BJP नेता का आरोप- ऑनलाइन बकरों की खरीदारी के नाम पर राज्य सरकार मुसलमानों की भावनाओं के साथ कर रही खिलवाड़!

मुंबई: कोरोना संकट के चलते महाराष्ट्र सरकार बकरीद के लिए बकरों की ऑनलाइन खरीदारी की इजाजत दी है, लेकिन अब दूसरे राज्यों से आ रहे बकरों से भरी गाड़ियों को राज्य की सीमा में दाखिल नहीं होने दिया जा रहा है।
मुंबई-गुजरात सीमा पर जानवरों से भरे 200 से अधिक वाहन खड़े हैं। खबर है कि यहाँ भूख और प्यास से रोजाना कई बकरों की मौत भी हो रहीं है। जिससे अब सरकार में शामिल मुस्लिम मंत्रियों पर लोगों का गुस्सा फूट रहा है।
बीजेपी नेता हाजी अराफात शेख ने दावा किया है कि मुंबई से सटे सीमा पर एक हजार जानवरों से लदे वाहन खड़े हैं, जिन्हें मीरारोड से वसई तक रोक कर रखा गया है। सरकार को ऐसा ही करना था तो ऑनलाइन खरीदारी की इजाजत क्यों दी गई?
शेख का आरोप है कि ऑनलाइन बकरों की खरीदारी के नाम पर राज्य सरकार मुसलमानों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। यही नहीं महाविकास आघाड़ी सरकार के मुस्लिम कैबिनेट मंत्री अपने कर्तव्यों में पूरी तरह से विफल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक कहते हैं कि ऑनलाइन बकरों को खरीद कर कुर्बानी की जाए, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि मुसलमान ऑनलाइन एक स्वस्थ बकरा कैसे खरीदेगा? जबकि यह शरीयत के खिलाफ है।
एक ओर ऑनलाइन के नाम पर मुसलमानों को गुमराह किया जा रहा है तो दूसरी तरफ बकरों की गाड़ियों को जब्त किया जा रहा है। शेख के मुताबिक बकरे भूख और प्यास के अलावा खड़े-खड़े बीमार होकर मर रहे हैं। क्या यह जानवरों के लिए क्रूरता नहीं है कि उन्हें बिना भोजन और पानी के गाड़ियों में रखने के लिए मजबूर किया जा रहा है और उन्हें शहरों की सीमाओं में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
शेख ने सवाल किया कि महाराष्ट्र के किस मंत्री ने कुर्बानी के लिए ऑनलाइन बकरे खरीदे हैं? क्या उन्हें पता नहीं कुर्बानी के लिए किस तरह से बकरे खरीदे जाते हैं? आगे उन्होंने कहा कि जब बीजेपी की सरकार थी उस वक्त सभी पार्टी के नेताओं को बैठक में बुलाया गया था साथ ही जो इस व्यपार से जुड़े है खटीक समाज के लोगो से चर्चा की जाती थी लेकिन ऐसा नही किया गया, जो इस विभाग के मंत्री है सुनील केदार उनको तक नही पूछा जा रहा है, कुछ मुस्लिम नेता अपनी रोटी सेकने के लिए बस मुस्लिम समाज को बेवकूफ बना रहे है और मुंबई के टोल नाके पर जानवर मर रहे है आज सरकार ने फैसला नही किया तो हम तीव्र विरोध करेंगें?
