नेटवर्क महानगर/मुंबई
मुंबई के एक सरकारी अस्पताल में बुधवार की सुबह एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई। मामला कूपर अस्पताल का है। यहां नशे में धुत एक मरीज ने इलाज के दौरान 23 वर्षीय इंटर्न महिला डॉक्टर पर हमला कर दिया। इस हमले से साफ है कि इमरजेंसी और नाइट ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और नर्स कितनी असुरक्षित स्थिति में काम कर रही हैं। यह घटना न केवल अस्पताल प्रशासन को चिंता में डाल दिया है, बल्कि एक बार फिर देशभर में डॉक्टर और नर्स की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
घटना बुधवार की सुबह 4 बजे की बताई जा रही है, जब 23 साल की इंटर्न डॉक्टर मरीज की जांच कर रही थी। अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक, एक नौजवान युवक को नशे की हालत में इलाज के लिए कूपर अस्पताल में लाया गया था। इंटर्न ने पहले असहजता जताई और कहा कि मरीज पहले से ही बेहद आक्रामक, असहज और बैचेनी महसूस कर रहा था। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने उसे वाइटल चेक करने के लिए कहा। जैसे ही वह ऐसा कर रही थी, मरीज ने डॉक्टर के सामने ही इंटर्न डॉक्टर की छाती पर दो बार लात मारी।
महिला डॉक्टर को आई चोट, इलाज जारी
वैसे तो महिला डॉक्टर को कोई गंभीर अंदरूनी चोट नहीं आई, लेकिन हमले के बाद उन्हें तेज दर्द, सदमे और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा। वहीं अस्पताल वालों का कहना है कि डॉक्टर को प्राथमिक इलाज दी गई और बाद में आराम करने की सलाह दी गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस टाइप की घटनाएं केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी व्यक्ति को गहरी चोट पहुंचाती हैं।
अस्पताल प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल?
इस घटना के बाद सबसे पहले अस्पताल प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाया गया, जबकि कुछ वर्कर्स और डॉक्टरों ने यह आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रशासन ने पीड़ित डॉक्टर को पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से रोकने की कोशिश की। फिलहाल, अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि शिकायत दर्ज कराई गई है या नहीं। जबकि इसी बीच डीन डॉ. देव शेट्टी ने कहा कि यह मामूली झड़प थी और यह फैसला महिला पर छोड़ दिया गया कि वह पुलिस में शिकायत करना चाहती है या नहीं।
मेडिकल स्टाफ में गुस्सा और भय का माहौल
इस घटना के बाद हॉस्पिटल के इंटर्न डॉक्टरों, रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ में गुस्सा और डर दोनों देखने को मिला है, खासकर उन स्टाफ के लिए जो रात की ड्यूटी या इमरजेंसी वार्डों में काम करते हैं। कई डॉक्टरों का ऐसा कहना भी है कि नशे में धुत मरीजों और उनके परिजनों से हिंसा की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन प्रशासनिक इंतजाम बेहद कमजोर है।
