नेटवर्क महानगर/मुंबई
लालबाग के कालाचौकी इलाके में ‘काळाचौकी महागणपती मंडल’ के सामने रविवार, (20 सितंबर) को तड़के करंट लगने से दो लोगों की मौत हो गई है। यह घटना कालाचौकी में दत्ताराम लाड मार्ग पर ‘कालाचौकी विभाग सार्वजनिक उत्सव मंडल’ के पास रविवार, तड़के करीब 2:40 बजे हुई, जब गणपति उत्सव के दौरान लालबाग इलाके में भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। बताया जा रहा है कि गणपति पंडाल के पास करंट फैलने से इस हादसे में 8 साल की रागिनी घनश्याम यादव और 36 साल की सुजाता की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार में मातम पसर गया है। लोगों में गणपति मंडल के लापरवाही को लेकर काफी गुस्सा देखा गया।
पुलिस और अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, घटना की सूचना मुंबई अग्निशमन विभाग (MFB) को तड़के 2:42 बजे दी गई। इसके बाद अग्निशमन विभाग, पुलिस, बेस्ट एंड ईस्ट और महानगरपालिका (बीएमसी) वार्ड कार्यालय के कर्मियों को मौके पर भेजा गया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से मिली जानकारी के अनुसार, पांच घायलों को भायखला स्थित मसीना अस्पताल ले जाया गया, जबकि अन्य को परेल स्थित ग्लोबल अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में 8 वर्षीय रागनी घनश्याम यादव को मृत घोषित कर दिया गया। किरण अकबर नाइक (19), तन्वी नरश हांडे (19), साहिल संदीप तारे (19) और रूही सिंह (12) का इलाज चल रहा है और उनकी हालत के बारे में जानकारी का इंतजार था। इसी के बाद में अधिकारी ने दूसरी मौत की सूचना देते हुए बताया कि ग्लोबल अस्पताल में भर्ती 36 वर्षीय सुजाता नामक महिला ने भी दम तोड़ दिया है।
इतनी भीड़ में ‘सेफ्टी’ का कोई इंतजाम नहीं!
हादसे में जान गंवाने वाली 8 साल की रागिनी यादव की मौसी किस्मती यादव ने गणपती पंडाल की सुरक्षा-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि वह बच्चों के साथ गणपति पंडाल में दर्शन के लिए पहुंची थीं। वहां काफी भीड़ थी, इसलिए वे दर्शन किए बिना वापस लौटने की सोच रहे थे। उन्होंने बताया कि, रात करीब 2.40 बजे वे पंडाल के पास एक दुकान के बाहर खड़ी थी। इसी दौरान वहां लगा तिरपाल खींचा गया। इसके साथ ही पानी और बिजली का तार नीचे गिर गया। जिससे कई बच्चे करंट की चपेट में आ गए, उनके दो बच्चों को भी करंट लगा। एक बच्चे के मुंह से झाग निकलने लगा। इसके बाद आसपास मौजूद लोगों ने मिलकर बच्चों को तार से अलग किया।
मृतक बच्ची की मौसी का आरोप है कि पंडाल के पास बिजली के तारों को लेकर पर्याप्त सुरक्षा नहीं थी। बारिश के कारण वहां पानी भी जमा था। ऐसे में खुले तारों के पास लोगों को जाने से रोकने की जरूरत थी। उनका कहना है कि आयोजकों को इतनी बड़ी भीड़ जुटाने से पहले सुरक्षा का पूरा इंतजाम करना चाहिए था। गुस्से में भरी किस्मती यादव ने मीडिया को भी खरी-खोटी सुनाते हुआ कहा कि उनका बच्चा वापस नहीं आ सकता। उन्होंने प्रशासन और सरकार से सवाल किया कि आखिर ऐसे हादसों की जिम्मेदारी कौन लेगा? उनका कहना था कि हादसे के बाद मीडिया, पुलिस और संबंधित डिपार्टमेंट अधिकारी आते हैं, बयान लिए जाते हैं, लेकिन परिवार को अपना बच्चा वापस नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा कि गणपति उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में लोग गणपति पंडाल में आते हैं। ऐसे में आयोजकों को लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना चाहिए।उन्होंने मांग की कि इस घटना की जिम्मेदारी तय हो और भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं। इस हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रशासन और पुलिस की टीमें स्थिति संभालने में जुटी रही।
मंत्री आशीष शेलार ने की परिजनों से मुलाक़ात
महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री आशीष शेलार KEM अस्पताल पहुंचकर रागिनी के पिता घनश्याम यादव और सुजाता के पति से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और सुजाता के मृतक देह को उनके मूल गांव ले जाने के लिए ज़रूरी इंतज़ाम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हर गणेश मंडल के लिए गणेशोत्सव के दौरान अपने इलाके में सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करना बहुत ज़रूरी है। इस बारे में मुंबई पुलिस और म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन को भी ज़रूरी निर्देश दिए गए हैं। सभी गणेश मंडलों से विनम्र निवेदन है कि त्योहार के दौरान सुरक्षा को लेकर ज़्यादा जागरूक रहें। साथ ही, भक्तों को भी प्रशासन और मंडलों की सुरक्षा के लिए किए गए उपायों में सहयोग करना चाहिए।
