वर्ष 1993 से पहले नियमित पूजा होती थी, लेकिन सुरक्षा कारणों और प्रशासनिक बैरिकेडिंग के बाद से इसे साल में केवल एक बार (चैत्र नवरात्रि या निर्धारित विशेष तिथियों पर) ही दर्शन की अनुमति दी जाती रही है।
अगस्त 2021 में पांच महिला वादकारियों (राखी सिंह, सीता साहू, मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी और रेखा पाठक) ने वाराणसी की अदालत में याचिका दायर कर यहां वर्षभर नियमित पूजा-अर्चना करने का अधिकार मांगा है। अदालत के आदेश पर ज्ञानवापी परिसर का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) सर्वे भी कराया गया है, जिसके बाद से यह मामला देश की अदालतों में विचाराधीन है।
