नेटवर्क महानगर/नागपुर
महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे किसानों और उनके परिवारों के साथ दिवाली की खुशियां साझा करने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के सभी मंत्रियों से अपील की है कि वे दिवाली के दौरान कम से कम एक दिन किसी गांव में जाकर किसानों के साथ त्योहार मनाएं। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक संकट और फसल नुकसान से जूझ रहे किसानों का मनोबल बढ़ाना तथा उन्हें यह भरोसा दिलाना है कि मुश्किल समय में सरकार उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र इस समय गंभीर सूखे की परिस्थिति से गुजर रहा है। राज्य के कई हिस्सों में किसान पानी की कमी और कृषि संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में त्योहार के दौरान किसानों और उनके परिवारों को अकेला महसूस नहीं होना चाहिए। मंत्रियों का गांवों में जाकर किसानों के साथ समय बिताना केवल दिवाली मनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे उनकी समस्याओं को करीब से समझने का अवसर भी मिलेगा।
सीएम फडणवीस ने स्पष्ट किया कि सरकार किसानों की परेशानियों को लेकर गंभीर है और उनकी मदद के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सूखे जैसी प्राकृतिक परिस्थिति का तत्काल समाधान निकालना आसान नहीं है, लेकिन सरकार किसानों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

इसी पहल के पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस बार दीपावली का त्योहार किसानों के बीच मना रहे हैं। सीएम फडणवीस नागपुर जिले की नरखेड़ तहसील के लोहारी सावंगा गांव पहुंचे, यहां वे किसानों के साथ दिवाली की खुशियां मना रहे हैं। त्योहार के अवसर पर मुख्यमंत्री फडणवीस का ग्रामीण क्षेत्र में पहुंचना चर्चा का विषय बना हुआ है। दीपावली जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर किसानों के बीच समय बिताने की उनकी पहल को ग्रामीण समाज के साथ जुड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।
पूरे देशभर में दीपावली का त्योहार बड़े उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर खासकर लोग अपने परिवारों और परिचितों के साथ खुशियां साझा करते हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बार त्योहार मनाने के लिए नागपुर जिले के लोहारी सावंगा गांव को चुना है। यहां वे किसानों के बीच मौजूद हैं और दीपावली के उत्सव में शामिल हो रहे हैं। नागपुर जिले की नरखेड़ तहसील में स्थित लोहारी सावंगा गांव में मुख्यमंत्री की मौजूदगी विशेष महत्व रखती है। राज्य के मुख्यमंत्री का किसी ग्रामीण क्षेत्र में पहुंचकर किसानों के साथ त्योहार मनाना सामान्य राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यक्रमों से अलग पहल है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों और खेती-किसानी से जुड़े लोगों की ओर ध्यान आकर्षित होता है।
किसान देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेतों में मेहनत करने वाले किसानों का योगदान समाज के हर वर्ग के जीवन से जुड़ा हुआ है। ऐसे में मुख्यमंत्री फडणवीस का किसानों के बीच पहुंचकर त्योहार मनाना उनके महत्व को रेखांकित करता है। महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में दीपावली का अपना विशेष महत्व है। गांवों में इस त्योहार के दौरान घरों की साफ-सफाई, सजावट, दीप प्रज्वलन और पारंपरिक उत्सवों का आयोजन किया जाता है। खेती-किसानी से जुड़े परिवार भी अपने रीति-रिवाजों के अनुसार त्योहार मनाते हैं। मुख्यमंत्री की मौजूदगी के कारण लोहारी सावंगा गांव इस बार दीपावली के अवसर पर विशेष चर्चा में है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का नागपुर जिले से पुराना राजनीतिक संबंध रहा है। इस बार दीपावली मनाने के लिए उन्होंने नागपुर जिले की नरखेड़ तहसील के लोहारी सावंगा गांव को चुना है। राज्य की राजधानी और बड़े शहरों से अलग किसी गांव में त्योहार मनाना ग्रामीण जीवन की ओर ध्यान आकर्षित करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है और किसानों की मेहनत पर अनेक परिवारों की आर्थिक गतिविधियां निर्भर करती हैं। लोहारी सावंगा गांव में किसानों के साथ दीपावली मनाने की जानकारी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस के इस कार्यक्रम को लेकर काफी चर्चा हो रही है। दिवाली के दिन उनका किसानों के बीच मौजूद रहना कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण है। हालांकि, इस दौरे के दौरान किसी नई सरकारी योजना, आर्थिक सहायता या किसानों के लिए विशेष घोषणा की जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है। इसलिए कार्यक्रम को किसी नई कृषि योजना या राहत पैकेज से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। फिलहाल, इस कार्यक्रम का मुख्य पहलू मुख्यमंत्री का किसानों के साथ त्योहार मनाना ही है। किसानों के बीच उनकी मौजूदगी ने इस बार गांव के दीपावली उत्सव को विशेष बना दिया है।
