राजेश जायसवाल/मुंबई
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के ऐलान के बाद, महाराष्ट्र के मुखिया (CM) देवेंद्र फडणवीस ने सूचना का अधिकार (RTI) Maharashtra Right to Information Rules, 2005 नियमों में किए गए कई विवादित बदलावों पर (2 जुलाई) को रोक लगाने का आदेश दिया है। इससे पहले पिछले महीने अन्ना हजारे ने चेतावनी दी थी कि अगर राज्य सरकार ने RTI नियमों में किए गए संशोधनों को तुरंत वापस नहीं लिया, तो वह 5 जुलाई 2026 से अहिल्यानगर जिले के रालेगण सिद्धि गांव में भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
बता दें कि महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026 (The Maharashtra Right to Information Rules 2026) में कई अहम बदलावों का प्रस्ताव किया गया था, जिसमें अधिक एप्लीकेशन फीस, आरटीआई का कारण बताना जरुरी, पहचान का सबूत देना अनिवार्य किए जाने के अलावा एक यह शर्त भी शामिल था कि हर आवेदन में सिर्फ एक ही विषय पर जानकारी मांगी जाए। लेकिन सीएम फडणवीस ने कल गुरुवार को RTI के मुख्य आयुक्त से नए नोटिफाई किए गए नियमों पर रोक लगाने का निर्देश दे दिया।
कानून में संशोधन से नाराज अन्ना हजारे ने फडणवीस सरकार से इन नियमों को वापस लेने की अपील की थी। उनका आरोप था कि ये संशोधन RTI एक्ट की मूल भावना को कमजोर करते हैं और नागरिकों के लिए सरकारी जानकारी पाने की प्रक्रिया को और मुश्किल बना देते हैं। साथ ही उन्होंने धमकी दी थी कि अगर RTI नियमों में किए जा रहे बदलाव वापस नहीं लिए गए, तो वे 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे।

12 जून को कई अहम बदलाव किए गए
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी और 12 जून 2026 को सरकारी गजट में प्रकाशित नोटिफिकेशन के मुताबिक, नए नियम प्रकाशित होते ही तुरंत लागू हो गए। नए नियमों के तहत, RTI एक्ट के तहत जानकारी मांगने वाले हर आवेदकों को 30 रुपये की एप्लीकेशन फीस देनी होगी।
नियमों में यह प्रावधान भी किया गया है कि RTI आवेदन करने के दौरान आमतौर पर मुद्दा एक ही विषय तक सीमित रहे. साथ ही शब्दों की सीमा भी तय की गई थी और यह 150 शब्द से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर कई विषय शामिल होते हैं, तो PIO सिर्फ पहले विषय पर कार्रवाई कर सकता है और आवेदक को शेष अन्य मुद्दों के लिए अलग-अलग आवेदन दाखिल करने की सलाह दे सकता है।
सीएम फडणवीस को भेजे गए एक पत्र में अन्ना हजारे ने कहा था कि नए नियमों से प्रक्रिया में रुकावटें आती हैं, खर्च बढ़ती है और अपील की प्रक्रिया में जटिलताएं पैदा होती हैं, जिससे जवाबदेही कमजोर होती है। साथ ही उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि ये नियम जनता से सलाह-मशविरा किए बिना बनाए गए। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन्हें तुरंत रद्द किया जाए और RTI एक्सपर्ट, सूचना आयुक्तों, सोशल एक्टिविस्ट, वकीलों, पत्रकारों और नागरिकों से सलाह-मशविरा करके नए नियम बनाए जाएं।
फडणवीस सरकार की ओर से अन्ना हजारे को मनाने के लिए मुख्य सूचना आयुक्त राहुल पांडे उनसे मिलने गए थे परन्तु बातचीत के बाद कुछ ठोस नतीजा नहीं निकला। आरटीआई नियमों के विरोध में अन्ना 5 जुलाई से अनशन पर बैठने वाले थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नए नियम लोकतंत्र और पारदर्शी शासन के खिलाफ हैं।
