Rajghat bridge news
नेटवर्क महानगर/वाराणसी
वाराणसी और चंदौली को आपस में जोड़ने वाले ऐतिहासिक मालवीय ब्रिज यानी (राजघाट पुल) से सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बेहद जरूरी सूचना है। राजघाट पुल पर आगामी 14 जून से बड़े पैमाने पर मरम्मत का कार्य शुरू होने जा रहा है, जो कि 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। मरम्मत कार्य के चलते अगले 60 दिनों तक रात के समय पुल पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी।
अपर पुलिस उपायुक्त (यातायात) अंशुमान मिश्रा ने बताया कि मरम्मत कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए रोजाना आठ घंटे का ब्लॉक लिया जाएगा। यह ब्लॉक प्रतिदिन रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक प्रभावी रहेगा। सुरक्षा के मद्देनजर राजघाट पुल के दोनों छोरों पर सीमेंटेड डिवाइडर लगाकर रास्ता बंद किया जाएगा। हालांकि, पड़ाव और राजघाट के बीच पैदल चलने वाले यात्रियों को आने-जाने की सहूलियत दी गई है। इस पूरी व्यवस्था और ब्लॉक को अंतिम रूप देने के लिए शुक्रवार, (12 जून) को यातायात पुलिस, रेलवे और पीडब्ल्यूडी (PWD) के आला अधिकारियों की एक समन्वय बैठक भी होने जा रही है।

Route Diversion प्लान पर यात्री कृपया ध्यान दें!
मरम्मत कार्य के दौरान रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच वाराणसी आने-जाने वाले वाहनों को निम्नलिखित वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करना होगा।
छोटे और हल्के वाहन: रात के समय पड़ाव और राजघाट की ओर से आने-जाने वाले वाहन अब रामनगर-सामनेघाट पुल के रास्ते वाराणसी शहर में प्रवेश कर सकेंगे।
भारी वाहन (Heavy Vehicles): भारी वाहनों को शहर में आने की अनुमति नहीं होगी। इन्हें टेंगरा मोड़ हाईवे से डाफी और मोहनसराय की तरफ डायवर्ट किया जाएगा।
बिहार की ओर से आने वाले वाहन: बिहार की तरफ से आने-जाने वाले वाहन हाईवे और रिंग रोड फेज-3 के पंचफेड़वा मार्ग का इस्तेमाल करेंगे।
क्या है पुल की मुख्य विशेषताएं और इतिहास?
बता दें कि इस पुल का निर्माण अंग्रेजों द्वारा किया गया था और इसे 1887 में यातायात के लिए खोला गया था। मूल रूप से इसे तत्कालीन गवर्नर-जनरल ‘लॉर्ड डफरिन’ के नाम पर ‘डफरिन ब्रिज’ कहा जाता था। देश की आजादी के बाद वर्ष 1948 में इसका नाम बदलकर महान शिक्षाविद महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के नाम पर ‘मालवीय ब्रिज’ कर दिया गया।
यह पुल वाराणसी शहर (काशी स्टेशन) को पंडित दीनदयाल उपाध्याय (DDU) जंक्शन (मुगलसराय) और पड़ोसी जिले चंदौली से जोड़ता है। पुल की उम्र को देखते हुए समय-समय पर इसके रख-रखाव का काम होता रहता है। मरम्मत कार्यों के चलते यातायात ब्लॉक कर वाहनों का रूट डायवर्ट किया जाता है। यह पुल केवल परिवहन का साधन नहीं है, बल्कि इसके नीचे से बहती गंगा और नमो घाट का विहंगम दृश्य पर्यटकों को बहुत आकर्षित करता है।