बता दें कि महाराष्ट्र में इस वर्ष कम बारिश के कारण कृषि क्षेत्र गंभीर संकट का सामना कर रहा है। राज्य के लगभग 85 प्रतिशत तालुकाओं में सूखे की स्थिति का असर सामने आया है। बारिश की कमी से फसलों को नुकसान पहुंचा है और बड़ी संख्या में किसान परिवार आर्थिक परेशानियों से घिरे हुए हैं। खेती पर निर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में किसानों की परेशानी का असर अन्य वर्गों पर भी पड़ता है। फसल उत्पादन प्रभावित होने से किसानों की आमदनी कम होती है। इसका प्रभाव ग्रामीण बाजार, छोटे कारोबार और स्थानीय रोजगार पर भी पड़ता है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने इसी परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों से किसानों के बीच पहुंचने की अपील की है। उनका कहना है कि किसानों की समस्याओं को केवल सरकारी बैठकों और कार्यालयों के माध्यम से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। गांवों में जाकर परिवारों से बातचीत करने पर उनकी वास्तविक जरूरतों और चुनौतियों का पता चलता है।
दिवाली से पहले महाराष्ट्र सरकार ने सूखा प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए आर्थिक सहायता भी जारी की है। मुख्यमंत्री ने 4 नवंबर को जानकारी दी थी कि करीब 73 लाख किसानों के खातों में 5,000 रुपये की अग्रिम राहत राशि भेजी जा चुकी है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अगले दो दिनों में लगभग 95 प्रतिशत पात्र किसानों तक यह राशि पहुंचाने का लक्ष्य था। कुछ किसानों के बैंक खातों से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण भुगतान में देरी हुई थी। सरकार की ओर से यह सहायता किसानों को त्योहार से पहले आर्थिक राहत देने के उद्देश्य से उपलब्ध कराई गई है। इससे मुश्किल हालात में परिवारों को कुछ मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, सूखे से हुए नुकसान की तुलना में यह राशि कितनी पर्याप्त होगी, इस पर किसानों के बीच अलग-अलग राय भी सामने आई है।
कर्जमाफी योजना के तहत भी किसानों को राहत मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए चलाई जा रही कर्जमाफी योजना को लेकर भी जानकारी साझा की थी। पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर कर्जमाफी योजना के तहत लगभग 4.8 लाख किसानों को लाभ पहुंचाने की बात कही गई। इसमें मराठवाड़ा क्षेत्र के करीब 2.7 लाख किसान शामिल थे। CM फडणवीस ने बताया था कि कर्जमाफी के लिए कुल 19,000 करोड़ रुपये की राशि लगभग 21 लाख किसानों तक पहुंचाई गई है। सरकार का कहना है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को राहत देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा मराठवाड़ा क्षेत्र में पानी की समस्या को दूर करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया था कि इस क्षेत्र को जल्द ही लगभग 7 टीएमसी पानी उपलब्ध कराने की योजना है। इसका लाभ मुख्य रूप से बीड और धाराशिव जिलों को मिलने की बात कही गई। किसान संगठनों ने राहत राशि पर उठाए सवाल सरकार की ओर से आर्थिक सहायता और कर्जमाफी की जानकारी दिए जाने के बावजूद किसान संगठनों ने राहत उपायों की पर्याप्तता पर सवाल उठाए हैं। किसान सभा के नेता अजीत नवले ने कहा कि किसानों के संकट की गंभीरता को देखते हुए 5,000 रुपये की सहायता पर्याप्त नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नमो शेतकरी योजना की कुछ किस्तों का भुगतान लंबित है। उनके अनुसार, किसानों को वास्तविक राहत देने के लिए सरकार को लंबित भुगतान जारी करने और फसल नुकसान का मुआवजा बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।इस तरह एक तरफ सरकार राहत योजनाओं और गांवों में पहुंचकर किसानों से संवाद करने की पहल कर रही है, वहीं दूसरी तरफ किसान संगठनों की मांग है कि सूखे से हुए नुकसान के अनुपात में अधिक आर्थिक सहायता दी जाए। सामाजिक संगठनों से भी सहयोग की अपील मुख्यमंत्री फडणवीस ने किसानों की मदद के लिए केवल सरकारी प्रयासों पर निर्भर रहने के बजाय सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों से भी आगे आने की अपील की है। उनका कहना है कि किसानों की मुश्किलें पूरे ग्रामीण समाज को प्रभावित करती हैं। ऐसे में राहत कार्यों में समाज की भागीदारी भी जरूरी है। सरकार की योजना है कि मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के गांवों में पहुंचने से किसानों की समस्याओं को समझने और उन पर संबंधित स्तर पर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। दिवाली पर किसानों को साथ होने का भरोसा महाराष्ट्र सरकार की इस पहल के जरिए मुख्यमंत्री और मंत्री सूखा प्रभावित परिवारों के साथ त्योहार की खुशियां साझा करेंगे। मुख्यमंत्री का संदेश है कि किसान इस संकट में खुद को अकेला न समझें। सरकार उनकी आर्थिक और कृषि संबंधी परेशानियों को दूर करने के लिए प्रयास जारी रखेगी। मुख्यमंत्री फडणवीस का गांव में जाकर किसान परिवार के साथ दिवाली मनाना इस पहल का प्रमुख हिस्सा है। अब देखना होगा कि इस संवाद के बाद किसानों की सिंचाई, फसल बीमा, पानी और मुआवजे से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए कितने प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।
